दरूद शरीफ क्यों पढ़ना चाइये, जानिए दुरूद शरीफ की 100 फ़ज़ीलत व बरकतें

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MADINE MUNAWWARA KA JUMA
Madina
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Durood Sharif Ki 100 Fazilat Wa Barkate

दरूद शरीफ क्यों पढ़ना चाइये, जानिए दुरूद शरीफ की 100 फ़ज़ीलत व बरकतें

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकतहु,

दुरूद शरीफ की जितनी फ़ज़िलतें बयान की जाये कम हैं। हदीस शरीफ में दुरूद शरीफ की फ़ज़िलतें कसरत से साबित हैं। यहाँ चुनिंदा फ़ज़ाइल बयां कर रहा हूँ। जिससे हम ये जान सके के दुरूद शरीफ क्यों पढ़ना चाहिए।

रेहमत-ए-आलम शफी-ए-महशर इमामुल अम्बिया हबीब-ए-खुदा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर दुरूद पढ़नेका हुक्म खुद अल्लाह रब्बुल आलमीन ने क़ुरआन-ए-करीम में फरमाता हैं,

“बेशक अल्लाह और उसके फ़रिश्ते दरूदों सलाम भेजते हैं उस ग़ैब बतानेवाले नबी पर, ए ईमानवालों! उनपर दुरूद और खूब सलाम भेजो”

(अल क़ुरआन सौराह अल अहज़ाब, पारा 22, आयात 56, रुकू 7, तर्ज़ुमा कंज़ुल ईमान)

इस आयते मुबारक के नुज़ूल का मक़सद ये हैं के कुफ्फार और मुनाफिक़ीन की टोली हुज़ूर नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की दिल आज़ारी करते थे जिसके बाद अल्लाह रब्बुल आलमीन ने ये आयते मुबारक नुज़ूल करके सरकार दो आलम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को वो मक़ाम-ओ-मर्तबा अता किया

और कहा के अगरचे ये चंद लोग हैं जो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की दिल आज़ारी करते हैं जो दर्दनाक आज़ाब के मुस्तहिक़ हैं पर हुज़ूर-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शान-ओ-अज़मत तो खुद उनका पाक परवरदिगार बयान फार्मा रहा है।

और फ़रिश्तो को मुक्कर्रर कर रखा हैं जो हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शान-ए-अक़दस में दुरूदो सलाम पढ़ते हैं। क़यामत तक आनेवाले मुसलमानों पर भी लाज़िम कर दिया के उसके मेहबूब पर दुरूदो सलाम भेजा करे।

चुनांचे अल्लामा इस्माइल हक्की अल हनफ़ी (रज़िअल्लाहु अन्हु) ने अपनी तफ़्सीर रुहुल बयान में लिखा हैं इस आयते करीमा के नुज़ूल के बाद हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के चेहरा-ए-मुबारक नूर की किरणे लूटने लगा और फ़रमाया “मुझे मुबारकबाद पेश करो क्युकी मुझे वो आयते मुबारक अता की गयी हैं जो मुझे दुनिया व माफीहा (यानी जो कुछ दुनिया और इसमें हैं) सबसे ज़्यादा मेहबूब है”

(तफ़्सीर-ए-रूहुल बयान, Vol : 07, सफ़ा : 223, पारा 22 सौराह अहज़ाब आयात 56)

इस आयते करीमा में अल्लाह रब्बुल आलमीन का दुरूद भेजना भी है और फ़रिश्तो के साथ साथ हम मुसलमानों को भी दुरूद भेजना है। इमाम बग़वी अश शाफ़ई अलैहिर्रहमा इसके माने को बयान फरमाते हैं “अल्लाह रब्बुल आलमीन के दुरूद भेजना है रेहमत नाज़िल फरमाना जबकि फरिश्तों और हमारा दुरूद दुआ-ए-रेहमत करना है”

