हिंदुस्तान में इस्लामी तवारीख :

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Hindustan me Islaami Tawaarikh
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Hindustan me Islaami Tawaarikh

हिंदुस्तान में इस्लामी तवारीख :

(1) इस्लाम की शुरुआत :
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♦ इस्लाम की इशाअत के लिए हिन्दुतान आने वाले सब से पहले सहाबी ए रसूल हज़रात मालिक बिन दीनार (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) हैं

7 हिजरी (629 A.D.) में हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फरमान से हज़रात मालिक बिन दीनार (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) अपने साथियो के साथ कश्ती में सफर करते हुए टकीपटनम (मदुरककरा) आये।

उन्हों ने सब से पहले कोडुन्गल्लुर, केरला में राजा रमा वर्मा कुलशेखरा को मुस्लमान बनाया।

मालाबार का माप्पिला समाज (community) ने सब से पहले इस्लाम अपनाया।

और फिर उन्हों ने हिंदुस्तान में सब से पहली मस्जिद बनाई, जो ‘चेरामन जुमा मस्जिद’ के नाम से मशहूर है।

इस के बाद आप ने हिंदुस्तान में बहुत साड़ी मस्जिदे बनाई।

आप ने अपने हुस्ने अख़लाक़ और तालीम ए दीन से बहुत सारे लोगो को मुस्लमान बनाया।

♦ सब से पहले हिंदुस्तानी मुस्लमान हज़रात ताज-उड़-दीन (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) [रमा वर्मा कुलशेखरा] हैं।

आप का मज़ार अल-बलीद, सलालाह (ओमान) में है।

♦ सब से पहले हिंदुस्तानी सहाबी हज़रात बाबा रतन हिंदी (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) (सरहिंद, पंजाब) हैं।

आप एक बार भटिंडा के जंगल में एक पहाड़ पर बैठकर चाँद के दो टुकड़े होते हुए और फिर उन दोनों टुकड़ो को जुड़ते हुए देखा।

बाद में अरब के ताजिरों के काफिले आप को ये पता चला के मक्का में हज़रात मुहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने

एलान ए नबुव्वत किया है और काफिरो ने आप से मोअज़ीज़ा तालाब किया

तो आप ने जबले अबू क़ुबाइस पर खड़े होकर ऊँगली के इशारे से चाँद के दो टुकड़े किये और फिर उन को जोड़ दिया।

कुछ वक़्त बाद आप ने मदीना पहुंचकर मस्जिद ए नबवी में इस्लाम का इज़हार किया।

हुज़ूर (सल्लाल्ल्हू अलैहि वसल्लम) की दुआ से आप को अल्लाह तआला ने 700 साल की उम्र अता फ़रमाई।

हिंदुस्तान में मशहूर अस्हाबे ए रसूल के मज़ार :
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[1] हज़रात मालिक बिन दीनार (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) (विसाल 130 हिजरी [748 A.D.]) कासरगोड़, केरला)

आप ने हिंदुस्तान में राजा रमा वर्मा कुलशेखरा को सब से पहले मुस्लमान बनाया।

[2] हज़रात उकाशा इब्न मुहसिन (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) (पारंगीपेत्तई, तमिलनाडु)।

आप जंग ए बद्र में शामिल होने वाले 313 अस्हाबे में से हैं और सिर्फ आप वो खुशनसीब सहाबी हैं जिन को मोहरे नबुव्वत को बोसा देने का मौक़ा मिला है।

[3] हज़रात तमीम इब्न ज़ैद अल-अंसारी (रज़ीअलहु तआला अन्हु) (कोवलम, तमिलनाडु)।

आप जंग ए बद्र में शामिल होने वाले 313 अस्हाबे में से हैं।

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(2)
इस्लामी हुकूमत :
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► उमय्या हुकूमत के दौरान 92 हिजरी में सिंध के राजा दाहिर ने हज के सफर पर जा रहे लोगो को औरतो के साथ क़ैद कर लिया और उन का माल ओ सामन लूट लिया।

इराक के गवर्नर हज्जाज बिन यूसुफ़ ने राजा दाहिर को उन लोगो को रिहा करने के लिए पैगाम भेजा। मगर वो न माना।

