अपनी औलाद को नमाज़ (पढ़ने) का हुकुम दो

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Apni Aulaad ko Namaz padhne Ka Hukum Do
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Apni Aulaad ko Namaz (padhne) Ka Hukum Do

अपनी औलाद को नमाज़ (पढ़ने) का हुकुम दो

मफ़हूम-इ-हदीस: नबी-ए-पाक मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:-

“अपनी औलाद) (बेटे-बेटी) को नमाज़ (पढ़ने) का हुक्म दो, जब के वो 7 साल के हो जाए,

और जब वो 10  साल के हो जाएँ तो (नमाज़ छोड़ने पर) उन की पिटाई करो और उनके बिस्तर भी अलग कर दो।

(अबू दावूद)

नोट: बिस्तर अलग करने का हुक्म नमाज़ न पढ़ने पर सज़ा के तौर पर नहीं है बल्कि यह एक मुस्तक़िल हुक्म है।

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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