हज बैतुल्लाह की फजीलतें और बरकतें

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Hajj baitullah ki fazilat or barkat
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hajj baitullah ki fazilat or barkat

हज बैतुल्लाह की फजीलतें और बरकतें

अहादीस में हज, उमरा, तवाफ और सई का बड़ा ही अज्र व सवाब है। इनमे से चंद खास अहादीस यह हैं।

तलबीहा की फजीलतः- हजरत सहल बिन साद (रजि0) से रिवायत है कि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया-अल्लाह तआला का मोमिन व मुस्लिम बंदा जब हज

या उमरा का तलबीहा पुकारता है (और कहता है लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक) तो उसकी दाहिनी तरफ और बाईं तरफ अल्लाह तआला की जो भी मखलूक होती है।

चाहे वह बेजान पत्थर और दरख्त या ढेले हों वह भी उस बंदे के साथ लब्बैक कहती हैं यहां तक कि जमीन इस तरफ और इस तरफ से खत्म हो जाती है।

(तिरमिजी)

हजरत जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रजि0) से रिवायत है कि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) ने फरमाया:-

जिस शख्स ने एक दिन हालते एहराम में तलबीहा कहते हुए गुजारा यहां तक कि (उस दिन का) सूरज गुरूब हो गया तो वह सूरज उसके गुनाह लेकर गुरूब होगा और वह महरम ऐसा (गुनाहों से पाक हो जाएगा) जैसे उस वक्त था

जब उसकी मां ने उसको जना था।

अल्लाह तआला केे मेहमानः- हजरत अबू हुरैरा (रजि0) से रिवायत है कि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमायाझ और उमरा करने वाले अल्लाह तआल के मेहमान हैं अगर वह अल्लाह तआला से दुआ करें तो वह उनकी दुआ कुबूल फरमाए और अगर वह उससे मगफिरत मांगे तो वह उनकी मगफिरत फरमाए।

(इब्ने माजा)

हजरत सईद बिन जबीर (रजि0) से रिवायत है वह फरमाते हैं कि मैं हजरत इब्ने अब्बास (रजि0) के उस मरज में हाजिर हुआ जिसमें उनका इंतकाल हुआ तो मैंने उन्होंने अपने बेटों से यह फरमाते हुए सुना

कि ऐ मेरे बेटो! पैदल हज करना क्योंकि मुझे इतना किसी चीज का गम नहीं जितना पैदल हज न करने का है, साहबजादों ने अर्ज किया कहां से पैदल हज किया जाए?

फरमाया कि मक्का से फिर फरमाया कि सवारी पर हज करने वाले को हर कदम पर मक्का की नेकियों मे से सात सौ नेकियां मिलती हैं।

साहबजादों ने अर्ज किया मक्का की नेकियों से क्या मुराद? फरमाया मक्का की एक नेकी एक लाख नेकियों के बराबर है।

हजतर इब्ने अब्बास (रजि0) से रिवायत है वह फरमाते हैं कि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया-

जिस शख्स ने मक्का में रमजान का महीना पाया और उसने रोजे रखे और हस्बे सहूलत (रात में) उसने इबादत की तो उसके लिए एक लाख रमजान के महीनों का सवाब लिखा जाएगा।

(इब्ने माजा)

हजरत हसन बसरी फरमाते हैं कि हरम का एक रोजा सवाब में एक लाख रोजों के बराबर है और एक दरहम का सदका एक लाख दरहम सदका करने का सवाब रखता है।

और (हरम की) हर नेकी एक लाख नेकियों के बराबर है।

इसलिए खूब नेक काम करें और गुनाहों से बेहद बचें गुनाह हो जाए तो फौरन तौबा करें और इस हाजिरी को बेहद गनीमत समझें और इसकी दिल व जान से कद्र करें कुछ मालूम नहीं फिर यह मौका मिल न मिले। मस्जिदुल हराम का

सवाबः- हजरत अनस (रजि0) से रिवायत है वह फरमाते हैं कि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का इरशाद है:-

अगर आदमी अपने घर में नमाज पढे तो उसको सिर्फ एक नमाज का सवाब मिलता है।

और मोहल्ले की मस्जिद में पच्चीस गुना सवाब मिलता है

और जामा मस्जिद में पांच सौ गुना सवाब ज्यादा मिलता है

और बैतुल मुकद्दस की मस्जिद में पचास हजार नमाजों का सवाब मिलता है

और मेरी मस्जिद यानी मस्जिदे नबवी में पचास हजार नमाजों का सवाब मिलता है

और मस्जिदुल हराम में (जो मक्का में है) एक लाख नमाजों का सवाब मिलता है।

(इब्ने माजा)

