मेहमान की खिदमत कितने दिन होनी चाहिए, जानिए पढ़ कर शेयर जरूर करें

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Mehmaan ki Khidmat Kitne Din
makkah
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Mehmaan ki Khidmat Kitne Din

मेहमान की खिदमत कितने दिन जानिए

मफ़हूम-ए-हदीस: नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फरमाते है कि-

एक दिन और रात मेहमान कि खिदमत उसका जाइज़ हक़ है

और उसकी दावत और मेहमान नवाज़ी तीन दिन है

उसके बाद कि मेज़बानी उसके लिए सदक़ा है

और मेहमान के लिए ज़्यादा दिन ठहर कर

मेज़बान को तंगी में मुब्तेला करना जाइज़ नहीं है।

(बुखारी शरीफ)

फायदा:

बहरहाल हमे इस बात का भी खयाल रखना है के-

हर बार हम खुद ही को मेहमान न समझे बल्कि कभी हम मेज़बान भी होते है.

क़ुरआन की सिफारिश क़यामत के रोज़

मफ़हूम-ए-हदीस: नबी-ए-पाक (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फरमाते है के-

क़ुरआन-ए-पाक पढ़ा करो! ये क़यामत के रोज़ :-

अपने पढ़ने वाले के लिए सिफारिशी बनकर आयेगा।

(सही मुस्लिम, हदीस न० 1874)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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