(अस शारा उस सुन्नाह, Vol : 02, किताबुस सलात, बाब : अस सलात एलान नबी, सफ़ा : 280)

क्या पता चला की दुरूद और सलाम का हुक्म तो खुद अल्लाह रब्बुल आलमीन ने दिया है। अब वो लोग तो मुंह के बल गिरे हैं जो सलाम को बिद्दत कहते है। मअज़ल्लाह। दरअसल सलाम के लिए सिर्फ वही खड़ा होगा जिसके दिलमे अपने आक़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की मुहब्बत होगी।

अल्लाह रब्बुल आलमीन क़ुरआन-ए-करीम में इरशाद फरमाता है, “नूह पर सलाम हो जहाँवालो में सलाम हो इब्राहिम पर सलाम हो मूसा व हारुन पर सलाम हो इलियास पर सलाम हो रसूलो पर”

(सूरे सफ्फत, आयत 79,109,120,130,181, पारा-23, रुकू 3-4-5 तर्ज़ुमा कंज़ुल ईमान)

जब अल्लाह खुद अपने रसूलों पर सलाम भेज रहा हैं तो हम उम्मती नबियों के सरदार (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर सलाम भेजे तो कैसे शिरको बिद्दत हो सकता हैं.. इसीलिए मेरे सर्कार आलाहज़रत अज़ीमुल बरकत मुजद्दिदे दीनों मिल्लत फ़ाज़िले बरैली रहमतुल्लाह अलैहि ने लिखा

“मुस्तफा जाने रेहमत पे लाखो सलाम शम्मे बज़्मे हिदायत पे लाखो सलाम..”

1. एक दुरूद पढ़ने से 100 हाजतें पूरी होंगी

2. फ़रिश्ते पढ़नेवाले पर दुरूद पढ़ेंगे

3. अल्लाह ताला की ख़ुशनूदी हासिल होगी

4. पढ़नेवाला मरने से पहले जन्नत में अपनी जगा देख लेगा

5. पुलसिरत से बिजली की तरह सही-ओ-सलामत गुज़र जायेगा

6. दोज़ख के केहर से बच जायेगा

7. हौज़-ए-कौसर से पानी पीना नसीब होगा

8. मीज़ान में दुरूद पढ़नेवाले की नेकियों का पलड़ा भरी होगा

9. अल्लाह तआला के गुस्से से मेहफ़ूज़ रहेगा

10. अल्लाह तआला की दोस्ती नसीब होगी

11. अल्लाह तआला की रेहमत बरसती रहेगी

12. अल्लाह तआला के रस्ते में जंग लड़ने से ज़्यादा सवाब मिलेगा

13. रिज़्क़ कुशादा होगा। एक मर्तबा दुरूद पढ़ना 10 गुनाह मिटाता है और उसके नाम-ए-आमाल में 10 नेकिया लिखी जाती हैं

14. हर मजलिस में ज़ैब-ओ-ज़ीनत हासिल होगी

15. मैदान-ए-हश्र में अम्न-ओ-अमन में होगा

16. हर दुश्मन पर फतह हासिल करेगा

17. लोगों के दिलों में उसकी मुहब्बत बढ़ जाएगी

18. हर जगह इत्तिफ़ाक़ की दौलत मुयस्सर होगी

19. दिल को बड़ा सुकून मुयस्सर आएगा

20. ख्वाब में हुज़ूर सरकार-ए-दो आलम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) की ज़ियारत होगी

21. दुरूद पढ़नेवाले की ग़ीबत कम होगी

22. दुन्या में फायदा हासिल करता रहेगा

23. अल्लाह की फ़रमाँबरदारी हासिल होगी

24. उसके ऐबों पर अल्लाह तआला पर्दा दाल देगा

25. वो हसरत की मौत नहीं मरेगा

26. वो बुख़ल की बीमारी से मेहफ़ूज़ रहेगा

27. उसको बद्दुआएं कोई नुकसान नहीं पोहोंचाएंगी

28. उसके बदन से खुशबु आएगी

29. वो हर जगा नुमायां जगा पा कर इज़्ज़त हासिल करेगा और फतहयाब होगा

30. हर मुनाफ़िक़ के शर से मेहफ़ूज़ रहेगा

31. हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) की शफ़ाअत हासिल होगी

32. हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) की ख़ुशनूदी हासिल होगी

33. हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) का क़ुरब हासिल होगा

34. उसकी ख्वाहिश हर वक़्त ये होगी के नेकी करूँ

35. हर वक़्त मुहब्बत-ए-रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) में इज़ाफ़ा होता रहेगा

36. अल्लाह तआला की रेहमत बढाती रहेगी

37. सरकार-ए-दो आलम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) के दरबार में उसका नाम लिया जाएगा (ये सब से बड़ी सआदत हैं)

38. दुरूद पढ़नेवाला मरते दम तक इंशाअल्लाह ईमान पर क़ायम रहेगा

39. अल्लाह के एहसानात उस पर बढ़ते रहेंगे

40. दुरूद पढ़नेवाले में मुर्शिद-ए-कामिल की खसूसियत जनम लेती रहेंगी

41. उसके गुनाहों की आग बुझ जाएगी

42. मैदान-ए-हश्र में हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) का वस्ल नसीब होगा

43. भूली हुवी चीज़ें याद आया करेंगी

44. जन्नत में बोहोत बुलंद दर्जे हासिल होंगे

45. ज़मीन-ओ-आसमाँवालों की दुआएं उसके लिए वक़्त होंगी

46. अल्लाह तआला उस की ज़ात में बरकत देगा

47. उस के आमाल में बड़ी ही बरकत होगी

48. उसकी उम्र अच्छे कामों में गुज़रेगी

49. उसकी उम्र में नुमायां बरकत होगी

50. उसकी औलाद में बरकत होगी

51. उसकी औलाद तबाही-ओ-बर्बादी से हर हालत में बची रहेगी

52. उसके सरे घर में हर वक़्त बरकत होगी

53. उसके घर में हर हालत में सलामती-ओ-अमन होगा

54. उसके माल-ओ-असबाब में बरकत होगी

55. दुरूद शरीफ पढ़नेवाले की चार पुश्तों तक बरकत रहेगी

56. हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) की बारगाह में हाज़री पायेगा

57. जब हज या उम्र को जायेगा तो क़ुबूलियत के दर्जे पाएगा

58. उसकी ज़ुबान पर अल्लाह और उसके रसूल-ए-मक़बूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) का ज़िक्र जारी रहेगा

59. गुनाहों का कफ़्फ़ारा होता रहेगा

60. हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) के चेहरा-ए-मुबारक अनवर-ओ-ताहिर की ज़ियारत करेगा

61. हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) से मुसाफह करेगा

62. हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) उससे मुख़ातब होंगे

63. फ़रिश्ते उसकी सिफारिश करते रहेंगे

64. हूरें उसके वास्ते मुन्तज़िर होंगी

65. जन्नत उसका इंतज़ार करती रहेगी

66. फ़रिश्ते उसके दुरूद शरीफ को सोने (Gold) के क़लम से चंडी के औराक़ पर लिख कर हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) के पास पेश करते रहेंगे

67. मौत से पहले तौबा की तौफ़ीक़ मिलेगी

68. मौत के वक़्त सख्ती से मेहफ़ूज़ रहेगा

69. उसका घर हमेशा रोशन रहेगा

70. वो फ़क़्र-ओ-फ़ाक़ा से मेहफ़ूज़ रहेगा

71. उसकी हाजतें अजीब-ओ-गरीब तरीके से पूरी होती रहेंगी

72. उसके चेहरे पर नूर के आसार पैदा होंगे

73. वो फरिश्तों का इमाम बनेगा

74. वो अल्लाह तआला के एहकामात का एहतराम करता रहेगा

75. वो सुन्नत अदा करने की कोशिश में लगा रहेगा

76. अल्लाह की राजा देखता जायेगा

77. जो लोग उसे मिलेंगे वो मुसर्रत महसूस करते रहेंगे

78. उसकी दावत का सवाब दस गुनाह ज़्यादा होगा

79. हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) के क़ौल-ओ-फेल से मुहब्बत करता रहेगा