फायदाः-

बहुत सी अहादीस में मस्जिदे नबवी का सवाब मस्जिदे अकसा से ज्यादा आया है लेकिन इस हदीस में दोनो मस्जिदों का सवाब पचास हजार बयान किया गया है।

और बाज उलेमा ने इस हदीस में यह तौजीह बयान फरमाई है कि यहां हर मस्जिद का सवाब इससे पहले की मस्जिद के एतबार से है।

यानी जामा मस्जिद का सवाब मोहले की मस्जिद के सवाब से पांच सौ बार दो गुना है।

मगर अल्लाह तआला की रहमत के खजानों में कोई कमी नहीं है वह इससे भी ज्यादा देने पर कादिर है।

उनकी रहमत पर किसी का इजारा नहीं इसलिए मस्जिदे हराम में एक नमाज जमाअत के साथ अदा करने पर मजकूरा सवाब मिलने को मुश्किलन समझा जाए।

लोग हज फर्ज होने के बावजूद नहीं करते वह कितने बड़े सवाब से महरूम हैं वह सोचें और गौर करें।

बैतुल्लाह की फजीलतः झरत इब्ने अब्बास (रजि0) से रिवायत है वह फरमाते हैं:-

कि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया-अल्लाह तआला की एक सौ बीस रहमतें रोजाना उस घर (बैतुल्लाह) पर नाजिल होती हैं

जिनमें से साठ तवाफ करने वालों पर, चालीस वहां नमाज पढने वालों पर और बीस बैतुल्लाह को देखने वालों पर होती हैं।

(बेहकी) बैतुल्लाह को सिर्फ देखना भी इबादत है और बाइसे रहमत है इसलिए बहुत से सहाबा और ताबेईन से इसके फजायल मंकूल हैं। उनमें से चंद यह हैं:-

जमजम के पानी की फजीलतःझरत जाबिर (रजि0) से रिवायत है वह फरमाते हैं कि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को यह फरमाते हुए सुना:-

जमजम का पानी जिस नीयत से पिया जाए उससे वही फायदा हासिल होता है।

(इब्ने माजा)

हजरत इब्ने अब्बास (रजि0) से रिवायत है वह फरमाते हैं कि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:-

जमजम का पानी जिस नीयत से पिया जाए उससे वही फायदा होता है अगर आपने किसी बीमारी से सेहत के लिए पिया तो:-

अल्लाह तआला शिफा अता फरमाएंगे और अगर (खाने की जगह) पेट भरने के लिए पिया तो अल्लाह तआला पेट भर देंगें और अगर प्यास बुझाने के लिए इसको पिया तो अल्लाह तआला प्यास दूर फरमाएंगे।

यह हजरत जिब्रईल (अलै0) की खिदमत है और हजरत इस्माईल (अलै0) की सबील है।

तवाफ पर कदम-कदम पर नेकियांः- हजरत अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन अल आस (रजि0) से रिवायत है कि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:-

जो शख्स (सुन्नत के मुताबिक) कामिल वजू करे और (तवाफ के लिए) हज्र असवद के पास आए ताकि उसका इस्तलाम करे तो वह (अल्लाह तआला की ) रहमत में दाखिल हो जाता है।

फिर (जब हज्र असवद का) इस्तलाम करके वह मखसूस दुआ पढता है तो अल्लाह तआला की रहमत उसको ढांप लेती है और जब वह बैतुल्लाह का तवाफ करता है तो अल्लाह तआला उसको हर कदम पर सत्तर हजार नेकियां अता फरमाते हैं।

सत्तर हजार गुनाह (सगीरा) माफ करते हैं और उसके सत्तर हजार दर्जा बुलंद उसके अहले खाना के सत्तर अफराद के हक मंे उसकी सिफारिश कुबूल की जाएगी।

इसके बाद जब वह मकामे इब्राहीम के पास आकर दो रिकाते बहालते ईमान और सवाब की नीयत से अदा करता है:-

तो उसको हजरत इस्माईल (अलै0) की औलाद में से चार गुलाम आजाद करने का सवाब मिलता है और वह गुनाहों से ऐसा पाक हो जाता है जैसे उस रोज था जिस रोज उसको उसकी मां ने जना था।

हज का सवाबे अजीमः- हजरत अनस बिन मालिक (रजि0) से रिवायत है कि मैं मस्जिदे खैफ में (जो मिना में है) नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ था।

नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की खिदमत में दो शख्स आए एक अंसारी दूसरा सकफी, दोनों ने आपकी खिदमत में सलाम अर्ज किया और दुआ दी।

और अर्ज किया ऐ अल्लाह के रसूल! हम आप से कुछ बाते पूछने आए हैं।

नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया जो कुछ तुम पूछने आए हो अगर तुम्हारा दिल चाहे तो मैं बताऊं कि तुम क्या दरयाफ्त करने आए हो?