चुनांचे उस ने 92 हिजरी (711 A.D.) में दमिश्क (Damascus) से 2 बार लश्कर भेजकर बलूचिस्तान और सिंध पर हमला किया।

आखिर में 93 हिजरी (712 A.D.) में हज़रात मुहम्मद बिन क़ासिम (रहमतुल्लाहि अलैहि) की सरदारी में अरब लश्कर ने

राजा दाहिर को हराकर सिंध पर फ़तेह हासिल की और फिर वो मुल्तान तक पहुंचे।

392 हिजरी (November 1001 A.D.) में सुलतान महमूद ग़ज़नवी ने पेशावर में राजा जयपाल को हराया और इस के बाद हिंदुस्तान के दूसरे इलाको में हमले जारी रखे।

11वि सदी A.D. में ग़ाज़ी सय्यद सालार मसूद ने इस्लामी हुकूमत को और फैलाया।

582 हिजरी (1186 A.D.) में शहाब-उद-दीन मुहम्मद घोरी ने लाहौर जीतकर गज़नी पर फ़तेह हासिल की।

► शहाब-उद्दीन मुहम्मद घोरी ने अपने ग़ुलाम क़ुतुब-उद-दीन ऐबक को हिंदुस्तान का गवर्नर बनाया, जिस ने ‘दिल्ली सल्तनत’ की शुरुआत की।

क़ुतुब-उद-दीन ऐबक ने 602 हिजरी (1206 A.D.) में ‘मम्लूक सल्तनत’ शुरुआत की। (10 सुलतान, 1206 A.D. से 1290 A.D.),

उस के बाद 689 हिजरी (1290 A.D.) में जलाल-उद-दीन फ़िरोज़ खिलजी ने ‘खिलजी सल्तनत’ (4 सुलतान, 1290 A.D. से 1320 A.D.),

721 हिजरी (1321 A.D.) में घ्यास-उद-दीन तुग़लक़ ने ‘तुग़लक़ सल्तनत’ (9 सुलतान, 1320 A.D. से 1414 A.D.),

816 हिजरी (1414 A.D.) में ख़िज़्र खान ने ‘सय्यद सल्तनत’ (4 सुलतान, 1414 A.D. से 1451 A.D.)

855 हिजरी (1451 A.D.) में बहलूल खान लोधी ने ‘लोधी सल्तनत’ की शुरुआत की (3 सुलतान, 1451 से 1526 A.D.)

► इस के बाद 932 हिजरी (20 April 1526) को पानीपत की जंग में बाबर ने इब्राहीम लोधी को हराकर ‘मुग़ल सल्तनत’ की शुरुआत की।

(21 सुल्तान, 1526 A.D. से 1540 A.D. और 1554 A.D. से 1857 A.D.)

दरमियान में शेर शाह सूरी ने हुमायूँ को हराकर ‘सूरी सल्तनत’ की शुरुआत की,

(2 सुलतान, 1540 A.द. से 1554 A.D.)

1857 A.D. में आखरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफ़र को अंग्रेज़ो ने रंगून (Burma) में नज़र क़ैद कर दिया

और उस के 2 बेटे मिर्ज़ा मुग़ल और मिर्ज़ा ख़िज़्र सुलतान और पोते मिर्ज़ा अबू बक्र को क़त्ल कर दिया, इस तरह मुग़ल सल्तनत ख़त्म हुई।

► बंगाल में नासिर-उद-दीन बुग़रा खान ने 679 हिजरी (1281 A.D.) में ‘बलबन सल्तनत’ की शुरुआत की, (4 सुलतान, 1281 A.D. से 1324 A.D.).

इस के बाद दिल्ली सल्तनत के दौरान फ़ख्र-उद-दीन मुबारक शाह ने 738 हिजरी (1338 A.D.) में अलग हुकूमत की शुरुआत की,

इस के बाद इल्यास शाह ने 753 हिजरी (1352 A.D.) में ‘इल्यास शाही सल्तनत’ की शुरुआत की, (10 सुलतान, 1352 A.D. से 1414 A.D. और 1435 A.D. से 1487 A.D.)

