नमाज़ और उसके पढ़ने के फायदे, जानिए हदीस पढ़ कर शेयर जरुर करें

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NAMAZ Aur Uske Padhne Key Faide
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NAMAZ Aur Uske Padhne Key Faide

नमाज़ और उसके पढ़ने के फायदे.

1,नमाज़ मुहम्मद (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) की आँखों की ठंडक है (हम खुद गौर करे की हम मुहम्मद (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) से मोहबात का दावा करते हैं, तो क्या इस बात पर अमल करते हैं).

2, दाहिने हाथ मै अमालनमा (result) मिलेगा (जिसको अल्लाह मरने के बाद राइट हैंड में रिजल्ट देगा वो दुनिया के एग्जाम मैं पास हो गया और जिसको लेफ्ट हैंड में दिया जाएगा वो फ़ैल हो गया).

3- रिज़्क़ की तंगी को दूर करती है, ( नमाज़ी को रिज़्क़ रोटी,कपड़ा, मकान, सवारी अल्लाह खूब देता है, और उसमे बरकत भी देता है).

4. पुलसरात पे बिजली की तरह पार हो जाता है (पुसारात एक पुल है जिस पर से हर इंसान को मरने के बाद गुज़ारना है, ये पुल बाल से ज़्यादा बारीक और तलवार की धार से ज़्यादा तेज़ है, गुनहगार लोग इस पर चल नहीं सकेंगे और कट-कट कर नीचे गिरेंगे, निचे दोज़ख होगी, आयी मैं नमाज़ी उस पुल से बिजली की तरह गुज़र जाएगा)

5, क़बर के अज़ाब से हिफाज़त करती है (अगर दुनिया में किसी ने गुनाह किये हैं तो उसको क़बर मैं ही अज़ाब शुरू हो जाता है लेकिन अगर आएसा इन्सान नमाज़ी था तो नमाज़ उसकी हिफाज़त कबर मैं करती है)

6, अल्लाह की रज़ा का सबब है (नमाज़ अल्लाह का हुक्म है, इसलिए जो इसको पढता है, अल्लाह उससे राज़ी और खुश होता है, अब सोचिये अगर अल्लाह राज़ी हो जाए तो फिर किस चीज़ की कमी होगी).

7, शैतान का मूह काला करती है (शैतान, इंसान का दुश्मन है और उसको बर्बाद करने के लिए नमाज़ से रोकता है, उसके दिल मैं वस्वसे डालता है लेकिन जो इन्सान नमाज़ पढ़ लेता है तो शैतान का मूँह काला हो जाता है.

8, नमाज़ मोमिन का नूर है (आख़िरत मैं जब लोग इकठ्ठा किये जायेगे तो बहुत अँधेरा होगा, लेकिन लोगो को उतना नूर (लाइट) दी जायेगी जितना उन्होंने दुनिया मैं अच्छे काम किये होंगे, आयी मैं दुनिया मैं पढ़ी हुई नमाज़ इन्सान के लिए वह नूर/रौशनी होगी .

9, जैसा सर का दर्जा जिस्म मै है वैसा नमाज़ का दर्जा दीन मै है (यानी सारी इबादतों मैं नमाज़ सबसे ऊपर है)

10- जन्नत की कुंजी (के) है

11, अल्लाह से मांगने का जरिया है (यानी अगर इन्सान पर कोई परेशानी मुसीबत ए तो सबसे पहले अल्लाह के सामने नमाज़ के लिए खड़ा हो जाए और फिर उससे दुआ करे. हज़रात मुहम्मद (सल्ललाहु हो अलैहि व सल्लम) पर भी कोई मुसीबत-परेशानी अति थी तो नमाज़ पढ़ते थे. सहाबा (रज़ि अल्लाहु अन्हु) का भी यही तरीका था. एक बार कोई सहाबी सफर मैं थे, उनका घोडा मर गया, सफर लम्बा था, उन सहाबी ने 2 रकत नमाज़ पढ़ी और अल्लाह से दुआ की के अल्लाह इस घोड़े को ज़िन्दा कर दे और अल्लाह ने उस घोड़े को ज़िन्दा कर दिया. और भी कई वाकिया हैं जहा हज़रात मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने और साहबा (रज़ि अल्लाहु अन्हु) ने नमाज़ के ज़रिये अल्लाह से मदद ली है.

भाइयो-बहनो ये तो कुछ फायदे लिखे हैं, इसके अलावा भी और कई फायदे हैं. नमाज़ पढ़ने से अल्लाह दुनिया मैं भी कामयाबी देता है, और आख़िरत मै भी देगा.

कई बार ऐसा लगता है के हमको नमाज़ पढ़ने का टाइम नहीं है क्योंकि हम हमारे स्कूल/college/tuetion/ job/बिज़नेस मैं बिजी रहते हैं, लेकिन एक बात ये ध्यान रखे की हम दुनिया मैं ये सब काम करने नहीं आये बल्कि अल्लाह की इबादत और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के तरीके पर चलने के लिए दुनिया मैं भेजे गए हैं, इसलिए बाकी काम भी करे लेकिन नमाज़ को न छोड़े.

नमाज़ से मत कहो की मुझे काम है बल्कि काम से कहो की मुझे नमाज़ पढ़ना है.

तो भाइयो-बहनो इरादा कर लो की आज से एक भी टाइम की नमाज़ नहीं छूटेगी। इन्शाअल्लाह!

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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