एक ऐसा अमल जिससे आदमी बुरी मौत से बच जाता है, मुसीबत टल जाती है और गुनाह माफ़ होते हैं और…

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Mukammal Haj w Umrah Ka Sawab
Makka Madina
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Ek Aesa Amal Jisse Aadmi Buri Maut Se Bach Jata Hai, Musibat Tal Jati Hai Or Gunah Maaf Hote Hai Or…

एक ऐसा अमल जिससे आदमी बुरी मौत से बच जाता है, मुसीबत टल जाती है और गुनाह माफ़ होते हैं और…

* रिश्तेदार से अच्छा बर्ताव करने से माल और उम्र में बरकत होती है। आदमी बुरी मौत से बच जाता है, मुसीबत टल जाती है, खुशाली अति है, गुनाह माफ़ होते हैं, नेकियां क़ुबूल होती हैं।

* अपने नस्ब-नामा याद रख्खो ताकि अपनी खानदान वालों के साथ शिला-रहेमि (अच्छा बर्ताव) करने में आसानी हो।

* जो आदमी सदका-खैरात करता है, रिश्तेदारों से अच्छा बर्ताव करता है अल्लाह पाक उसकी उम्र में बरकत फरमाता है। और उसकी मुसीबतें दूर फरमाता है।

* बगावत करना और रिश्ते तोडना बहुत बड़ा गुनाह है। उसकी सजा दुनिया में भी मिलती है आख़िरत में भी मिलती है।

* हज़रात म-आज़ बिन जबल (रज़िअल्लाहु अन्हो) का बयान है – एक दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया – जिसने दिल से इस बात की गवाही दी की अल्लाह के अलावा कोई माबूद नहीं और मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अल्लाह के रसूल हैं, अल्लाह उस पर दोज़ख की आग हराम फार्मा देगा। उन्हों ने अर्ज़ किया – या रसूल अल्लाह! (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तो फिर यह खुशखबरी में लोगों को सुना दूँ? अपने फ़रमाया- म-आज़! अगर तुम लोगों को यह बात बता डोज तो वह इसी पर भरोसा कर लेंगे (और नैक अमल करने और गुनाह से बचने की परवाह नहीं करेंगे)।

* पड़ोसियों के साथ सिला – रहेमि (अच्छा बर्ताव) करने से उम्र में बरकत और घर में खुशाली रहती है।

* अपने मॉ-बाप को राज़ी रख्खो, अल्लाह तुम से राज़ी रहेगा।

* तुम्हारा जो रिश्तेदार तुम से रिश्ता तोड़े तुम उसे जोड़ने की कोशिश करो।

*जो आदमी अपने वालिद के इन्तिक़ाल के बाद भी उसे अच्छे बर्ताव करना चाहता है तो उसे चाहिए की अपने वालिद के दोस्तों के साथ अच्छा बर्ताव करे।

* जो बड़ों की इज़्ज़त और छोटों से प्यार न करे वह वह हमारा नहीं।

* रिश्तेदारियां तोड़ने वाला जन्नत में न जा सकेगा।

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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