शहज़ादा बारबाक 892 हिजरी (1487 A.D.) में ‘हबशी सल्तनत’ (4 सुलतान, 1487 A.D. se 1494 A.D.),

अला-उद-दीन हुसैन शाह ने 899 हिजरी (1494 A.D.) में ‘हुसैन शाही सल्तनत’ (1494 A.D. से 1538 A.D.),

मुहम्मद खान सुर ने 961 हिजरी (1554 A.D.) में ‘मुहम्मद शाही सल्तनत’ (5 सुलतान, 1554 A.D. से 1564 A.D.),

ताज खान कर्रानी ने 971 हिजरी (1564 A.D.) में ‘कर्रानी सल्तनत’ की शुरुआत की, (1564 A.D. से 1576 A.D.)

नवाब मुर्शिद कुली खान (जाफर खान बहादुर नासिरी) ने 1129 हिजरी (1717 A.D.) में ‘नासिरी सल्तनत’ की शुरुआत की, (3 नवाब, 1717 A.D. से 1740 A.D.).

उस के बाद नवाब मुहम्मद अलीवर्दी खान बहादुर (हाशिम-उद-दौला) ने 1152 हिजरी (1740 A.D.) में ‘अफसर सल्तनत’ की शुरुआत की, (2 नवाब, 1740 A.D. से 1757 A.D.).

मीर मुहम्मद जाफर अली खान बहादुर ने 1170 हिजरी (1757 A.D.) में नवाब मुहम्मद सिराज-उद-दौलाह को धोखे से हराकर ‘नजफ़ी सल्तनत’ शुरुआत की, (13 नवाब, 1757 A.D. से 1969 A.D.).

► दक्खिन में सुल्तान अला-उद-दीन हसन ब्राह्मण ने 747 हिजरी (1347 A.D.) में ‘बहमनी सल्तनत’ की शुरुआत की,

उस के बाद मालिक अहमद शाह बहरी निज़ाम-उल- मुल्क ने 895 हिजरी (1490 A.D.) में ‘निज़ाम शाही (अहमदनगर) हुकूमत’, (14 सुलतान, 1490 A.D. से 1636 A.D.),

फतह-उल्लाह इमाद-उल-मुल्क ने 895 हिजरी (1490 A.D.) में ‘इमाद शाही (बेरर) सल्तनत’, (5 सुलतान, 1490 A.D. से 1574 A.D.),

क़ासिम बारिद ने 897 हिजरी (1492 A.D.) ‘बारिद शाही (बीदर) सल्तनाt’, (9 सुलतान, 1492 A.D. से 1619 A.D.),

यूसुफ़ आदिल खान ने 895 हिजरी (1490 A.D.) में ‘आदिल शाही (बीजापुर) हुकूमत’, (9 सुलतान, 1490 A.D. से 1686 A.D.),

सुलतान कुली क़ुत्ब-उल-मुल्क ने 924 हिजरी (1518 A.D.) में ‘क़ुतब शाही (Golkonda) सल्तनत’ की शुरुआत की (8 सुलतान, 1518 A.D. से 1687 A.D.).

► सुल्तान फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ के गवर्नर ज़फर खान मुज़फ्फर शाह ने 793 हिजरी [1391 A.D.] में गुजरात में ‘मुज़फ्फरी सल्तनत’ की शुरुआत की,

980 हिजरी [1573 A.D.] में मुग़ल बादशाह अकबर ने शम्स-उद-दीन मुज़फ्फर शाह को हराकर मुग़ल सल्तनत में शामिल किया,

► ईरान के नादिर शाह दुर्रानी ने 1151 हिजरी (मार्च 1739 A.D.) में दिल्ली पर हमला कर के मुग़ल बादशाह मुहम्मद शाह को हराकर दिल्ली पर क़ब्ज़ा किया.

इस के बाद अहमद खान अब्दाली दुर्रानी 1174 हिजरी (14 जनुअरी 1761 A.D.) में तीसरी जंगे पानीपत में मराठा को हराकर पंजाब और दिल्ली पर क़ब्ज़ा किया.

