खुश-हाल लोगों की तरह न-शुक्रि करने से बचो

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Khush-Haal Logo’n Ki Tarha Na-Shukri Karne Se Bacho

खुश-हाल लोगों की तरह न-शुक्रि करने से बचो

नहमद-हूँ वनु सल्ली अला रसूल-ए-हिल करीम अम्मा बाद

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम

عَنْ أَسْمَاءَ ابْنَةِ يَزِيدَ الأَنْصَارِيَة، قَالَتْ: مَرَّ بِيَ النَّبِيُّ ‌صلی ‌اللہ ‌علیہ ‌وآلہ ‌وسلم ‌وَأَنَا فِي جَوَارِ أَترَابٍ لِي ، فَسَلَّمَ عَلَيْنَا وَقَالَ: إِيَّاكُنَّ وَكُفْرَ الْمُنَعَّمِينَ فَقُلْتُ: يَا رَسُولَ اللهِ! وَمَا كُفْرُ الْمُنَعَّمِينَ؟ قَالَ: لَعَلَّ إِحْدَاكُنَّ أَنْ تَطُولَ أَيْمَتُهَا بَيْنَ أَبَوَيْهَا وَتَعْنُسَ فَيَرْزُقَهَا اللهُ عَزَّ وَجَلَّ زَوْجًا وَيَرْزُقَهَا مِنْهُ مَالًا وَوَلَدًا فَتَغْضَبُ الْغَضْبَةَ فَتَكْفُرُ فتَقُولُ: مَا رَأَيْتُ مِنْكَ خَيْرًا قَطُّ

 हदीस-ए-महफूम है:- हज़रते अस्मा बिन्त यज़ीद अन्सारी रज़ि’अल्लाहु अन्हा) से रिवायत है के, वो कहती हैं।

के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मेरे पास से गुज़रे, और में अपनी सहेलियों के साथ बैठी थी, आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें सलाम किया और फ़रमाया:

खुश-हाल लोगों की तरह न-शुक्रि करने से बचो, मैंने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! खुश-हाल लोगों की न-शुक्रि क्या होती है।

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: “मुमकिन है के तुम में से कोई औरत लम्बी उम्र अपने वाल्दैन के पास बे-शौहर की ज़िन्दगी गुज़रती रहे।

फिर अल्लाह तआला तुम्हें खाविंद अता करे और (उसके ज़रिये) औलाद की नेमत भी दे दे,।

लेकिन तुम किसी दिन गुस्से में आकर उसकी न-शुक्रि कर बैठे और (खाविंद को) ये कहे: के मैंने तो कभी तुम से कोई खैर व भलाई देखि ही नहीं,

(सिलसिला आहदीस-ए-सहीह, हदीस-1940)

अल्लाह तआला हम तमाम को खुश-हाली में न-शुक्रि करने से मेहफ़ूज़ फरमाए जब तक ज़िंदा रखे इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखे खत्म हमारा ईमान पर हो व आखीरु दवना अनिलहम्दुलिल्लाहे रब्बिल आलमीन

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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