अच्छाई का हुक्म दो मगर खुद भी उस पर अमल करो

0
141
Acchayi Ka Huqm Do Magar Khud Bhi Us Par Amal Karo
makkah
Islamic Palace App

Acchayi Ka Huqm Do Magar Khud Bhi Us Par Amal Karo

अच्छाई का हुक्म दो मगर खुद भी उस पर अमल करो

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ وَإِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَأَبُو كُرَيْبٍ وَاللَّفْظُ لِأَبِي كُرَيْبٍ قَالَ يَحْيَى وَإِسْحَقُ أَخْبَرَنَا و قَالَ الْآخَرُونَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ شَقِيقٍ عَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ قَالَ قِيلَ لَهُ أَلَا تَدْخُلُ عَلَى عُثْمَانَ فَتُكَلِّمَهُ فَقَالَ أَتَرَوْنَ أَنِّي لَا أُكَلِّمُهُ إِلَّا أُسْمِعُكُمْ وَاللَّهِ لَقَدْ كَلَّمْتُهُ فِيمَا بَيْنِي وَبَيْنَهُ مَا دُونَ أَنْ أَفْتَتِحَ أَمْرًا لَا أُحِبُّ أَنْ أَكُونَ أَوَّلَ مَنْ فَتَحَهُ وَلَا أَقُولُ لِأَحَدٍ يَكُونُ عَلَيَّ أَمِيرًا إِنَّهُ خَيْرُ النَّاسِ بَعْدَ مَا سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ يُؤْتَى بِالرَّجُلِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَيُلْقَى فِي النَّارِ فَتَنْدَلِقُ أَقْتَابُ بَطْنِهِ فَيَدُورُ بِهَا كَمَا يَدُورُ الْحِمَارُ بِالرَّحَى فَيَجْتَمِعُ إِلَيْهِ أَهْلُ النَّارِ فَيَقُولُونَ يَا فُلَانُ مَا لَكَ أَلَمْ تَكُنْ تَأْمُرُ بِالْمَعْرُوفِ وَتَنْهَى عَنْ الْمُنْكَرِ فَيَقُولُ بَلَى قَدْ كُنْتُ آمُرُ بِالْمَعْرُوفِ وَلَا آتِيهِ وَأَنْهَى عَنْ الْمُنْكَرِ وَآتِيهِ

हदीस बड़ी है आखिर का तर्जुमा ये है: उसमे बिन ज़ैद (रज़ि’अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है की, रसूल’अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया- क़यामत के दिन एक शख्स लाया जायेगा फिर वो जहन्नम में डाला जायेगा उसके

पेट की आंतें (Intestine) बहार निकल आएगी, वो उनको लिए हुए गधे की तरह जो चक्की पिस्ता है चक्कर लगाएगा और जहन्नुम वाले उसके पास इकठ्ठे होंगे उससे पूछेंगे की ऐ फलाह! क्या तू अच्छी बात का हुक्म नहीं करता था और

बुरी बात से मना नहीं करता था?

वो कहेगा में तो ऐसा करता था लेकिन दूसरों को अच्छी बात का हुक्म करता था और खुद (उस पर अमल) नहीं करता और दूसरों को बुरी बात से मना करता था लेकिन खुद उससे बाज़ न रहता था.

(सहीह मुस्लिम, हदीस-7483)

वज़ाहत:- मालूम ये हुआ की जब भी आप किसी को कोई अमल की दावत दें तो पहले उस अमल पर आपको पैरोकार होना ज़रूरी है अगर आप उस अमल को नहीं करते और उसकी दावत दूसरों को देते हैं तो आप दर्दनाक अज़ाब के

मुस्तहिक़ न हो जाएँ इस लिए उसी बात की दावत दो जिस पर खुद अमल करते हो और ये भी नहीं सोचना चाहिए की में तो इस पर अमल नहीं करती/करता तो दावत न दो बल्कि हमे चाहिए की हम पहले उस अमल को करें और फिर

अमल की दावत दूसरों को जल्द ही पंहुचा दें.

\खैर आखिर में अल्लाह से दुआ है अल्लाह तआला हम तमाम को इन बातों पर अमल करने वाला बनाये जब तक ज़िन्दा रखे इस्लाम और ईमान पर ज़िन्दा रखे खत्म हमारा ईमान पर हो व आखीरु दवना अनिलहम्दुलिल्लाहे रब्बिल अलमीन

Follow Us

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace  को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया

LEAVE A REPLY