अल्लाह तआला की ज़ात व सिफ़ात के मुताल्लिक़ अक़ाइद

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ALLAH Ta'ala Ki Zaat Wa Sifaat Ke Mutalliq Aqaid
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ALLAH Ta’ala Ki Zaat Wa Sifaat Ke Mutalliq Aqaid

अल्लाह तआला की ज़ात व सिफ़ात के मुताल्लिक़ अक़ाइद

“तुम फरमाओ वह अल्लाह है वह एक है। अल्लाह बे नियाज़ है। न उसकी कोई औलाद और न वह किसी से पैदा हुआ। और न उसके जोड़ का कोई।”

(क़ुरआन-ए-करीम, पारा 30, सूरे इखलास, आयत 1-4, तर्ज़ुमा कंज़ुल ईमान)

अल्लाह तआला एक है, उसका कोई शरीक (Partner) नहीं, वही इबादत के लायक है, उसे किसी ने पैदा नहीं किया बल्कि वो खुद ही हमेशा से है और हमेशा रहेगा

उसकी ज़ात व सिफ़ात के सिवा कोई चीज़ न थी, फिर सब चीज़ें उसी ने पैदा की, ये ऊँचा आसमान, वासी ज़मीन, चमकता दमकता सूरज, रौशन चाँद, झिलमिलाते सितारे, बुलंद व बाला पहाड़, बड़े बड़े समंदर, दरया, सर्दी, गर्मी,

मुख्तलिफ क़िस्म के मौसम, हवाएं, बादल, बारिश, इन्सान, जिन्नात, फरिश्ते अल्गर्ज़ क़ायनात की हर हर शे उसी ने पैदा की है

“अल्लाह है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं। वह आप और औरो का क़ाइम रखनेवाला। और न ऊंघ आये न नींद। उसीका है जो कुछ आसमानो में है और जो कुछ ज़मीन में। वह कौन है जो उसके यहाँ सिफारिश करे बे उसके हुक्म के।

जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे। और वह नहीं पाते उसके इल्म में से मगर जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी में समाये हुवे है आसमान और ज़मीन। और उसे भारी नहीं उनकी निगेहबानी और वही है बुलंद बढ़ाईवाला।”

(सूरे बक़रह, पारा 2, आयत 255, रुकू 34 तर्ज़ुमा: कंज़ुल.ईमान)

वही सब को पालने वाला है, वो किसी का मोहताज नहीं सारा जहाँ उसका मोहताज है, वो जो चाहता है करता है कोई उसे रोक नहीं सकता, उसके इरादे के बगैर कोई काम नहीं हो सकता, न वो किसी का बाप है न बीटा, न उसकी कोई बीवी है, वो ऐसी तमाम चीज़ो से पाक है।

“सुनलो अल्लाह ही की मिलक है जितने आसमानो में है और जितने ज़मीनो में और कहे के पीछे जा रहे है। वह जो अल्लाह के सिवा शरीक पुकार रहे है। वह तो पीछे नहीं जाते मगर गुमान के और वह तो नहीं मगर अटकले दौड़ते।

वही जिसने तुम्हारे लिए रात बनायीं की उसमे चैन पाओ। और दिन बनाया तुम्हारी आँखे खोलता। बेशक! उसमे निशानिया है सुननेवालों के लिए।”

(सूरे युनूस, पारा 11, आयत 65-67, रुकू 7 तर्ज़ुमा कंज़ुल ईमान)

वो ही मौत और ज़िन्दगी का मालिक है, वो हर चाहत पर क़ादिर है, उस में हर कमाल व खूबी पायी जाती है और वो हर तरह के ऐब से पाक है, उसे न नींद आती है न ऊँघ न उकताहट और वो थकावट जैसी चीज़ो से भी पाक है।

