तावीज़ की हकीकत

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TAWEEZ SE SHIFA KAISE MIL JATI HAI
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Taweez Ki Haqeeqat

तावीज़ की हकीकत

! बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम!

तावीज़ का मास’अला ठीक वैसा है जैसा के, किसी डॉक्टर ने किसी को उसके बिमारी की इलाज के लिए प्रिस्क्रिप्शन पर कुछ दवाई का नाम

और उसको लेने  का तरीका लिख दिया, और वह उस तरीके को छोर कर उस प्रिस्क्रिप्शन को ही गले में लटका लिया, और ये समझ बैठा के ऐसे ही मैं सिफॅ पा सकता हूँ,

आइये अब देखते है सरियत क्या कहती है।

अल-क़ुरआन: (ए रसूल!) आप कह दो के मेरे लिए अल्लाह ही काफी है, और भरोसा रखने वाले उसी(अल्लाह) पर भरोसा रखते है।

(सौराह 39 अज़-ज़ूमर, आयात 38)

अल-क़ुरआन: (ए लोगों!) अगर अल्लाह तुम्हारे ऊपर कोई तकलीफ देना चाहे, तो उसको कोई हटा नहीं सकता, और अगर वो तुमपर खैर

करना चाहे, तो कोई भी उसको रद्द नहीं कर सकता.

(सुआह 10 यूनुस, आयात 107)

मफ़हूम-ए-हदीस: हज़रते अब्दुल्लाह-बिन-आकिम (रज़ि’अल्लाहु अन्हु) फरमाते हैं के रसूल’अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम) ने फ़रमाया –

“मन अलकतन तम्मिम्टन फ़क़द अशरक” जिसने “तावीज़” लटके उसने शिर्क किया.

(मुसनद अहमद (4/156) No. 17458 एंड मुसतदरक अल-हाकिम (4/243) न० . 7513)

मफ़हूम-ए-हदीस: हज़रते इमरान-बिन-हसन (राज़ी’अल्लाहु अन्हु) से रवायत है, के नबी (सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम) ने एक आदमी के

हाँथ में पीतल का बना हुआ “कडा” देखा तो दरयाफ्त किया: ये क्या है।

इसने जवाब दिया के ‘ये कमज़ोरी से बचने के लिए है।

तो आप (सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम) ने फ़रमाया: ‘इसे उतार कर फेक दो! इसलिए के ये कमज़ोरी ही में इज़ाफ़ा करेगा और इस से पहने हुए

तेरी “वफ़ात (डेथ)” हो गई तो तू कभी कामयाब नहीं हो सकता”

(मुसनद-ए-अहमद)

हज़रते हुज़ैफ़ा (रज़ि अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, एक शख्स के हाथ पर एक धागा देखा जो वो बुखार की वजह से पहना था. तो उसे काट कर

फेक दिया और क़ुरआन की यह आयात तिलावत फ़रमाई,

अल-क़ुरआन: “ज़्यादातर लोग अल्लाह के ऊपर ईमान लाने के बावजूद मुशरिक है।

(सौराह 12 युसूफ, आयात 106)

(इब्ने अबू हातिम, किताबत तौहीद, सफ़ा 38)

मफ़हूम-ए-हदीस: अब्दुल्लाह इब्ने  मसऊद (रज़ि’अल्लाहु अन्हु) ने फ़रमाया के, रसूल’अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम) ने फ़रमाया –

“तावीज़, जहर-फूंक सब ही शिर्क है।

ये सुनके जैनब (रज़ि’अल्लाहु अन्हा) (अब्दुल्लाह की बीवी) ने कहा, ‘आप ये क्या कह रहे हो?’

अल्लाह की क़सम! मेरे आँख की बीमारी के वक़्त, मैं एक यहूदी के पास जाती थी और वो मुझे तावीज़ देती थी. और उस से मेरी बीमारी दूर हो जाती थी.

तब अब्दुल्लाह (रज़ि’अल्लाहु अन्हु) ने बताया – ‘वो तो शैतानी आमाल था. दर’असल शैतान आपने हाथ से तुम्हारे आँख को दबा के रखता

था. जब यहूदी तुम्हे तावीज़ पहनने को देते, तब शैतान वो काम छोर देता.

बेशक तुम वही बयान करो जो रसूल (सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम) ने फ़रमाया –

“अल्लाहुम्मा राबिन नस अज़ाबाल बा’असा अस्फी अंता शफी ला शफी इल्ला अंता शफी ला-युगादिरु सक्मा”

तर्जुमा:

“या अल्लाह सारे आलम का रब, तकलीफ दूर करनेवाला, शिफा अता फार्मा, सिर्फ तू ही शिफा देने वाला है, तेरे बगैर कोई शिफा देने वाला

नहीं है , ऐसी शिफा अता कर ताके बीमरी एक दम ही न रहे.

(अबू दावूद, वॉल 3, हदीस-485)

नसीहत: लिहाज़ा ईमानवालो को चाहिए की उन पर आनेवाली मुसीबतो को अल्लाह की मस्लियत जाने और सब्र व शुक्र अदा करते रहे और

अपने रब से सिरते मुस्तकीम पर चलने की दुआ करते रहे.

अल्लाह हमे हक़ कहने, सुन ने और समझ के साथ अमल की तौफीक अता फरमाए..

!व आखीरु दवना अनिलहम्दुलिल्लाहे रब्बिल अ’लमीन!

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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