सौराह यासीन से मुहब्बत का अमल

1
6061
Sura e Bakra ki aakhri 2 ayat
quran
Islamic Palace App

surah Yaseen se muhabbat Kaa amal

सौराह यासीन से मुहब्बत का अमल

सौराह यासीन से मुहब्बत का अमल, “यासीन शरीफ को क़ुरान का दिल कहा गया हैं।

और बेपनाह फायदे का हामिल हैं.हर तरह की हाजत रवाई इसकी तिलावत से होती हैं।

सौराह यासीन से मोहब्बत का अमल, और खास ऐसे पढ़ने सौराह यासीन से मुहब्बत का अमल से अल्लाह तआला बहुत राज़ी होता हैं.अहादीस में इसके बहुत फायदे आये हैं।

दरमि शरीफ की हदीस हैं की जो आदमी दिन के शुरू में सौराह ए यासीन पढ़ेगा उसकी तमाम ज़रूरीअत पूरी कर दी जाएगी.

हज़रात इब्न अब्बास रदिअल्लहु अन्हो से रिवायत हैं की नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने फ़रमाया की मेरी तमन्ना हैं।

की ये सौराह(यासीन) हर उम्मती के दिल में होती।

यासीन शरीफ पढ़ने से दिन दुनिया की भलाइयाँ नसीब होती हैं।

अमल ए तरकीब :

ब,रोज़ नौचंदी जुमेरात को एक प्याले में सरबत ले और अल्लाह की ख़ुशनूदी की गरज़ से खूब मुहब्बत व एक्सई से 70 मर्तबा यासीन शरीफ

पढ़े. मोहब्बत बढ़ने का अमल, और फिर सरबत पे दम कर के पीले. इन्शाल्लाह या अल्लाह (help me solved my life problem solution by) वज़ीफ़ाब आप यासीन शरीफ के आमिल हैं।

अब जो भी आप यासीन शरीफ के अमल कराएंगे उसमे असर आएगा.

अब रोज़ाना बाद ए फज्र व ईशा 1-1 मर्तबा यासीन शरीफ पढ़ने का मामूल बनाले.

अमल दिन में किसी भी वक़्त कर ले अगर एक नशिस्त में 70 मर्तबा पढ़ने तो बेहतर हैं।

वरना चाँद नशिश्त में पूरा करले.जिसे ज़बानी यद् हैं उसके लिए मुश्किल नहीं.

बा,वुज़ू खुशबु लगा कर खुशबूदार अगरबत्ती जलाकर पढ़े.

अब मैं यहाँ कुछ पार्ट में यासीन शरीफ की हर आयत के अमल लिखना शुरू कर रहा हूँ.ताकि आपको उस एक एक आयत से फायदा हासिल

करने की तरकीब मालूम हो जाएं. इस सौराह में 83 आयत हैं और हर आयत का में कुछ पार्ट्स में अलग अलग अमलियत लिखना चाहता हूँ.उम्मीद हैं आप मेरी इस मेहनत को पसंद फरमाएंगे और खुद का और दूसरों का भला कराएंगे.

और एक बात खास बता दूँ की आज कल चोर की तबियत के मालिक कुछ लोग ऐसी तहरीर चुरा कर अपने नाम से पोस्ट करदेते हैं। और लोगों

को धोका देते हैं और लोग भी अजीब हैं की कुछ जाने बगैर की वो कौन हैं किस तरह का इंसान हैं।मौलाना जी के इलक़ाब देते हुवे इजाज़त

मंग्रहा हैं तो कोई दमन थम रहा हैं. और कोई इज़्ज़त तो कोई रुपया बर्बाद कर रहा हैं। मैं खुद भी कौन हूँ आप मुझे भी कहा जानते हैं।

मैं भी कहता हूँ मेरा समारली का भी यक़ीन न कराय. बस कोई अमल अच्छा लगे तो उसपे अमल कराय. मेरे ब्लॉग के किसी अमल के लिए इजाज़त लेने की ज़रूरत नहीं जो रीडर करना चाहे बे खौफ क्र सकता हैं। ये मैं बार बार कह चूका हूँ.फिर भी इजाज़त के नाम पे मेल msg करते हैं।

कुछ लोग पीछे पढ़ जाते हैं की ये बताओं वो बताओं और जब जवाब नहीं दिया जाता तो कहते हैं की ब्लॉग क्यों लिखते हो?

भाई ये ब्लॉग मैने आम मुसलमानो की भलाई के लिए लिखा हैं. कोई किसी को आमिल कामिल बनाने के लिए नहीं लिखा हैं।

मेरा भी खुद का कारोबार हैं और मेरी फैमिली हैं मेरी ज़िम्मेदारिया हैं उसमे से वक़्त निकल कर भी मैं मेरे मुर्शिद के मिशन को अंजाम दे रहा हूँ.

कोई एक बाँदा भी अपनी मुश्किलात का हल इस कोशिश के सबब हासिल करले तो मेरी मेहनत कामयाब समझता हूँ.

