हुज़ूर गौस-ए-आज़म رضي الله عن

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HUZOOR GAUS E AAZAM رضي الله عن

हुज़ूर गौस-ए-आज़म رضي الله عن

हज़रत-ए-इमाम जफ़र सादिक़ رضي الله عنه ने कश्फ़ उल गुयुब में तहरीर फ़रमाया के जमुआह की रात 11 रज्जब हिजरी 140 में क़ुरआन-ए-

पाक की तिलावत में मशगूल था तक़रीबन आधी रात ख़तम हो चुकी थी मुझ पर नींद का ग़लबा ग़ालिब हुआ उस वक़्त इल्हाम हुवा के इस

वक़्त तिलावत छोरध कर सो जाओ.

चुनाचे मैं सो गया तो उसी हालत में आलम-ए-मलकूत (फरिश्तों की दुनिया) में ज़ाहिर हुआ और जल्द ही आलम-ए-मलकूत से आलम-ए-

जबरूत की तरफ बढ़ा तो खवाब में एक बाग़ नज़र आया जिसके हर दरख़्त पर तजल्लियां नज़र आ रही थी कुछ फ़रिश्ते तस्बीह पढ़ रहे थे

बहुत से अम्बिया-ए-किराम की रूह -ए-पाक मौजूद थी.

सहाबी-ए-रसूल हज़रते अनस इब्ने मालिक رضي الله عنه मेरे पास तशरीफ़ लाये और फ़रमाया की हुज़ूर आपके इंतज़ार में है मैं

सरकार-ए-दो आलम की खिदमत-ए-अक़दस में हाज़िर हुआ वहां एक बड़े मैदान में एक शानदार खेमा (tent) मौजूद था और मैदान के

बीच में एक तख़्त बिछा हुआ था जिस पर दो जहाँ के रसूल जलवा फार्मा थे, मुझे देख कर रेहमत-ए-दो आलम ने इरशाद

फ़रमाया की ए मेरे नूर ए नज़र बहुत जल्द तुम हमारे पास आने वाले हो जो वाकिया तुम्हे देखने में आ रहा है उससे दुनिया में लिख देना, फिर

हुज़ूर ने मुझे अपने करीब बैठने का हुक्म फ़रमाया तो करीब बैठ गया कुछ देर के बाद 2 रूहें सरकार ए दो आलम के तख़्त के

करीब आयी एक रूह का रंग हीरे की तरह चमकदार था और दूसरी रूह का रंग जो पीछे थी वो याकूत जैसा था.

पहली रूह को हुज़ूर सय्यद-ए-आलम ने अपने सीधे (Janoo) पर बैठाया और दूसरी रूह को बाए (Janoo) पर बैठाया फिर सरकार-ए-

दो आलम ने पहली रूह के मुताल्लिक़ फ़रमाया इसका नाम दुनिया में अब्दुल क़ादिर मोहियुद्दीन होगा इसका मर्तबा बोहत बुलंद है इसके

असर से मज़हब-ए-इस्लाम मज़बूत होगा. फिर दूसरी रूह के मुताल्लिक़ इरशाद फ़रमाया इसका ज़ुहूर अब्दुल क़ादिर के बाद होगा और

दुनिया में इसका नाम अली अहमद साबिर होगा इसके अंदर शान-ए-जलाल ज़्यादा होगी और ये हक़्क़ के दुश्मनो को बर्बाद कर देगा उसके

बाद हज़रत जफ़र सादिक رضي الله عنه नींद से बेदार हुवे।

हमारे गौस-ए-आज़म رضي الله عنه

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