हज़ार नवाफिल रकअत पढ़ने से अफ़ज़ल…

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Hazaar Nawafil Rakat Parhne Se Afzal
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Hazaar Nawafil Rakat Parhne Se Afzal

हज़ार नवाफिल रकअत पढ़ने से अफ़ज़ल

मफ़हूम-ए-हदीस: हज़रते अबू ज़र (रज़ि’अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है के,

आक़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मुझसे फ़रमाया

“ए अबू ज़र! तुम सुबह के वक़्त किताब अल्लाह की एक आयात सिख़लो

तो ये तुम्हारे लिए सौ (100) नवाफिल पढ़ने से अफ़ज़ल है

और अगर तुम सुबह के वक़्त इल्म का एक बाब (Chapter) सिख़लो

चाहे उस पर अमल किया गया या (अभी) अमल न किया जाये

(यानी सिर्फ अमल का इरादा भी किया जाये)

ये तुम्हारे लिए हज़ार रकअत (नवाफिल) पढ़ने से अफ़ज़ल है,

(सुनें इब्ने मजह जिल्द1, सफ़ा 132, हदीस 219)

नेकी गुनाह को मिटा देती है

मफ़हूम-ए-हदीस: अबू ज़र और मुआज बिन जबल (रज़ि’अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है के,

नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया के

जहा भी रहो अल्लाह तआला से डरते रहो और गुनाह के बाद नेकी केर लिया करो

के वो नेकी इस गुनाह को मिटा देगी और लोगो के सात हुस्न-ए-अख़लाक़ से पेश आओ।

(तिर्मिज़ी शरीफ)

सबक़: गुनाह के बाद नेकी करने से मुराद है के

कोई गुनाह हमसे जाने-अनजाने में हो जाये तो

उसे किसी नेकी के सबब (वसीले से) अपने रब से इस्तिगफार व तौबह करते रहे।

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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