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(3)
हिंदुस्तान की आज़ादी के लिए अंग्रेजी (British) हुकूमत के खिलाफ जंग में शामिल होने वाले चंद मशहूर मुसलमानो के नाम:
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सिराज-उद-दौलाह, मीर क़ासिम, हैदर अली और फ़तेह अली टीपू सुल्तान, यूसुफ़ खान, वाली खान, टीटू मियां, मौलाना शाह वलीउल्लाह मोहद्दीस देहलवी, शाह अब्दुल अज़ीज़ मोहद्दीस देहलवी, सय्यद अहमद शहीद, मौलाना विलायत अली सदिकपुरी, बादशाह सिराज-उद-दीन बहादुर शाह ज़फर, फैले हक़ खैराबादी, मुहम्मद हुसैन, अहमद यार खान, निज़ाम अली खान, ग़ुलाम घुस, खुदा बख्श, सूबेदार अली बख्श हमीरपुरी, वारिस अली, बुरहान-उद-दीन, मुजाहिद गुल मुहम्मद, शेखु खान पहलवान, पीर अली, सय्यद हसन अस्करी, मौलाना अहमद अली, मौलाना अहमदुल्लाह शाह, नवाब खान बहादुर खान, मौलवी लिएक़ात अली इलाहाबादी, हाजी इम्दादुल्लाह महाजिर मक्की, मौलाना हबीब-ओर-रहमान लुध्यानवी, Dr. सैफ-उद -दीन किचलू, मसीह-उल-मुल्क हकीम अजमल खान, अल्लामा इनायतुल्लाह मशरिक़ी, Dr. मुख़्तार अहमद अंसारी, मौलाना मज़हर-उल-हक़, मौलाना ज़फर अली खान, शाह नवाज़ खान, मौलाना सय्यद मोहम्मद मियां, मौलाना मोहम्मद हिफ़्ज़-ओर-रहमान सुहावी, मौलाना अब्दुल बारी फिरंगी महली, मुफ़्ती अतीक-ओर-रहमान उस्मानी, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, Dr. सय्यद महमूद, खान अब्दुस समद खान अचकजई, यूसुफ़ अली मैहर, रफ़ी अहमद क़िदवई, अस्फाकुल्लाह खान, अल्लामा मोहम्मद इक़बाल, चौधरी ग़ुलाम अब्बास, शैख़ अब्दुल्लाह, खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार खान (सरहदी गाँधी) और Dr. खान
बेगम हज़रात महल, बी अम्मा (आबादी बेगम), बेगम शाह ज़मानी, अजीज़न बाई, ज़ुबैदा दौउदी, ज़ुलैख़ा बेगम, आंजादी बेगम, बेगम निशात-उन-निसा (बेगम हसरत मोहनी), मज़हरून्निसा बेगम, बेगम अकबर जहाँ, सआदत बनो किचलू, रज़िया खातून, शफ़ाअत-उन-निसा बीबी, अस्घरी बेगम, जेहिदा खातून शेरवानी, खदीजा बेगम, मुनीरा बेगम, अस्मत आरा खातून,

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(4)
सूफी सिलसिले:
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मदारी सिलसिला:

हिंदुस्तान में हज़रात सय्यद बड़ी-उद-दीन मदार रहमतुल्लाहि अलैहि (विलादत 242 हिजरी [856 A.D.] विसाल 17 जमादिल अव्वल 837 हिजरी [1434 A.D.]) (मकनपुर [उत्तर प्रदेश]) से (818 हिजरी से) ‘मादाएरिया’ सिलसिला जारी है.

चिश्ती सिलसिला:

▪ हज़रात ख्वाजा सय्यद मोईन-उद-दीन चिश्ती रहमतुल्लाहि अलैहि (विलादत 1141 A.D. – 1230 A.D.]) – विसाल 6 रजब 633 हिजरी [1230 A.D.]) 587 हिजरी (1190 A.D.) में अम्न का पैग़ाम लेकर अजमेर आये और अपनी करामात और हुस्न ए अख़लाक़ और तालीम से हिंदुस्तान में इस्लाम को मज़बूत किया और फैलाया और आप से हिंदुस्तान में ‘चिश्ती’ सिलसिला जारी है।

हिंदुस्तान में चिश्ती सिलसिला की 2 मशहूर शाखें हैं:

(1) निज़ामी, (2) साबरी.