और अगर तुम चाहो तो मैं खामोश रहता हूं तुम खुद दरयाफ्त कर लो।

उन दोनों ने अर्ज किया ऐ अल्लाह के रसूल! आप ही हमारे सवाल भी बता दीजिए ताकि हमारे ईमान व यकीन में इजाफा हो।

इसकेे बाद अंसारी सहाबी ने सकफी सहाबी से अर्ज किया नहीं, पहले आप मालूम कर लें आप ही का हक पहले है।

इसपर उन्होने हुुजूर की खिदमत मे अर्ज किया ऐ अल्लाह के रसूल जो कुछ मै दरयाफ्त करने के लिए हुजूर की खिदमत में हाजिर हुआ हूं इरशाद फरमाइए वह क्या है।

नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया-तुम मेरे पास यह दरयाफ्त करने आए हो कि बैतुल्लाह के इरादे से घर से निकलने का क्या सवाब है।

बैतुल्लाह का तवाफ करने में क्या अज्र है? तवाफ के बाद दो रिकात नमाज पढने में क्या फायदा है।

सफा और मरवा के बीच सई करने का कितना सवाब है।

मैदाने अरफात मे अरफा के दिन ठहरने का कितना अज्र है।

जमरात की रमी करने और कुर्बानी करने पर क्या सवाब है।

यह सुनकर अंसारी सहाबी ने अर्ज किया कसम है उस जात की जिसने आपको हक देकर भेजा मैं यही बातें पूछने के लिए हाजिर हुआ था।

इसके बाद नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अंसारी सहाबी के मजकूरा सवालात का जवाब देते हुए इरशाद फरमाया:-

जब तुम बैतुल्लाह की (जियारतकी) नीयत से अपने घर से चलोगे तो रास्ते में तुम्हारी ऊंटनी के हर कदम रखने और उठाने पर तुम्हारे लिए एक नेकी लिखी जाएगी और एक गुनाह मिटाया जाएगा,

और बैतुल्लाह का तवाफ करने में एक कदम रखने और उठाने मे तुम्हारे लिए एक नेकी लिखी जाएगी।

एक गुनाह मिटाया जाएगा और एक दर्जा बुलंद किया जाएगा और तवाफ के बाद तुम्हारा दो रिकातें अदा करना (सवाब में) बनू इस्माईल में से एक गुलाम आजाद करने के बराबर है।

और सफा और मरवा के बीच सई करने का सवाब सत्तर गुलाम आजाद करने के बराबर है।

अरफा के दिन शाम को तुम्हारा मैदाने अरफात में वकूफ करना(ऐसा मुबारक है कि) अल्लाह तआला (अपनी शान के मुताबिक) आसमान दुनिया पर नुजूल फरमाते हैं और फरिश्तों के सामने तुमपर फख्र फरमाते हैं।

इसलिए फरमाते हैं कि यह मेरे बंदे हैं जो गुबार आलूद गंदे बाल हर गहरी और कुशादा वादी से (निकल कर) मेरे पास आए हैं मेरी मगफिरत और रहमत की उम्मीद रखते हैं।

(लो, मेरे इन बंदों के बारे में सुनो) (अब) तुम वापस चले जाओ तुम्हारी बख्शिश हो गई और जिन के बारे में तुम सिफारिश करो (उनको भी बख्श दूंगा)।

जमरात की रमी में हर कंकरी के बदले जिससे तुम रमी करोगे हलाक करने वाले जहन्नुम वाजिब करने वाले कबीरा गुनाहों में से एक गुनाह कबीरा माफ होगा।

और तुम्हारी (हज की) कुर्बानी तुम्हारे रब क पास जखीरा है (जिस का सवाब आखिरत में मिलेगा) और सर मुडाने में तुम्हारे हर बाल के बदले एक नेकी अता होगी और एक गुनाह मिटया जाएगा।

सवाल करने वाले ने अर्ज किया कि ऐ अल्लाह के रसूल! अगर इसके गुनाह कम हुए तो फिर क्या होगा? नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:-

उसको तुम्हारी नेकियों में जमा कर दिया जाएगा।

(इसके बाद आखिर में) तुम्हारा बैतुल्लाह का तवाफ करना ऐसी हालत में होगा कि तुम्हारा कोई गुनाह बाकी न होगा।

और एक फरिश्ता आएगा जो तुम्हारे दोनों कंधों के दरम्यान हाथ रखकर कहेगा (आंइदा नए सिरे से) अमल करो। तुम्हारे पिछले सारे गुनाह माफ कर दिए।

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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