बदनिगाही का अज़ाब

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Badnigahi Ka Azaab
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Badnigahi Ka Azaab

बदनिगाही का अज़ाब

♥ आंख उठती तो में जुंजाला के पालक सी लेता, ♥
♥ दिल बिगड़ता तो में घबरा के संभाला करता. ♥

क़ुरान:

और मुसलमान औरतों को हुक्म दो अपनी निगाहें कुछ नीची रक्खे और अपनी पारसाई की हिफाज़त करे और अपने बनाओ न दिखाए मगर जितना खुद ही ज़ाहिर है और दुपट्टे अपने गरेबानों पर डाले रहे और अपना सिंगार ज़ाहिर न करें।

(सूरह नूर (24): 31)

ताजदारे मदीनह हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का फरमान ए इबरत निशान है:

जो मुस्लमान किसी औरत की खूबियों की तरफ पहेली बार नज़र करे (यानि बिला क़स्द) फिर अपनी आँख नीची करले अल्लाह ताला उसे ऐसी इबादत अता फरमाएगा जिसकी वह लज़्ज़त पायेगा।

(अल मसनदूली इमाम अहमद बिन हम्बल जिल्द : 8 सफ़ा : 299 हदीस : 22341)

हदीस ए पाक:

नज़र इब्लीस के तीरों में से एक जहर में बुझा हुआ तीर है जो सख्स मेरे खौफ से उसे तर्क कर दे तो में उसे ऐसा ईमान अता करूँगा जिसकी मिठास वह अपने दिल में पायेगा।

(अल मुअज्जमुल कबीर जिल्द : 10 सफ़ा : 173 हदीस : 10362)

जो औरत खुशबु लगा कर गैरो के पास से गुज़री टेक लोग उसकी खुशबु महसूस करे तो ऐसी औरत बदकारा जानिए हैं!

(मसनद इमाम अहमद)

जो औरत गैर मर्द पर अपनी ज़ीनत ज़ाहिर करने के लिए दमन घसीटे हुए चलेगी क़यामत के दिन वो नूर से महरूम और अँधेरे में होगी

(तिर्मिज़ी जिल्द : 2, सफ़ा : 1175)

सरकार मदीना (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया:

औरत, औरत हैं यानि छुपाने की चीज़ हैं। जब वो निकलती हे तो उसे शैतान ज़क कर देखता हैं। यानि उसे देखना शैतानी काम हैं।

(तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द 1, बाब 796, हदीस 1173, सफ़ा 600)

जब एक गैर मर्द और गैर औरत एक दूसरे को देखते हैं तो दोनों की आँखें जीना करती हैं!

(कशफ़ुल-महजू बी: 568)

सरकार मदीना (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया:

जिस गैर औरत को जान बुज़ कर देखा जाये और जो औरत अपने को जान बुज़ कर गैर मर्दो को दिखलाये उस मर्द और औरत पर अल्लाह की लानत।

(मिश्कत शरीफ जिल्द 2, हदीस 2991, सफ़ा 77)

हज़रात अल्लामा इब्ने जूजी रहमतुल्लाहलेही नकल करते हैं:

जिसने ना मेहरम से आँख की हिफाज़त न की उस की आंख में बरोज़े क़यामत आग की सलाई फेरी जाएगी।

(बहरूदादुमुए दफा : 171)

सरकार मदीना (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया जब गैर मर्द

और गैर औरत तन्हाई में किसी जगह साथ होते हैं तो उनमे तीसरा शैतान होता है।

(तिर्मिज़ी शरीफ जिल्द 1, बाब 794, हदीस 1171, सफ़ा 599)

सरकार मदीना (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया तनहा गैर औरत के पास जाने से परहेज़ करो।
एक सहाबी ने सवाल किया या रसूलल्लाह देवर के बारे में क्या इरशाद है? आक़ा ने फ़रमाया, देवर तो मौत हैं।

(बुखारी शरीफ जिल्द 3, बाब 141, हदीस 216, सफ़ा 108, तिर्मिज़ी शरीफ जिल्द 1, बाब 794, हदीस 1171 सफ़ा 599, मिश्कत शरीफ जिल्द 2, हदीस 2968, सफ़ा 73)

हुज़ूर अलैहिस्सलाम फरमाते हैं दुनिया और औरत से बचो क्युकी बानी इसराइल में सबसे पहला, फितना औरत की वजहसे उठा था

(सहीह मुस्लिम Page : 1465 हदीस : 2742)

आलाहज़रत इमाम ए अहलेसुन्नत, हामी ए सुन्नत, मुजद्दिद ए दीन ओ मिल्लत:

पहले नज़र बहकती है फिर दिल बहकता है फिर सत्र बहकता है।

(अनवारे रज़ा, सफ़ा : 391)

हज़रात उला बिन जितद रहमतुल्ला अलैहि:

अपनी नज़र को औरत की चादर पर भी न डालो क्यों के नज़र दिल में सेहवत का बीज बोती है।

(अह्या उल उलूम जिल्द : 3 सफ़ा : 131)

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