80. उसकी कश्ती हर तूफ़ान से मोजज़े के तौर पर हर हो जाएगी

81. वो बुलंदियां हाज़िर करके क़ुरब-ए-खुदावन्दी में इज़ाफ़ा करता रहेगा

82. वो हमेशा नैक हिदायत हासिल करता रहेगा

83. वो दुनिया में ग़मगीन और निराश नहीं होगा

84. हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) मैदान-ए-हश्र में उसके ज़ामिन होंगे

85. जन्नत में आक़ा-ए-नामदार (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) के पास होगा

86. दुरूद शरीफ की बदौलत बिमारिओं से मेहफ़ूज़ रहेगा अगर कोई बीमारी आयी भी तो उसके गुनाह कम हो जायेंगे और जल्द शिफा पायेगा

87. ऐसे ही उसकी औलाद के साथ मुआमला होगा

88. पल पल में दुरूद पढ़नेवाले की बालाओं को अल्लाह तआला नास करता रहेगा

89. उसकी दौलत में बेपनाह इज़ाफ़ा होगा ऐसे ही माल-ओ-माता में

90. दुरूद पढ़नेवाला साफ़ सुथरा रहेगा अल्लाह की रेहमत जो उसके साथी होगी

91. नैक लोगों की सोहबत से मुस्तफ़ीज़ होगा

92. वालिओं, कुतूबों, अबदलों और क़लन्दरों की ज़ियारत करता रहेगा

93. दुरूद पढ़नेवाले के दिन-ओ-रात के गुनाह उसी दिन उसी रात मिटते रहेंगे.

94. दुरूद शरीफ पढ़नेवाला एक ही रस्ते पर चलेगा वो ही जन्नत का रास्ता

95. दुरूद शरीफ पढ़नेवाला सखी और दिल का कुशादा हो जायेगा

96. उसके लिए फलाह के ज़रिये खुलते जानेंगे और वो हैरान होगा के इतनी बड़ी बरकत कैसे

97. दुरूद पढ़नेवाले की ज़कात अदा होती रहेगी और जब वो ज़कात अदा करेगा तो फ़ौरन क़ुबूल होगी

98. दुरूद पढ़नेवाले की दुआएं हर वक़्त मेहफ़ूज़ होती रहेंगी

99. दुरूद पढ़नेवाला क़यामत के दिन शुहदा के साथ मुक़ाम पायेगा

100. दुरूद पाक पढ़नेवाले के लिए खुद नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (Peace Be Upon HIM) दुआ करते रहते हैं। और ये एज़ाज़ उन बारगुज़ीदा बन्दों का है जिनको खुदा ने सब से मुमताज़ मुक़ाम अता फ़रमाया है।

(Extracted From The Book ALLAHUMMA SALLEY ALA MUHAMMAD)

इस पोस्ट को लिखने में मेरे दोस्त मुहम्मद अजाज़ क़ादरी साहब ने मदद की हैं। आपसे उनके हक़ में दुआ की गुज़ारिश हैं। अल्लाह रब्बुल आलमीन मुहम्मद अजाज़ क़ादरी भाई के दुनियावी आख़िरत की तमाम हजातो को पूरी फरमाए। इसी तरह दीं की खिदमत की तौफ़ीक़ अता फरमाए। रोज़ी में इल्म में बरकत अता फरमाए। उनकी तमाम जायज़ दुआओ को क़बूल फरमाए।

आमीन।

अव्वल आखिर दुरूद।

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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