हज़रते राबिआ बसरी अल-अदविया रहमतुल्लाहि अलैहि

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Hazrate Rabiya Barsi AL-Adviya Rahmatullahi Alaihi ke Bare Me Janiye
Hazrate Rabiya Barsi AL-Adviya Rahmatullahi Alaihi
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Hazrate Rabiya Barsi AL-Adviya Rahmatullahi Alaihi ke Bare Me Janiye

हज़रते राबिआ बसरी अल-अदविया रहमतुल्लाहि अलैहि के बारे में जानिए

आप की विलादत 96 हिजरी में बसरा (इराक) में हुई.

आप के वालिद का नाम हज़रात इस्माईल रहमतुल्लाहि अलैहि है

आप अपने वालिदैन की चौथी बेटी थी, इस लिए आप का नाम ‘राबिआ’ रखा गया.

आप के वालिद इतने ग़रीब थे के आप की पैदाइश के वक़्त आप को ओढ़ने के लिए कपड़ा भी नहीं था

और चिराग जलाने के लिए तेल भी नहीं था.

आप की वालिदा ने अपने शौहर को कहा के

‘आप पडोसी के घर से तेल लेकर आएं तो हम चिराग रोशन कर सकें.

आप के वालिद घर के बहार निकले तो दरवाज़े पर उन्हों ने सोचा के मैंने कभी अपने रब के सिवा किसी दूसरे के सामने हाथ फैलाया नहीं है.

ये सोचकर आप वही से खाली हाथ वापस लौल आये. उस रात आप के वालिद को ख्वाब में

हुज़ूरे अकरम रहमताललील आलमीन सरवरे कायनात रसूल-अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की ज़ियारत हुई.

आप ने फ़रमाया के ‘तुम्हारे यहाँ पैदा होने वाली ये बची अल्लाह की बारगुज़ीदा बन्दी है

और उसके ज़रिये अल्लाह तआला बहुत से लोगो को हिदायत अता फरमाएगा

और रोज़े महशर वो मेरे 70000 उम्मतियों की शफ़ाअत करेगी.

तुम बसरा के अमीर ऐसा-ए-ज़दन के पास जाओ और मेरा ये पैग़ाम लिखकर उसे देना के

‘तुम हर रात 100 मर्तबा और जुमेरात को 400 मर्तबा मुझ पर दुरूद शरीफ पढ़ते हो.

इस जुमेरात को किसी वजह से तुम ये नहीं कर पाए हो. इस

लिए जुर्माने में तुम्हे इस आने वाले को 400 दीनार का हदिया देना है.

जब हज़रते इस्माईल जागे तो आप की आँख में ख़ुशी के आंसू थे.

सुबह को आप अमीरे बसरा के पास गए और हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का खत उसे दिया.

उसे देखकर वो खुश हो गया के मेरे आक़ा मुझे याद करते हैं और उस ने

आप को 400 दीनार दिए और साथ में 1000 दीनार ग़रीबो में खैरात किये.

और आप से कहा के ‘जब भी कोई भी ज़रुरत हो तो फ़ौरन मेरे पास आ जाना.’

आप के वालिद के इंतेक़ाल के बाद बसरा में केहत पैदा,

आप जब एक काफिले के साथ जा रही थी तब डकैतों के गिरोह ने आप को पकड़ लिया

और आप को ग़ुलाम बनाकर बेच दिया. आप का मालिक आप से बहुत ज़्यादा काम करता था.

पूरा दिन भरी काम करने के बाद भी आप पूरी रात इबादत ए इलाही में गुज़ारती थी.

और कई बार दिन को रोज़ा भी रखती थी,

एक बार देर रात को मालिक जागा तो राबिआ इबादत में मशगूल थी

और आप के आस-पास नूर छाया हुआ था और आप कह रही थी

के ‘ए मेरे रब, तू जानता है के मेरी ख्वाहिश है के मैं तेरे

अहकाम पर अमल करती राहु और दिल से तेरी इबादत करना चाहती हु.

ए मेरी आँखों के नूर, अगर मैं आज़ाद होती तो पूरा दिन और पूरी रात तेरी इबादत में गुज़ारती.

मगर मैं क्या करू के तुम ने मुझे इंसान का ग़ुलाम बना दिया है.’

ये सुनकर मालिक को एहसास हुआ के इस अल्लाह की वालिया को ग़ुलाम बनाकर रखना ये बे-अदबी है.

सुबह को उस ने हज़रते राबिआ को बताया के मैं आप को आज़ाद करता हु

और अगर आप चाहे तो आप की खिदमत करना चाहता हु.

अगर आप चाहे तो इस घर मैं रह सकती हैं और अगर आप की मर्ज़ी यहाँ से जाने की हो तो आप जा सकती हैं.’

आप ने फ़रमाया ‘मेरा इरादा यहाँ से निकलकर तन्हाई में अल्लाह तआला की इबादत करने का है.’

आप घर को छोड़कर सेहरा (desert) में इबादत व रियाज़त में लग गई.

आप अपने साथ सिर्फ एक मस्कीजा और एक चटाई रखती थी

और आराम करते वक़्त आप सर के नीचे एक पत्थर या ईंट रखा करती थी.

एक मर्तबा आप के यहाँ चंद मेहमान आये. आप की खादिम ने बताया के ‘घर में एक रोटी के सिवा कुछ भी नहीं है.’

आप ने फ़रमाया के ‘इस रोटी को ले जाकर किसी मिस्कीन को दे दो.’ खादिम ने ऐसा ही किया.

चंद लम्हो के बाद किसी ने आप के दरवाज़े पर दस्तक दी. पूछा के ‘कौन है?’

