हुज़ूर ﷺ के वालिदैन दीन ए इब्राहीमी पर थे और मुसलमान थे

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Nabi SAW Ke Waliden Deen E Ibrahim Par The Or Musalman the
Mohmmed ﷺ
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Nabi SAW Ke Waliden Deen E Ibrahim Par The Or Musalman the

हुज़ूर रसूल-अल्लाह मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के वालिदैन दीन ए इब्राहीमी पर थे और मुसलमान थे

क़ुरान:

2 सौराह बक़रह, आयत 128 :

رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِنْ ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةً مُسْلِمَةً لَكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَا ۖ إِنَّكَ أَنْتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ

(हज़रात इब्राहीम अलैहिस सलाम ने अर्ज़ किया: ) ए हमारे रब, हम दोनों को अपने हुक्म के सामने झुकने वाला बना

और हमारी औलादो को भी एक उम्मत ए मुसलमान ख़ास अपने तांबे’ फरमान बरदार बना,

और हमें हमारी इबादत के क़वाइद बता दे और हम पर रहमत की नज़र फार्मा, बेशक तू ही बहोत तौबा क़ुबूल फरमाने वाला मेहरबान है.

14 सौराह अल- इब्राहीम, आयत 35:

और (याद कीजिये) जब इब्राहीम (अलैहि सलाम) ने अर्ज़ किया: ए मेरे रब इस शहर को अम्न वाला बना दे और मुझे और मेरे बचो को इस से बचा ले के हम बुटो की परस्तिश करें.

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मुस्लिम का माना है अल्लाह सुब्हान व तआला की वहदानियत [तौहीद] और उलूहियत [माबूद] व रबूबियत को और नबी या रसूल की नबूवत या रिसालत को तस्लीम [क़ुबूल] करने वाला.

मोमिन का माना है नबी या रसूल की बताई हुई हर बात को तस्दीक़ करने (सही मानने) वाला, उस का ज़बान से इक़रार करने वाला और अपने अमल से उस का इज़हार करने वाला.

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जब अल्लाह तआला ने हज़रात आदम अलैहि सलाम को दुनिया में नबी बनाकर भेजा तब से ही इस्लाम की शुरुआत हुई और हर नबी और रसूल ने अपनी क़ौम को इस्लाम की दावत दी. जो उन पर ईमान लाया वो ‘मोमिन’ हुआ और ईमान नहीं लाया वो ‘काफिर’ हुआ. जब तक उस क़ौम के लिए उस नबी (या रसूल) के बाद दूसरे नबी (या रसूल) नहीं आते तब तक उन के दीन को मानने वाला मुसलमान हुआ.

अल्लाह तआला ने अपने प्यारे हबीब और हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खातिम उल अम्बिया बनाकर भेजे. इस लिए आप का दीन ए इस्लाम क़यामत तक रहेगा और अब सिर्फ आप पर ईमान लाने वाला ही मुस्लमान होगा.

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हज़रात इब्राहीम अलैहि सलाम ने जब अपने बेटे हज़रात इस्माईल अलैहि सलाम के साथ काबा शरीफ की तामीर का काम मुकम्मल किया, तो उस के बाद अल्लाह से दुआ की के
‘ए अल्लाह मेरी इस औलाद को और उस की नस्ल को हमेशा मुसलमान रखना.’

इस लिए अल्लाह तआला ने हज़रात इस्माईल अलैहिस सलाम और उन की औलाद की वो पूरी नस्ल जिस में प्यारे आक़ा मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आये यानी हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने अब्दुल मुत्तलिब और हज़रते आमेना बिन्ते वहाब तक सब को दीन ए इब्राहीमी पर रखा और कुफ्र से पाक रखा.
ये हज़रात आप के एलान ए नबुव्वत के पहले दुनिया से गुज़र चुके थे. और वो दीने इब्राहीमी पर होने की वजह से मुसलमान थे.

सिर्फ बात ये है के वो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दीन ए इस्लाम में नहीं आये थे. लेकिन उस वक़्त आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एलान नुबुव्वत किया ही नहीं था. जो हुज़ूर रसूल-अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के एलान नबुव्वत के बाद आप पर ईमान न लाये वो काफिर होंगे. मगर आप के वालिदैन पूरी ज़िन्दगी दीन ए इब्राहीमी पर रहे और इस लिए मुसलमान हैं.

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जब हज़रते इब्राहीम अलैहिस सलाम ने काबा की तामीर के बाद दुआ की थी तब आप के सिर्फ एक ही साहबज़ादे हज़रात इस्माईल अलैहि सलाम थे (जो हज़रते बीबी हाजरा रज़ि-अल्लाहु तआला अन्हा के बातें से हैं).

हज़रते इब्राहीम अलैहिस्सलाम के दूसरे साहबज़ादे हज़रते इस’हक़ अलैहिस सलाम (जो बाद में हज़रते बीबी सारा रज़ि-अल्लाहु तआला अन्हा के बातें से हुए) की नस्ल में बानी इस्राईल में तक़रीबन 70000 अम्बिया हुए.
लेकिन हज़रात इस्माईल अलैहि य हुज़ूर खातिम उल अम्बिया मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के इलावा और कोई नबी नहीं आये.
मगर अल्लाह तआला ने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तक आप की पूरी नस्ल को दीन ए इब्राहीम पर रखा और कुफ्र से पाक रखा.

और दुआ हज़रते इस्माईल अलैहि सलाम की नस्ल में उन औलाद के लिए क़ुबूल हुई थी जो हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तक सीधी क़तार में हैं, बाक़ी खानदान के बारे में नहीं.
इस लिए अगरचे आप के चाचा वगैरह कुफ्र पर थे, मगर हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के वालिद, दादा, परदादा और वालिदा, नाना और इस तरह वालिदैन की दोनों तरफ से पूरी नस्ल को अल्लाह तआला ने कुफ्र से पाक रखा.

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अल्लाह तआला उस के हबीब सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सदक़े में
सब को इन बातो को याद रखने की और दुसरो को बताने की तौफ़ीक़ अता फरमाए.
और सब को मुकम्मल इश्क़ ए रसूल अता फरमाए और सब के ईमान की हिफाज़त फरमाए और सब को नेक अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए.
और सब को दुन्या व आख़िरत में कामयाबी अता फरमाए और सब की नेक जाइज़ मुरादों को पूरी फरमाए.
आमीन.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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