वो हर ज़ाहिर व छुपी हुयी चीज़ को जानता है, हर हलकी से हलकी आवाज़ को सुनता है और हर बारीक से बारीक चीज़ को देखता है बल्कि वो तो दिल के राज़ो, इरादों, वसवसों और खयालात को भी जानता है।

वो जिस्म से पाक है, वो जिसे चाहे इज़्ज़त दे जिसे चाहे ज़िल्लत दे, वो अच्छे कामो सेक हश और बुरे कामो से नाराज़ होता है।

वही मज़लूमो की मदद करता है और बीमारियों को शिफा देता है, उसके ग़ज़ब से हर दम डरना चाहिए के उसकी पकड़ बहुत सख्त है।

वो किसी पर ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म नहीं करता और उसका हर काम हिकमत भरा है, वो माँ बाप से ज़्यादा मेहरबान है, उसकी रेहमत दुखी दिलो का सहारा है।

(بہار شریعت، حصہ1، علامہ مفتی امجد علی اعظمی علیہ الرحمہ)

अल्लाह तआला हर कमाल व खूबी का जामे है और हर ऐब से पाक है जैसे झूट बोलना, दग़ा, खयानत, ज़ुल्म और बेहयाई वग़ैरा।

(المسامرت بشرح المسایرت، ص393)

उसकी सिफ़ात जाती है यानी किसी ने अता नहीं की उसका देखना आँख से नहीं, उसका सुन्ना कान से नहीं,।

उसका कलाम करना मुँह से नहीं वो जिस्म से पाक है।

हर पास से पास आवाज़ को सुनता है।

हर बारीक से बारीक चीज़ को देखता है।

(اللہ لا الہ الا ھو الحی القیوم، پ3، ال عمران:2)
(وھو علی کل شیءٍ قدیر، پ7، المائدہ:120)
(ان اللہ ھو السمیع البصیر، پ24، المؤمن:20)

उसकी सिफ़ात की तरह उसका कलाम भी क़दीम है।

(الفقہ الأکبر، ص28)

उसका कलाम न हदीस है न मख्लूक़, जो क़ुरआन को मख्लूक़ माने हमारे इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा व दीगर अइम्मा ने उसे काफिर कहा:-

(منح الروض الأزھر، ص26)
(فتاوٰی رضویہ، ج15، ص384)

उसका कलाम आवाज़ से पाक है।

(منح الروض الأزھر، للقاری، ص17)

अल्लाह तआला ग़ैब व शहादत (पोशीदा और ज़ाहिर) सबको जानता है।

(ھو اللہ اللذی لا الہ الا ھو علم الغیب والشهادة، پ28، الحشر:22)

उसका इल्म जाती है और ये उसका ख़ासा है,।

जो शख्स इल्मे जाती किसी ग़ैरे खुदा के लिए साबित करे काफिर है।

(الدولت المکیہ بالمادت الغیبیہ، ص39)
(فتاوٰی رضویہ، ج29، ص436)

वही हर शे का ख़ालिक़ है, सब उसी के पैदा किये हुए हैं।

(اللہ خالق کل شیءٍ، پ13، الرعد16)

हक़ीक़तन रोज़ी पहुँचाने वाला वही है, फरिश्ते वग़ैराहुम सिर्फ एक वसीला और जरिया है।

(ان اللہ ھو الرزاق ذوالقوت المتین، پ27، الذريت:58)
(فالمدبرات امرا، پ30، النازعات:5)

हर भलाई, बुराई उसने अपने इल्म से जान कर मुक़द्दर फार्मा दी, जैसा होने वाला था और जो जैसा करने वाला था।

उसने अपने इल्म से जाना और वही लिख दिया ये नहीं की जैसा उसने लिख दिया वैसा हमें करना पड़ता है उसने हमें मजबूर नहीं किया:-

(الفقہ الأکبر، ص40)
(شرح النووی، کتاب الایمان، ج1، ص27)
(شرح السنہ، للبغوی، ج1، ص140)

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