निकाह में लड़की-लड़के की रज़ामंदी

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Nikah me Ladki/Ladke ki Razamanddi
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Nikah me Ladki/Ladke ki Razamanddi

निकाह में लड़की-लड़के की रज़ामंदी

निकाह में लड़का और लड़की दोनों की रज़ामंदी ज़रूरी होती है।

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का फरमान है:

औरत का निकाह इस की इजाज़त के बगैर नहीं किया जायेगा “

किसी भी औरत को ऐसे शख्स से शादी करने पर मजबूर करना जाइज़ नहीं जिस से वह शादी नहीं करना चाहती हो,

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का फरमान है:

” Ayem (तलाक़ याफ्ता या बेवह) औरत वाली से ज़्यादा अपने आप की हक़दार है, और कंवरी से इस की इजाज़त के बारे में इजाज़त तालाब

की जाएगी और इस की इजाज़त इस की ख़ामोशी है “

(सहीह मुस्लिम हदीस न०,1421 ) .

और हदीस में रसूल करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का फरमान है:

” शादी शुदा औरत से महस्वारा के बग़ैर इस की शादी नहीं की जाएगी, और कंवरी औरत की शादी इस की इजाज़त के बग़ैर नहीं की जाएगी”.

सहाबा ने अर्ज़ किया: ए अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) इस की इजाज़त कैसी होगी ?

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:

” वह खामोश हो जाये “

(सहीह बुखारी हदीस न० (4843 ) सहीह मुस्लिम हदीस न०,1419).

इस की दलील दर्ज जाईल हदीस है।

खाँसा बिन्त खज़ाम उल अन्सारिया (रज़ि) बयान करती हैं के :

” उन के वालिद ने उन की शादी कर दी और वह साईब (तलाक़ याफ्ता या बीवी) थी, तो इस ने उसे नापसंद किया और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) के पास आयी तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल्म) ने इस के निकाह को रद्द कर दिया “

(सहीह बुखारी हदीस न०, 4845)

और इब्ने अब्बास (रज़ि) बयान करते हैं के:-

” एक कंवरी लड़की नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास आयी और बयान करने लगी के इस के वालिद ने इस की शादी कर दी है और

वह मकरूह थी, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उसे इख्तियार दे दिया“

सुनें अबू दावूद हदीस न० (2096 ) अल्लम्ह अल्बानी रेहम अल्लाह ने उसे सहीह क़रार दिया है,

ऊपर जो कुछ बयान हुवा है इस से मालूम होवा के औरत रज़ि नाह हो तो बाज़ अहल इल्म के हाँ निकाह सहीह नहीं, और कुछ उलमा कहते हैं

के यह औरत की इजाज़त पर मोक़ूफ़ है, इस बिना पर अगर औरत खाविंद के साथ नहीं रहना चाहती हो तो क़ाज़ी उसे तलाक़ दे देगा, और इस

में खाविंद की गए की नहीं देखेगा .

जब किसी मर्द का दिल किसी लड़की से मुअल्लक़ हो जिस का इस का निकाह करना जाइज़ है या किसी लड़की ने किसी लड़के को पसन्द कर

लिया हो तो इस का हल शादी के इलावा कुछ नहीं

क्यूंकि नबी रसूल अल्लाह अलैहि वसल्लम का फरमान है:

दो मोहब्बत करने वालों के लिए हम निकाह की मिस्ल कुछ नहीं देखते.

सुनें इब्न मजा हदीस न० 1847 ) बुसरी रेहम अल्लाह ने उसे सहीह कहा है और अल्लामा अल्बानी रेहम अल्लाह तआला ने भी इसे

सिलसिलातुल सहीह (624) में उसे सहीह क़रार दिया है,

मंगेतर को शादी से पहले देखने की इजाज़त:

और इसी लिए नबी रसूल अल्लाह  (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने लड़के को यह इजाज़त दी की है के वो अपनी होने वाली मंगेतर को देखे:

मुग़ीरा बिन शोबा रज़ि अल्लाह तआला अन्हु बयान करते हैं के में ने एक औरत से मांगनी की नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फरमाने लगे:

उसे देखलो क्यूंकि ऐसा करना तुम दोनों के माबैन ज़्यादा इस्तिक़रार का बाइस बनेगा.

सुनें तिर्मिज़ी हदीस न० (1087 ) सुनें निसाई हदीस न० (3235 ) इमाम तिर्मिज़ी रेहम अल्लाह तआला ने उसे हसन कहा है.