हज़रात ख्वाजा सय्यद निज़ाम-उद-दीन औलिया रहमतुल्लाहि (दिल्ली) से (चिश्ती) ‘निज़ामी’ सिलसिला जारी है,

और हज़रात ख्वाजा सय्यद अला-उद-दीन अली अहमद साबिर रहमतुल्लाहि अलैहि (कलियर) से (चिश्ती) ‘साबरी’ सिलसिला जारी है.

नासिरी, हुसैनी, सिराजी, फ़रीदीअ, अशरफिया, फ़ख़्रिया, नियाज़ी, सफ़वी, इनायती, सुलैमानिअ, हबीबिया, सूफी, गुदरी शाही, ज़हूरी, ये सब ‘चिश्ती निज़ामी’ सिलसिले की मशहूर शाखें हैं.

और इमदादी, सहविया, आस्वि, साजिदी, ये सब ‘चिश्ती साबरी’ सिलसिले की मशहूर शाखें हैं,

सोहरवर्दी सिलसिला:

619 हिजरी (1222 A.D.) से हज़रात बहा-उद-दीन ज़करिया रहमतुल्लाहि अलैहि (विलादत [1170 A.D.] – विसाल 665 हिजरी [1267 A.D.]) (मुल्तान, पाकिस्तान) से ‘सोहरवर्दी’ सिलसिला जारी है।

आप के खलीफा हज़रात सय्यद जलाल-उद-दीन सुर्ख-पोश बुखारी रहमतुल्लाहि अलैहि (Uch, पंजाब, पाकिस्तान) से ‘जलाली’ सिलसिला जारी है.

जिस की मख़्दूमी और शाही शाखें मशहूर हैं।

► हज़रात मेरे सय्यद अली हमदानी रहमतुल्लाहि अलैहि (कश्मीर)(कुबराविया) हमदानियया’ सिलसिला जारी है.

हज़रात शैख़ बद्र-उद-दीन समरक़न्दी रहमतुल्लाहि अलैहि से ‘(कुबराविया) फिरदौसी’ सिलसिला जारी है,

क़ादरी सिलसिला:

► हज़रात घुस ए आज़म मोहिय-उद-दीन अब्दुल क़ादिर जीलानी 522 हिजरी (1128 A.D.) में हिंदुस्तान आये थे और मुल्तान में क़याम फ़रमाया था.

हज़रात सय्यद मोहम्मद घुस बंदगी क़ादरी जीलानी अल-हलबी रहमतुल्लाहि अलैहि से (विसाल 923 हिजरी [1517 A.D.]) (Uch, पंजाब, पाकिस्तान) से 887 हिजरी (1482 A.D.) से ‘क़ादरी’ सिलसिला जारी है.

हिंदुस्तान में ‘क़ादरी’ सिलसिले की नौशाही, सवारी क़ादरी, वारसी, मैजबहनदारी, बरकातिया, नूरी, रज़वी, आंजादी, हशमतिया, शाखें मशहूर हैं.

रिफाई सिलसिला:

►हज़रात सय्यद शाह नज़्म-उद-दीन अब्दुर रहीम महबुल्लाह रिफाई रहमतुल्लाहि अलैहि (अहमदाबाद) से ‘रिफाई’ सिलसिला जारी है.

शाज़िली सिलसिला:

► हज़रात शैख़ अबू बक्र मिस्कीन साहिब रहमतुल्लाहि अलैहि (कयलपटनम) और हज़रात शैख़ मीर अहमद इब्राहीम रहमतुल्लाहि अलैहि (Madurai) से ‘शाज़िली’ सिलसिला जारी है.

