क्रिसमस डे और न्यू इयर Part-4

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Christmas Day Aur New Year Part-4

मेरी क्रिसमस और आज का मुस्लमान-2

लेकिन अब तो मुस्लमान भहुईलट कुछ मानाने लगे हैं लेकिन आज के दिन चूंकि 25th दिसंबर को यही फेस्टिवल्स आ रहा है

तो सोचा इससे नौजवानो को जगह कर दिया जाये. आज कुछ मॉडर्न और एंटरटेनमेंट के मरीज़ मुस्लमान इस बातिल फेस्टिवल्स को भी नहीं छोर रहे हैं,

जहाँ मौक़ा मिलता है ग़लाज़त दिखने पहुँच जाते हैं, हर स्टेट की ख़ास ख़ास सिटीज में ऐसे फहश और जाहिलाना नज़ारे देखे जा सकते हैं,

जहाँ पर कुछ जाहिल इस फेस्टिवल्स को मना रहे होंगे वही कुछ मुसलमान लड़के, लड़किया और कुछ बा-पर्दा और बे-पर्दा ख़वातीन भी अपने बचे और बच्चियों के साथ एन्जॉय कर रहे होते हैं

और ये भूल जाते हैं की कल आख़िरत में हमारी गिनती इन्ही जाहिलो और बातिल अक़ीदे वाले लोगो के साथ होगी.

आज ऐसे इस्लाम मुखालिफ अक़ीदों के जश्न में हम मुसलमान भी उनका हौसला बढ़ा रहे हैं,

उनके जश्न में हिस्सा लेकर, अपनी दुकानों को सजा कर, खुद ऐसी जगह मौजूद होकर जहा पर मेर्री क्रिसमस की खुशिया मनाई जा रही हो,

जहाँ पर हज़रात ईसा A.S. के मुक़द्दस नाम को एक केक पर लिख कर फिर उसे चाकू से कटा जा रहा हो, जहाँ पर खुल-ए-आम कुफ्रिया और शिरकिया कलिमात बाके जा रहे हो…

यूरोप की ज़ेहनी ग़ुलामी की एक झलक.

हम मुस्लमान हैं हमारे 2 फेस्टिवल्स हैं और भी कई ऐसे दिन होते हैं जिस में गवर्नमेंट की तरफ से हॉलिडे होती है लेकिन हम फिर भी अपने काम को तर्क नहीं करते,

ईद के दिन भी थोड़ा भहुत काम कर ही लेते हैं और यही हाल ईदुल अज़हा व और भी छुट्टी के दिनों का है.

लेकिन जब यूरोप छुट्टी करता है तो किसी के बाप में इतनी ताक़त नहीं की वो 25th दिसंबर को उनसे काम करवा ले,

या अपने मुल्क विजिट करवा ले, या ईमेल का रिप्लाई करवा ले या कोई मीटिंग रख ले. लेकिन अगर हमको कहा जाये ईद के दिन मीटिंग रखने को, ईमेल करने को, या कुछ और काम तो हम दौड़ कर कर देते हैं,

क्या ये यूरोप की ज़ेहनी ग़ुलामी नहीं है.? तो फिर और क्या है इस बात पर में अपनी इस पोस्ट को मुक़म्मल करता हूँ.

अल्लाह हम सबको ईमान और इस्लाम के हिसाब से ज़िन्दगी गुजरने वाला बना दे

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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