कौनसे बाल उतारने जाइज़ है और कौनसे उतारने जाइज़ नहीं?

3
1116
KONSE BAAL UTARNE JAIZ HAI AUR KOUNSE UTARNE JAIZ NAHI?
madina sharif
Islamic Palace App

KONSE BAAL UTARNE JAIZ HAI AUR KOUNSE UTARNE JAIZ NAHI?

कौनसे बाल उतारने जाइज़ है और कौनसे उतारने जाइज़ नहीं?

सवाल:- मुझे इल्म है के (eyebrow) के बाल उतरने , और चेहरे के बाल नोचने हराम है , लेकिन मुझे इल्म है के होंठों के ऊपर वाले बाल

उतरने मुमकिन हैं लेकिन जो बाल सर और (eyebrow) के दरमियान हो उन का हुक्म क्या है ?

अल्हम्दुलिल्लाह-

अव्वल: बाल उतरने के ऐतेबार से उलेमा ने बालों को 3 किस्मो में तक़सीम किया है –

पहली क़िस्म :

वो बाल जिन के उतरने और काटने का हुक्म दिया गया है और वो ये बाल हैं जिन्हे फितरती सुन्नत कहा जाता है .

मिसाल के तौर पर ज़ेर ए नाफ ,और मूंछो के बाल,और बगलों के बाल,और इस में हज और उमराह के मौके पर सर के बाल छोटे करना और

सर मुंडवाना भी दाखिल होता है .

इस की दलील आयेशा रज़ि . की दर्ज ए ज़ैल हदीस है वो बयान करती हैं के रसूल ﷺ ने फ़रमाया, -10 चीज़ें फितरत में से हैं ; मूंछें

काटना,दाढ़ी बढ़ाना , मिस्वाक करना,नाक में पानी चढ़ाना ,नाख़ून काटना उंगलिओं के पूरे (joints) धोना , बगलों के बाल उखड़ना, ज़ेर ए

नाफ बाल मुंडवाना, और पानी से इस्तंजा करना –

ज़करियया कहते है , मुस’अब ने कहा मै (10) दसवीं चीज़ भूल गया हूँ मगर वो कुल्ली करना हो सकता है –

(Narrated by Muslim, Hadith-502)

दूसरी क़िस्म:

वो बाल जिन को उतरने की हुरमत (मनाही) आती है . इस में (Eyebrow) के बाल उतरने शामिल हैं , और इस फ़ैल को नाम दिया जाता है,

और इस तरह दाढ़ी के बाल .

इस की दलील दर्ज ए ज़ैल हदीस है :

अब्दुल्लाह बिन मस’ऊद रज़ि अल्लाह बयान करते हैं मै ने रसूल करीम ﷺ को फरमाते हुए सुना –

अल्लाह ता’अला जोड़ने और गुदवाने वालिओं , और एएब्रोस के बाल उखड़ने वालिओं , और ख़ूबसूरती के लिए दांत रगड़ कर बारीक करने

वालिओं, अल्लाह की पैदा करदा सूरत में तब्दीली करने वालिओं पर लानत फ़रमाई –

(Narrated by al-Bukhaari, 5931; Sahih Muslim, 2125)

और अब्दुल्लाह बिन उम्र रज़ि अल्लाह .बयान करते हैं मै ने रसूल को फरमाते हुए सुना –

-मुशरिको की मुखालिफत करो ,धाधिओं को बढ़ाओ और मूंछें पास्ट करो –

(Narrated by al-Bukhaari, 5892; Muslim, 259)

इमाम नववि रज़ि अल्लाह कहते हैं :

अल नामीसह: वो औरत है जो चेहरे के बाल उतारे और

अल-मुतानंमीसाः वो औरत है जो अपने चेहरे के बाल उतरवाए –

और ये फा ’इल हराम है, लेकिन अगर औरत को दाढ़ी या मूंछें आ ’जाएं तो उसे उतरना हराम नहीं, बल्कि हमारे नज़दीक वो मुस्तहब है –

(Sharh al-Nawawi li Saheeh Muslim, 14/106)

तीसरी क़िस्म –

वो बाल जिन से शरीयत खामोश है , इन के मुताल्लिक़ न तो उतरने का हुक्म है , और na ही इन्हे बाक़ी रखने का वजब ,

मसलन पिंडलिओं और हाथो के बाल , और रुखसारों गाल (cheeks) और पेशानी पर उगने वाले बाल .

