जुमा का दिन के असर से मगरिब तक करने वाले 2 ख़ास अमल जो हुज़ूर ﷺ के फरमान से हैं।

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Namaz e Jumma Ki Sharaait – Namaz E Jumma Kis Per Farz Hai?
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JUMA KA DIN KE ASAR SE MAGRIB TAK KARNE WALE 2 KHAAS AMAL JO HUZOOR ﷺ KE FARMAN SE HAI,

जुमा का दिन के असर से मगरिब तक करने वाले 2 ख़ास अमल जो हुज़ूर ﷺ के फरमान से हैं।

1. दरूद शरीफ का पढ़ना

जो इन्सान जुमा के दिन असर की नमाज़ के बाद अपनी जगह से उठने से पहले 80 मर्तबा दरूद पढ़े तो उसके 80 साल के गुनाह माफ़ हो जायेंगे और 80 साल की इबादत का सवाब लिख दिया जाता हैं

वह दरूद ये हैं

اللهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدِنِ النَّبِيِّ الأُمِّيِّ وَعَلَى
آلِهِ وَسَلِّمْ تَسْلِيْمًا

दरूद अल्लाहुम्मा सल्ली आला मुहम्मदी नीं नबीय्यिल उम्मिययी व आला आलिहि वा सलीम तस्लीमा

फ़ज़ाइले दरूद,ताब्रनि,

हज़रात अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया:

जो शख्स जुमा के दिन अस्सी ( 80) मर्तबा मुझ पर दरूद भेजे उसके अस्सी (80) साल के गुनाह माफ़ कर दिए जायेंगे

अर्ज़ किया गया:- या रसूलल्लाह! आप पर कैसे दरूद पढ़ा जाये?

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया :- यूँ कहो

अल्लाहुम्मा सल्ली आला मुहम्मदिन अब्दिका व नबीय्यिका व रसूलिकन नबीय्यिल उम्मिययी,

गवाह अद्दारे क़ुतनी,

2. खूब दुआ का करना और दुआ का क़ुबूल होना

जुमा में एक घड़ी ऐसी आती हैं की जो मुस्लमान भी उस वक़्त (खड़ा) नमाज़ पढ़े और अल्लाह से कोई खैर मांगे तो अल्लाह उसको जरूर देगा

(बुखारी, जिल्द 6, 5294,)

जुमा का दिन 12 घंटे का हैं जिसमे कोई मोमीन बन्दा अल्लाह सुब्हानहु से कुछ मांगे तो अल्लाह उसको जरूर अता फरमाते हैं, तुम लोग उसको असर के बाद आखरी वक़्त में तलाश करो

(नसाई, जिल्द 1,1392)

जुमा के दिन (दुआ क़ुबूल होने की) वो मुबारक घड़ी को असर और गुरुब ए आफ़ताब (यानी मगरब ) के दरमियान तलाश करो

(तिर्मिज़ी, जिल्द 1, 471)

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