और सब से अहम् बात की इल्म रूहानियत सीखने का जज़्बा आपको बाद डीनो सिफलिगारो का पैरो कार न बनादे. हमज़ाद हासिल न हो न

सहीह मुअक्का लहसिल न हो न सही. बागरी मांगे रब्ब ए क़ादिर ने जो ईमान की दौलत दी हैं वो आखरी वक़्त तक संभल जाएं तो काफी हैं.

अब मैं सौराह ए यासीन शरीफ की आयत के अमलियत लिख रहा हूँ.

1, يس यासीन

इस आयत को चलते फिरते कसरत से पढ़ते रहने से गुनाह मुआफ होते हैं और इस्लाह ए बातिन होती हैं।

2, وَالْقُرْآنِ الْحَكِيمِ वालक़ुरानी अलहकीमि

रोज़ाना 100 मर्तबा विरद में रखने से नेअमत में इज़ाफ़ा होता हैं।

3, إِنَّكَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ इनका लामिना अलमुर्सलीना

किसी दीवाने या जीन अज़ब क मरीज़ पे 1000 मर्तबा पढ़ कर पानी पे दम करके पिलाते रहने से शिफा व निजात होती हैं।

4, عَلَى صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ आला सिरतीं मुस्तक़ीम

रब की ख़ुशी के लिए और नाराज़ दोस्त को रज़ि करने के लिए 100 मर्तबा फज्र के बाद पढ़ा कराय.

5,تَنزِيلَ الْعَزِيزِ الرَّحِيمِ तंजीला अलाअज़ीज़ी अलर्रहीम

शैतानी वासवास्य को दूर करने फज्र की नमाज़ के बाद जब तक दिल लगे विरद किया कराय.

6, لِتُنذِرَ قَوْمًا مَّا أُنذِرَ آبَاؤُهُمْ فَهُمْ غَافِلُونَ लीतूनजीरा कॉमन माँ ओज़िरा आबाओहुम फहूम ग़ाफ़िलोओं.

खौफ दुश्मन हो ज़ालिम का हो तो लिख कर पैक करके अपने पास रखे.

7, لَقَدْ حَقَّ الْقَوْلُ عَلَى أَكْثَرِهِمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ लकड़ हक़्क़ा अलकवलु आला अकसरिहिं फहूम ला युमिनोना.

किसी तनहा मकाम पे या जहाँ खौफ महसूस हो वहां 100 मर्तबा विरद करने से अमन रहता हैं.

8, إِنَّا جَعَلْنَا فِي أَعْنَاقِهِمْ أَغْلاَلاً فَهِيَ إِلَى الأَذْقَانِ فَهُم مُّقْمَحُونَ इन्ना जाआना फी अ अनकिहिं अघलेलान फाहिया इला अलज़कनि फहूम मुकमाहूं

इस आयत को नगीने पे कुंडा करवा कर सीधे हाथ की छोटी ऊँगली में पहने तो तस्खीर खास हो आम हो लोगों में मक़बूलियत हो.

9,وَجَعَلْنَا مِن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ سَدًّا وَمِنْ خَلْفِهِمْ سَدًّا فَأَغْشَيْنَاهُمْ فَهُمْ لاَ يُبْصِرُونَ वाजआना मीन बयनि आयडीहीम सद्दान वामिन खाल्फहीम सद्दान फागसेनहम फहूम ला युब्सिरून.

ज़ालिम दुश्मन से निजात के लिए दुश्मन के नाम के हुरूफ़ की तादाद के बराबर सुफैद मिर्च पे उसी तादाद में इस आयत को पढ़ कर आग में दाल दिया कराय. कुछ दिन के अमल से दुश्मन परेशान करना बंद करदेगा या खुद परेशानी का शिकार हो जाएगा.

10, وَسَوَاء عَلَيْهِمْ أَأَنذَرْتَهُمْ أَمْ لَمْ تُنذِرْهُمْ لاَ يُؤْمِنُونَ वासवाओं आअलैहिम आज़रताहूम अम लम तुनज़िरहूम ला युमिनून

कोई मर्द किसी औरत से नाजाएज़ तलाक़त रखता हो तो इस आयत को एक मर्तबा पढ़ कर आसमानी रंग के धागे पे एक गिरह दे और कहे

की या अल्लाह तेरे इस क़लम की बरकत से फूलन बिन फूलन व फूलन बिन्ते फूलन में जुदाई करदे. इस तरह 8 गिरह लगा कर धागे को

किसी पुरानी क़ब्र में दफ़न करदे कुछ दिनों में दोनों में जुदाई हो जाएगी.

11, إِنَّمَا تُنذِرُ مَنِ اتَّبَعَ الذِّكْرَ وَخَشِيَ الرَّحْمَن بِالْغَيْبِ فَبَشِّرْهُ بِمَغْفِرَةٍ وَأَجْرٍ كَرِيمٍ इन्नामा तुनज़ीरू मनी इत्तबाआ अलज़ज़िकरा वाखाशिया अलर्रहमाना बिअलगायबी फबशशिरहु बीमाघफिरतीं वाजरीन करीम.