तो बताया के ‘मैं फलां का खादिम हु. खाना लेकर आया हु.’ दरवाज़ा खोलकर देखा तो ‘5 रोटियां थी.

’आप ने फ़रमाया ‘इसे वापस ले जाओ. ये हमारे लिए नहीं है. ’

चंद लम्हो के बाद किसी ने फिर से दरवाजे पर दस्तक दी. पूछा के ‘कौन है?’

तो बताया के ‘मैं फलां का खादिम हु. खाना लेकर आया हु.

’ दरवाज़ा खोलकर देखा तो ‘7 रोटियां थी. ’आप ने उसे भी फ़रमाया ‘इसे वापस ले जाओ. ये हमारे लिए नहीं है.’

चंद लम्हो के बाद किसी ने फिर से दरबाजे पर दस्तक दी. पूछा के ‘कौन है?’

तो बताया के ‘मैं फलां का खादिम हु. खाना लेकर आया हु.’

दरवाज़ा खोलकर देखा तो ‘10 रोटियां थी.’ आप ने उसे ले लिया और फ़रमाया ‘ये हमारे लिए है.’

खादिम ने अर्ज़ किया ‘पहले 2 बार आप ने खाना वापस क्यों भेज दिया?

आप ने फ़रमाया ‘अल्लाह ने फ़रमाया है के 1 नेकी का 10 बदला अत फरमाएगा.

हम ने 1 रोटी सदक़ा की थी तो हमे 10 मिलनी चाहिए. इस लिए मैंने इंतज़ार किया.’

आप हज़रात हसन बसरी रहमतुल्लाहि अलैहि की मुरीद हैं.

आप 4 क़लन्दर में से 1 हैं.

आहिस्ता आहिस्ता आप मशहूर होने लगी.

आप ने अपने वक़्त के कई मशहूर उलेमा से मुबाहिसा किया.

कई लोगो ने आप से निकाह करना चाहा लेकिन आप ने ये कहकर इंकार किया के

‘मैं पूरी ज़िन्दगी सिर्फ अल्लाह तआला की इबादत में गुज़ारना चाहती हु. ’

आप हमेशा ये दुआ करती थी के ‘ ए अल्लाह! अगर मैं दोज़ख के खौफ से तेरी इबादत करती हु

तो मुझे दोज़ख की आग में जलाना, और अगर मैं जन्नत की ख्वाहिश से तेरी इबादत करती हु

तो मुझे जन्नत से दूर कर देना, लेकिन अगर मैं सिर्फ तेरी रज़ा के लिए इबादत करती हु

तो मुझे तेरे हुस्न ओ जमाल का दीदार अता फरमाना.

अक़वाल :

(1) अल्लाह तआला से मोहब्बत करनी चाहिए क्यों की वो हमारा रब है, उस के खौफ की वजह से नहीं.

(2) तौबा की तौफ़ीक़ अल्लाह तआला का इनाम है क्यों की अल्लाह तआला जिसे पसंद करता है

उस मक़बूल बन्दे को ही ये तौफ़ीक़ अता फरमाता है.

(3) कोई शख्स कामिल नहीं बन सकता जब तक के वो दीन को अपनी नफ़्सानी (ज़ाती) ख्वाहिशात पर तरजीह न दे.

एक बार हज़रत ख्वाजा हसन बसरी रहमतुल्लाहि अलैहि ने आप को झील (तालाब) के किनारे देखा.

उन्हों ने अपना जा-नमाज़ पानी पर बिछाकर फ़रमाया के ‘राबिआ! चलो यहाँ 2 रकत नमाज़ पढ़ लेते हैं.’

ये सुनकर आप ने अपना जा-नमाज़ हवा में रखा तो वो ठहर गया. फिर आप ने कहा के ‘चलो, यहाँ नमाज़ पढ़ लेते हैं.’

फिर आप ने फ़रमाया ‘आप ने जो किया वो एक मछली भी कर सकती है

और मैंने जो किया वो एक माखी भी कर सकती है.

हम क्यों अपनी करामात दुन्या को दिखाकर वक़्त बर्बाद करें,

असल में वो चीज़ ज़ाहिर करनी चाहिए जो आप के साथी नहीं दिखा सकते.’

आप के विशाल से पहले आप ने अब्दा बिन्त अभी शोवाल से फ़रमाया था के ‘मेरे इंतेक़ाल की खबर लोगो में न फैलाना और मुझे मेरे पुराने कुर्ते से ही कफ़न देना.’

आप ने विशाल के वक़्त वह मौजूद तमाम मशहूर मशाइख से फ़रमाया के ‘आप सब बाहर चले जाएँ और फ़रिश्तो को अंदर आने दें.’

सब ने ऐसा ही किया और मकान का दरवाज़ा बंद करके बाहर इंतज़ार करने लगे.

कुछ देर बाद सब ने ग़ैब से एक आवाज़ सुनी ‘ए नफ़्स ए मुत्मईंना,

अपने रब की तरफ लौट जाओ, तुम उस से राज़ी हो और वो तुम से राज़ी है.’

आप का विशाल 23 रबीआल्लहु 185 हिजरी (11 अप्रैल 801 A.D.) को हुआ.

आप का मज़ार बसरा (इराक) में है.

अल्लाह तआला उस के हबीब (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सड़के में

और हज़रते राबिआ बसरी रहमतुल्लाहि अलैहि और तमाम औलिया अल्लाह के वसीले से

सब को मुकम्मल इश्क़े रसूल अता फरमाए और सब के ईमान की हिफाज़त फरमाए

और सब को नेक अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए.

और सब को दुन्या व आख़िरत में कामयाबी अता फरमाए

और सब की नेक जाइज़ मुरादों को पूरी फरमाए.

आमीन .

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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