73 फ़िरक़ों में जन्नती कौन

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73 Firqo Me Jannati Kaun
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73 Firqo Me Jannati Kaun

73 फ़िरक़ों में जन्नती कौन

अस्सलामो अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकतहु

जैसा के हमारे कुछ लोग कहते हैं के मेरा कोई फ़िरक़ा नहीं। फ़िरक़ापरस्ती जैज़ नहीं। में सिर्फ मुस्लमान हु। ऐसे जाहिलो के लिए यहाँ बहवला पोस्ट लिख रहा हूँ। 73 फ़िरक़े होने का मेरे आक़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने

ज़माने मुबारक में इल्म-ए-ग़ैब को ज़ाहिर कर दिया। अब जो इसका इनकार करे वो फरमाने मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का मुनकिर है।

अब कुछ लोग कहते हैं एक हो जाओ। तो उन लोगो से मेरा यही कहना है के हमने किसीको अलग नहीं किया फ़िरक़े में नहीं बनता।

1400 सालमे एक ही जमाअत अहले सुन्नत ही पर सब क़ायम थे। कुछ अकाल के पैदल नेसल के गंदे अपने सादे गले गलीज़ अक़ाइद की गन्दगी इस दुनिया में फैलाये।

और खुद अपने नए फ़िरक़े बना लिए है। क़ुरआन-ए-करीम व हदीस से एक बात साबित है के एक ही फ़िरक़ा हमेशा हक़ पर रहेगा इन्शाअल्लाह चाहे जितने इख़्तेलाफ़ हो जाये दुनिया में वो अहले सुन्नत वाल जमाअत यानी मसलके आलाहज़रत है।

ये लोग सिर्फ अहले सुन्नत से फातिहा दरूद सलातो सलाम और दरगाह जाने पर इख़्तेलाफ़ नहीं रखते। ये इनके बातिल कुफ्रिया अक़ीदे की बुनियाद पर अलग जमाअत क़ायम किये है।

इसलिए अक़ाइद-ए-अहले सुन्नत का सीखना बेहद ज़रूरी है। अक़ाइद-ए-अहले सुन्नत पर बेहतरीन किताब Play Store से हमारे नबी डाउनलोड कीजिये। इस किताब को खूब शेयर करे की लोगो की इस्लाह हो।

नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया कि:

बेशक बानी इस्राईल के बहत्तर (72) फिरके हो गए थे और मेरी उम्मत के तिहत्तर (73) गिरोह हो जायेंगे जिनमे से 72 गिरोह दोज़खी होंगे और एक (1) गिरोह जन्नती होगा

सहाबा-ए-किराम ने अर्ज़ किया कि, या रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) वो एक जन्नती गिरोह कौन होगा?

हमारे प्यारे आक़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया कि,

जो मेरे और मेरे सहाबा के तरीके पर होगा

(جامع ترمذی، ج2، ص93)
(مشکٰوت، باب الاعتصام، ص31)

हज़रात मुल्ला अली कारी (रहमतुल्लाहि तआला अलैह) इस हदीस पाक को बयान करके फरमाते हैं कि,

इस बात में कोई शैको शुबा नहीं कि वो जन्नती गिरोह अहले सुन्नत व जमाअत (Sunni) ही है

(مرقات، شرح مشکٰوت، ج1، ص248)

इमामुल औलिया सय्यिदना ग़ौसे आज़म (रज़िअल्लाहो तआला अन्हो) इरशाद फरमाते हैं कि,

जो गिरोह नजात पाने वाला है वो अहले सुन्नत व जमाअत है

(غنیتہ الطالبین، ص164)

हुज्जतुल इस्लाम सय्यिदना इमाम ग़ज़ाली (रहमतुल्लाहि तआला अलैह) फरमाते हैं कि,

नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अहले सुन्नत व जमाअत के बारे में फ़रमाया कि जिस तरीके पर मैं और मेरे सहाबा हैं

(احیاء العلوم، ج3، ص161)
(الملل والنحل للشھر ستانی، ج1، ص13)