अबू हुरैरा (रज़ि) बयान करते हैं के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:-

जब तुम्हरे पास ऐसे शख्स का रिश्ता आये जिस का दीन और इख़लाक़ तुम्हे पसन्द हो तो इस की शादी (अपनी लड़की से) कर दो, अगर तुम

ऐसा नहीं करोगे तो ज़मीन में वासी और अरीज़ फसाद बरपा हो जाएगा“

सुनें तिर्मिज़ी हदीस न० (1084 ) अल्लम्ह रेहम अल्लाह ने सहीह तिर्मिज़ी में उसे हसन क़रार दिया है.

वाली को जाइज़ नहीं के वह अपनी विलायत में रहने वाली औरत को मुनासिब रिश्ता आने पर जिस पर लड़की भी रज़ि हो से शादी न करने दे.

अल्लाह (SWT) का फरमान है:

(तो तुम इन्हें उन के खाविन्दों से निकाह करने से न रोको, जब के वह आपस में दस्तूर के मुताबिक़ रज़ामन्द हूं)सौराह-अल-बक़रह (232 ) 

अल्लाह सुभना का तो फरमान है:

(और अपने में से बे निकाह औरतों की शादी कर दो)

(और अपने नैक सालेह घुलमो और लोंड़िओ की भी शादी कर दो)

जब वाली अपनी विलायत में मौजूद औरत को मुनासिब और बराबर के रिश्ता आने पर इस की शादी न करे जिस से वह शादी करने पर राजी

हो तो इस ने उसे शादी करने से रोक दिया, इस तेरहन इस की विलायत मुन्तक़िल हो कर बाद वाले असबाह मर्द को हासिल हो, और फिर

क़ाज़ी को

लेकिन काश हम इस हद तक न पहुंचे के जिस में लड़की इस बात की जुर्रत करे के जब इसका वालिद ऐसे शख्स से शादी न करने दे जो दीनी

और अख़लाक़ी लेहाज़ से इस का काफू हो तो वह लड़की क़ाज़ी से जाकर शिकायत करे,और क़ाज़ी इस के वालिद से कहे के इस की शादी इस

शख्स से कर दो वगरना में करता हूँ या फिर तेरे इलावा कोई वाली कर देगा .

इस लिए के लड़की को हक़ हासिल है के जब इस का वालिद उसे शादी न करने दे (तो वह क़ाज़ी से शिकायत कर दे) और यह उस का शरई हक़

है काश हम इस हद तक न पहुंच ने

इस लिए लड़कियों के वालियों चाहे वह वालिदैन हूं या भाई वग़ैरा को चाहिए के वह अल्लाह तआला का तक़वा और खौफ इख़्तियार करते हुए

इन्हें शादी करने से न रोकें, उन का हक़ है के जिस का दीन व अख़लाक़ अच्छा हो इस से शादी कर दें .

हाँ यह है के अगर लड़की ऐसा लड़का इख्तियार करे जो दीनी और अख़लाक़ी तौर पर बेहतर नहीं तो फिर वाली को यह हक़ हासिल है के इस से

शादी न करने दे और मना करदे , देखें अल मुग़नी: ( 383 / 9) .

लेकिन अगर लड़की दीनी लेहाज़ से अच्छे शख्स को इख्तियार करती है और फिर इस का वाली सिर्फ अपने नफ़्स की ख्वाहिश पर अमल

करते हुए इस से शादी नहीं करने देता तो अल्लाह की क़सम यह हराम है और फिर हराम ही नहीं बल्के खयानत भी है, ऐसा करने से जो भी

फसाद पैदा हो गए वह इस का

ज़िम्मेदार है और इस का गुनाह भी इसी पर होगा. .

इस मामला को बात चीत और अफहम और तफ़हीम और नसीहत के ज़रिये हल करना चाहिए, हो सकता है के इस रिश्ता के इंकार में वालिद

हक़ पर हो, और यह भी हो सकता है गलती पर हो.

वालिद कi इताअत व फरमाबरदारी और उसे राजी करने की हत्ता उल इमकान कोशिश करनी चाहिए– इस के लिए आप दुआ से मुआवनात

लें, और इस्तीखरा और कसरत से आमाल सलेहा करें.

अल्लाह (SWT) से दुआ करते हैं के वह हम को खैर और भलाई पर जमा रखे और इताअत और रज़ामंदी के काम में मुआवनात फरमाए. अमीन

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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