तो इन बालों के मुतालिक उलेमा ए करम का इख्तिलाफ है –

कुछ उलेमा कहते है के इन्हे उतरना जाइज़ नहीं , क्यों के इन्हे उतरने में अल्लाह ता ’अला की पैदा करदा सूरत में तब्दीली है .

जैसा के अल्लाह ने शैतान की बात को नक़ल करतेहुए फ़रमाया – और मै यक़ीनन इन्हे अल्लाह की पैदा करदा सूरतों में तब्दीली का हुक्म दूंगा –

(अल-निसा ’ 4:119 – interpretation of the meaning)

और कुछ उलेमा का कहना है (और ये राये मुझे बेहतर लगती है दीन के सूल की रौशनी में) की :

ये बाल इन में शामिल हैं जिस पर शरीयत खामोश है ,और उस का जाएज़ वाला हुक्म है और वो इन्हे बाकी रहने या उतरने का जायज़ है , क्यों

के जिस से किताब और सुन्नत खामोश हो वो मुआफ करदा है .

मुस्तक़िल फतवा समिति के उलेमा ए कराम ने यही क़ौलि इक्तियार किया है और इसी तरह शेख इब्न ‘उठायमीन ने भी यही क़ौल िखतियार किआ है .

फतावा अल -मर’यह अल -मुस्लिमः , 3/879.

मुस्तक़िल फतवा समिति के फतावा अल-लजनह अल-दा ’ईमान में है –

1. औरत के लिए अपनी मूंछें रानो और पिंडलिओं और बाज़ू ’ों के बाल उतरने में कोई हरज नहीं , और ये ममनू ए तन्ममुस (plucking) में से नहीं है –

(फतावा अल-Lajnah al-Daa’imah, 5/194, 195)

2. मुस्तक़िल समिति से दरयाफ्त किया गया

इस्लाम में (eyebrows) के दरमियान बाल नोचने का हुक्म क्या है ?

समिति का जवाब :

इन्हे नोचना जायज़ है क्यों के ये (Eyebrow) में शामिल नहीं हैं –

(फतावा अल-Lajnah al-Daa’imah, 5/197)

3. और समिति से ये भी सवाल किया गया – औरत के लिए अपने जिस्म के बाल उतरने का हुक्म किया है ?

समिति का जवाब था :

सर और (eyebrows) के बालों के अलावह औरत के लिए बाल उतरने जाइज़ हैं , (Eyebrow) और सर के बाल बिलकुल उतरने जाइज़ नहीं और न ही (eyebrows) के कुछ बाल मुंडवाने जाइज़ हैं .

(फतावा अल-लजनह अल – दा ’इमाः , 5/194)

Follow Us

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace  को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया

3 COMMENTS

  1. Howdy, I think your site could possibly be
    having web browser compatibility problems. When I take a look at your site in Safari, it looks
    fine however when opening in IE, it’s got some overlapping issues.
    I merely wanted to provide you with a quick heads up!
    Besides that, wonderful blog!

  2. Hi! I know this is kinda off topic however I’d figured I’d ask.

    Would you be interested in exchanging links or maybe guest authoring a blog article or vice-versa?
    My blog discusses a lot of the same topics as yours and I feel we could greatly benefit from each
    other. If you happen to be interested feel free to send me
    an e-mail. I look forward to hearing from you!
    Terrific blog by the way!

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.