बदमज़हबों से निकाह करना कैसा

0
178
Badmazhabo Se Nikah Karna Kaisa
nikah
Islamic Palace App

Click here to Install Islamic Palace Android App Now

Badmazhabo Se Nikah Karna Kaisa

बदमज़हबों से निकाह करना कैसा

हमारी अवाम के कुछ काम अकल लोग जिन्हें दीन की मालूमात और ईमान की अहमियत मालूम नहीं होती वो बदमज़हबों से रिश्ते जोड़ते हैं

और कुछ बदनसीब सब कुछ जान्ने के बाद भी बदमज़हबों से रिश्ते करते हैं

और कुछ लोग इस चक्कर में होते हैं की बदमज़हब के घर की लड़की को ला कर उसका अक़ीदा सहीह कर देंगे पहली बात तो ये है

की उससे निकाह होता ही नहीं और दूसरी बात ये है की कभी कभी उस लड़की की वजह से घर के तमाम लोगों का अक़ीदा ख़राब हो जाता है!

अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है कि,

अल्लाह ने उनके दिलो पर और कानो पर मोहर कर दी और उनकी आँखों पर घटा तोप है और उनके लिए बड़ा अज़ाब

(सूरह बक़रह : आयात 7)

हज़रात अबू हुरैरा (रज़िअल्लाहो तआला अन्हु) रिवायत करते हैं कि,

अगर बदमज़हब (बेदीन, मुनाफ़िक़) बीमार पड़ें तो उनको पूछने न जाओ और अगर वो मर जायें तो उनके जनाज़े पर न जाओ और उनको सलाम न करो

और उनके पास न बैठो और न उनके साथ खाओ न पियो और न ही उनके साथ शादी करो और न ही उनके साथ नमाज़ पढ़ो

(मुस्लिम शरीफ)
(अबू दाऊद शरीफ)
(इबने मजा शरीफ)
(मिश्कत शरीफ)

अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है कि,

और तुम में से जो कोई उनसे दोस्ती करे तो वो उन्ही में से है

(سورہ مائدہ، آیت 51)

अब ज़रा सोचिये कि कौन ऐसा शख्स होगा जो अपनी बेटी ऐसे बदमज़हबों के घर में देगा या उनके घर की लड़की अपने घर में लाएगा?

यक़ीनन जिसके दिल में अल्लाह तआला और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की मुहब्बत होगी वो कभी भी ऐसी गन्दी हरकत नहीं करेगा।

और जो लोग आपस में मत झगड़ो। ये सब फालतू बातें है म’ज़ल्लाह ऐसा बोलते है

वो खुद जाहिल है। उनकी मिसाल ब्रितनिअ 50-50 के जैसे है।

जब सुन्नियो के साथ हो तो सुन्नी होने का दावा और जब बदमज़हबों के साथ हो तो उनके साथ होने का दावा।

दरअसल ये लोग सुलहकुल्ली है। मेरा आपसे बस एक सवाल है आप खुद फैसला कर लेना की कोण हक़ पर है।

कोई आपके माँ-बाप को बुरा भला कहे उनकी गुस्ताखी करे आप चुप चाप सुन लेते है?

या दो चार जूते लगते है? अब आप खुद बताइये जो हमारे आक़ा सरवरे क़ायनात रेहमते आलम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की गुस्ताखी करे हम उसे यही छोड़े? क्या हम उसका रद्द न करे?

क्या उसके गंदे अक़ीदे से दूसरो को न बचाएं? क्या हम उनकी ये गुस्ताखियाँ नज़र अंदाज़ करे? हरगिज़ नहीं।

अल्लाह तआला और उसके हबीब (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की बेशुमार लानत हो बदमज़हब और बदमज़हबों की हिमायत करनेवालों पर।

बदमज़हबों की फैलाई इस गन्दगी को साफ़ करने में हमारा साथ दे।

Follow us

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace  को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.