जिसे नींद न आती हो तो किसी पुरानी क़ब्र की मिटटी उठाये और इस आयत को 100 मर्तबा पढ़ कर उस मिटटी पे दम करके और 7 मर्तबा

अपने सर से उतर कर फिर वो क़ब्र पे मिटटी राख्दै जहाँ से उठायी हैं.नींद न आने की शिकायत दूर हो जाएगी.

12 إِنَّا نَحْنُ نُحْيِي الْمَوْتَى وَنَكْتُبُ مَا قَدَّمُوا وَآثَارَهُمْ وَكُلَّ شَيْءٍ أحْصَيْنَاهُ فِي إِمَامٍ مُبِينٍ इन्ना नहनू नहयी अलमौता वनकतुबु माँ कद्दामू वासराहम वाकुल्ला शाइन अहसायनहु फी इमामिन मुबीन.

हाकिम,व बढ़े अफसरों की तस्खीर के लिए इस आयत को ज़ाफ़रान व मुश्क़ से लिख कर अपने पास रखा जाएं.

13 وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلاً أَصْحَابَ الْقَرْيَةِ إِذْ جَاءهَا الْمُرْسَلُونَ वैदरीब लहुं मसलन अस्हाबे अलकरयति इज़ जहा अलमुरसलून.

जो लोग बदनसीबी की शिकायत करते हैं वो इस आयत को रोज़ाना अर्क गुलाब व ज़ाफ़रान से तस्तरी पे लिख कर सुबह पि लिया

कराय,नहूसत व बदनसीबी जाती रहेगी.

14, إِذْ أَرْسَلْنَا إِلَيْهِمُ اثْنَيْنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزْنَا بِثَالِثٍ فَقَالُوا إِنَّا إِلَيْكُم مُّرْسَلُونَ इज़ अरसलना इलय्हिमु इसनायिनी फकैज़ाबोहुमा फाआजजैना बिसालिसिन फकलो इन्ना इलय्कुम मुरसालून

चेचक के मरीज़ को लिख कर बांधने से शिफा हासिल हो.

15.قَالُوا مَا أَنتُمْ إِلاَّ بَشَرٌ مِّثْلُنَا وَمَا أَنزَلَ الرَّحْمن مِن شَيْءٍ إِنْ أَنتُمْ إِلاَّ تَكْذِبُونَ कालू माँ अन्तुम इल्ला बशारुन मिस्लुना वामा अंजला अलर्रहमानु मीन

शाइन इन अन्तुम इल्ला तकज़ीबुन.

आँख दुखती हो या आँख उठी हो तो ज़ाफ़रान से लिख कर गले में पहने तो शिफा हो.

16, قَالُوا رَبُّنَا يَعْلَمُ إِنَّا إِلَيْكُمْ لَمُرْسَلُونَ कालू रब्बुना या आलामु नना इलय्कुम लामुरसलून.

गले (थ्रोट) की तमाम बीमारियों के लिए लिख कर गले में पहना जाएं.

17, وَمَا عَلَيْنَا إِلاَّ الْبَلاَغُ الْمُبِينُ वामा आअलेना इल्ला अलबलाघु अलमुबीन.

दुश्मनी को ख़त्म करने के लिए कमज़ोर लिख कर अपने पास रखे.

18 قَالُوا إِنَّا تَطَيَّرْنَا بِكُمْ لَئِن لَّمْ تَنتَهُوا لَنَرْجُمَنَّكُمْ وَلَيَمَسَّنَّكُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌ कालू इन्ना ततैयारना बिकुम लाइन लम तनताहू लनजुमन्नाकूम वलयमसाननकुम मिन्ना आ अज़ाबुन अलीम.

शरीर जानवर को काबू करने के लिए ज़र्द[येलो] कागज़ पे लिख कर उसके गले में पहनाया जाएं.

19 قَالُوا طَائِرُكُمْ مَعَكُمْ أَئِن ذُكِّرْتُم بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ مُّسْرِفُونَ कालू तेरुकुम माँ आयकुम ऐन ज़ुककीर्तम बल अन्तुम कौमून मुश्रीफून.

हामेला को दर्द ए जह उठे तो उस वक़्त ऐसे लिख कर माँ जमा करके बाज़ू पे बंधे तो आसानी से बचा पैदा हो जाएं.और 100 मर्तबा पढ़ कर भी पानी दम करके पीला दिया जाएं.

20 وَجَاء مِنْ أَقْصَى الْمَدِينَةِ رَجُلٌ يَسْعَى قَالَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُوا الْمُرْسَلِينَ वजा मीन अक़्सा अलमदीनाती राजुलून या सा कला या क़ौमी इत्तेबिआओ अलमुर्सलीन

बाँज औरत ऐसे ज़ाफ़रान व मुश्क़ से लिख कर अपने बाज़ू या गले में पहने तो खुदा औलाद इनायत कराएगा.

Follow Us

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace  को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया

1 COMMENT

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.