शेख अब्दुल हके मुहद्दिसे देहलवी (रहमतुल्लाहि तआला अलैह) फरमाते हैं कि,

दीन-ए-इस्लाम में सवाद-ए-आज़म (वो बड़ी जमाअत जो नजात पाने वाली है) से मुराद अहले सुन्नत व जमाअत ही है

(اشعت اللمعات، فارسی، ج1، ص141)

इमामुल हिन्द शाह वलीउल्लाह मुहद्दिसे देहलवी फरमाते हैं कि,

नबीये करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने सवाद-ए-आज़म कि इत्तेबा करने का हुक्म इरशाद फ़रमाया और अब सिवाए इन 4 मज़ाहिब (हनफ़ी, शाफ़ई, हम्बली और मालिकी) के सब ख़त्म हो गए तो अब इनकी इत्तेबा करना ही सवाद-ए-आज़म कि पैरवी करना है और इससे बाहर होना सवाद-ए-आज़म से काटना है।

(عقد الجید، ص33)

एक रिवायत में है के नबीये करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि,

अहले सुन्नत व जमाअत ही नजात पाने वाला गिरोह है।

(الملل النحل، ج1، ص20)

एक रिवायत में हमारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)  ने इरशाद फ़रमाया कि,

अहले सुन्नत व जमाअत वो होगा जो मेरी अहले बैत की मुहब्बत में मरेगा

(تفسیر ابن عربی، ج2، ص212)

नबीये करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)  ने ये भी इरशाद फ़रमाया कि,

अहले सुन्नत के चेहरे सफ़ेद और अहले बिद्दत के चेहरे काले होंगे

(تفسیر در منثور، ج2، ص76)

क़ाज़ी सनाउल्लाह पानीपट्टी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)  फरमाते हैं कि,

अहले सुन्नत के चेहरे रौशन होंगे और अहले बिद्दात के चेहरे काले होंगे

(تفسیر مظھری، ج2، ص116)

हज़रात अब्दुल्लाह बिन अब्बास का भी इरशाद है कि,

अहले सुन्नत व जमाअत के चेहरे सफ़ेद और नूरानी होंगे और अहले बिद्दात के चेहरे काले होंगे

(تفسیر ابن کثیر، ج1، ص390)

इमाम मुहम्मद बिन सिरीन तबई फरमाते हैं कि,

सहाबा-ए-किराम सनद-ए-हदीस कि तहक़ीक़ नहीं करते थे लेकिन जब दीन में फ़िटने पैदा हुए तो लोग सनद कि तहक़ीक़ करने लगे और जिस हदीस कि सनद में अहले सुन्नत रावी होते तो उसे क़ुबूल करते और अगर अहले बिद्दात रावी होते तो उसे छोड़ देते

(مقدمہ صحیح مسلم، ج1، ص9)

इमाम जलालुद्दीन सुयूती (रहमतुल्लाहि तआला अलैह) फरमाते हैं कि,

फ़क़ीह इस्माईल (रहमतुल्लाहि तआला अलैह) फरमाते हैं कि मैंने ख्वाब में हाफ़िज़ अबू हाकिम अहमद को देखा और पूछा कि तुम्हारे नज़दीक नजात पाने वाला फ़िरक़ा कौन सा है?
उन्होंने कहा कि “अहले सुन्नत”

(شرح الصدور، ص140)

इस हदीस के आखिरी जुमले में गौर करें कि अल्लाह के नबी ने इरशाद फ़रमाया कि,

जो मेरे और मेरे सहाबा के तरीके पर होगा
(Whatever I Am Upon And My Companions)
यानि जो मेरी (Sunnat) और मेरे सहाबा के तरीके (Jama’at) पर होगा

इस हदीस से ये बात वाज़ेह हो गयी कि हमारी जमाअत का नाम (Title) हमें कहीं और से नहीं मिला बल्कि हमें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने ये नाम दिया है और अहले सुन्नत व जमाअत ही अहले जन्नत है

तुझसे और जन्नत से क्या मतलब मुखालिफ दूर हो,

हम रसूलुल्लाह के जन्नत रसूलुल्लाह की

Imam Ahmad Raza Qadri Barelvi

(حدائق بخشش)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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