नक़्शबन्दी सिलसिला:

► हज़रात ख्वाजा रज़ि-उद-दीन मुहम्मद बाक़ी बिल्लाह रहमतुल्लाहि अलैहि से ‘नक़्शबन्दी’ सिलसिला जारी है.
आप के खलीफा हज़रात मुजद्दिद ए अल्फे सानी अहमद सिरहिंदी रहमतुल्लाहि अलैहि (सरहिंद) से ‘(नक़्शबन्दी) मुजद्दिदी’ सिलसिला जारी है.
जिस की फैले रहमानी, मज़हरिया, खालिदी, ग़फ़्फ़ारि, अबुल उलाई ताहिरी, क़ासिमी, मुस्तफई, सैफई, ताजिया, शाखें मशहूर हैं.

मग़रिबी सिलसिला:

► हज़रात शैख़ बाबा अबू इश्क़ अल-मग़रिबी रहमतुल्लाहि अलैहि से ‘मग़रिबी’ सिलसिला जारी है.

शत्तारी सिलसिला:

► हज़रात सिराज-उद-दीन अब्दुल्लाह शत्तार रहमतुल्लाहि अलैहि (जौनपुर) से ‘शत्तारिया’ सिलसिला जारी है.

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(5)
मुजद्दिद ए इस्लाम :
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हज़रात ख्वाजा सय्यद मोईन-उद-दीन हसन चिश्ती रहमतुल्लाहि अलैहि (विलादत 1141 A.D. [1230 A.D.]) – विसाल 6 रजब 633 हिजरी [1230 A.D.]) (अजमेर) 7वी सदी के मुजद्दिद हैं.

हज़रात ख्वाजा सय्यद निज़ाम-उद-दीन औलिया मेहबूब ए इलाही रहमतुल्लाहि अलैहि (विलादत 635 हिजरी [1238 A.D.] – विसाल 17 रबी’ उल आखिर 725 [3 अप्रैल 1325]) (दिल्ली) 8वी सदी के मुजद्दिद हैं.

हज़रात मुजद्दिद ए अल्फे सानी शैख़ अहमद सरहिंदी रहमतुल्लाहि अलैहि (विलादत 14 शव्वाल 971 हिजरी [4 जून 1564 A.D.] – विसाल 26 सफर 1034 हिजरी [8 Dec 1624 A.D.)] (सरहिंद) 11 वी सदी के मुजद्दिद हैं।

मुग़ल बादशाह हज़रात औरंगज़ेब आलमगीर रहमतुल्लाहि अलैहि (29 ज़िल हिज्जा 1027 हिजरी [4 नवंबर 1618 A.D.] – विसाल 25 ज़िल क़ादा 1118 हिजरी [3 मार्च 1707 A.D.]) 12 वी सदी के मुजद्दिद हैं.

हज़रात अल्लामा शाह अब्दुल अज़ीज़ मुहद्दिस देहलवी रहमतुल्लाहि अलैहि (विलादत 1157 हिजरी [1745 A.D.] – विसाल 1238 हिजरी [1823 A.D.]) 13 वी सदी के मुजद्दिद हैं.

आला हज़रात इमाम अहमद राजा खान बरेलवी रहमतुल्लाहि अलैहि (विलादत 10 शव्वाल 1272 हिजरी [14 जून 1856 A.D.] –विसाल 25 सफर 1340 हिजरी [28 अक्टूबर 1921 A.D.]) (बरैली) 14वी सदी के मुजद्दिद हैं.

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अल्लाह तआला उस के हबीब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सदक़े में

और ख्वाजा ग़रीब नवाज़ रहमतुल्लाहि अलैहि और तमाम औलिया अल्लाह और अहले बैत और अस्हाबे के वसीले से

हिंदुस्तान के मुसलमानो पर अपना ख़ास करम फरमाए और इस्लाम का बोलबाला अता फरमाए.

और सब को मुकम्मल इश्क़ ए रसूल अता फरमाए और सब के ईमान की हिफाज़त फरमाए और सब को नेक अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए.

और इन बातो को याद रखकर अमल करने की और दुसरो को बताने की तौफ़ीक़ अता फरमाए,

और सब को दुनिया वा आख़िरत में कामयाबी अता फरमाए और सब की नेक जाइज़ मुरादों को पूरी फरमाए.

आमीन.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया

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