बीवी के हुक़ूक़ शोहर पर हदीस की रौशनी में और बीवी का हक़

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Biwi Ke Huqooq Shohar Par Hadees Ki Roshni Me Aur Biwi Ka Haq
BiWi ke huqooq
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Biwi Ke Huqooq Shohar Par Hadees Ki Roshni Me Aur Biwi Ka Haq

बीवी के हुक़ूक़ शोहर पर हदीस की रौशनी में और बीवी का हक़

बीवी के हुक़ूक़

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकतहु

प्यारे इस्लामी भाइयो,

अल्लाह ताला ने जिस तरह औरतो पर शोहर के हुक़ूक़ फ़र्ज़ किये है
उसी तरह शोहर पर भी औरतो के हुक़ूक़ फ़र्ज़ है।

इन हुक़ूक़ को अदा न करने वाला सख्त गुनाहगार है
अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है
“और उनसे (औरतो से) अच्छा बर्ताव करो”।

(तर्ज़ुमा: कंज़ुल ईमान पारा 4, सूरे निसा, आयत 19)

सरकार-ए-मदीना (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया

“तुम में अच्छे लोग वह हैं
जो औरतो के साथ अछि तरह पेश आये”।

(मिश्कात शरीफ Part 2, सफ़ा 282)

सरकार-ए-मदीना (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया

“औरत को किसी बड़े कसूर के कभी हरगिज़ न मारे
जिस तरह अपने गुलाम को मारा करता है
फिर दूसरे वक़्त उससे सोहबत भी करे”।

(मिश्कात शरीफ जिल्द 2, सफ़ा 280)

अफ़सोस! आज के कुछ जाहिल नौजवान अपनी बीवी को मारते हैं।
या अल्लाह हम सबको अपनी बीवी की इज़्ज़त करने की तौफ़ीक़ अता फरमा

आमीन

हबीब-ए-खुदा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया

“कोई मोमिन मर्द किसी मोमिन औरत से बुग्ज़ व नफरत न रखे
क्यूंकि अगर औरत की कोई आदत बुरी मालूम होती तो
उसकी कोई दूसरी आदत पसंदीदा भी होगी”।

(मिश्कात शरीफ जिल्द 2, सफ़ा 280)

मेहबूब-ए-खुदा ख़त्मुन्न नबीय्यीन (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया

“तुम में वह बेहतर है जो
अपनी बीवी के साथ बेहतर है
और में अपनी बीवियों के साथ तुम सबसे ज्यादा बेहतर हूँ”।

(इब्ने मजा जिल्द 1, सफ़ा 551, हदीस No 2047, तिर्मिज़ी शरीफ जिल्द 1, सफ़ा 595)

अपनी बीवी के साथ अच्छा सुलूक करो।
उसके साथ मुहब्बत से पेश आओ।
बीवी के साथ नरमी और खुशमिजाजी से बर्ताव करो।
अपनी बीवी से लड़ाई झगड़ा न करो प्यारे आक़ा अलैहिस्सलाम की सुन्नतों पर अमल करो

मदनी आक़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का फरमाने आलिशान है की

“सबसे बुरा आदमी वह है जो अपनी बीवी को सताए”।

(ताब्रनि शरीफ)

प्यारे इस्लामी बहियो अपनी बीवी पर जुल्म करना,
उसे सतना,
गाली गलोच करना
बदतरीन गुनाह है

हज़रत अबू हुरैरा (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) से रिवायत है की
रसूल-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया

“जब किसी के निकाह में दो बीविया हो
और वो एक ही की तरफ माएल हो तो वह क़यामत के दिन जब आएगा
तो उसका आधा धड़ गिरा हुआ होगा”।

(तिर्मिज़ी शरीफ जिल्द 1, सफ़ा 584, हदीस न० 1137, इब्ने माजा जिल्द 1, सफ़ा 549)

हबीब-ए-खुदा (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया

“औरतों के साथ नेकी का बर्ताव करो
की उनकी पैदाइश टेढ़ी पसली से हुई है
वह तेरे लिए कभी सीधी नहीं हो सकती
अगर तू उसे बरतना चाहे तो
हर हालत में बारात सकता है
और सीधा करना चाहेगा तो तोड़ देगा और
तोड़ना तलाक़ देना है

(मुस्लिम शरीफ)

हज्जतुल विदा के मशहूर ख़ुत्बे में

हुज़ूर-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का इरशादे गिरामी है की

ए लोगों! “औरतो के बारे में नेकी
और भलाई करने की वसीयत फरमाता हु
तुम मेरी वसीयत क़ुबूल करो
बेशक औरतो का तुम्हारे ऊपर हक़ है
तुम उनके पहनाने और खिलाने में नेकी इख़्तियार करो

(इब्ने मजा)

मदनी आक़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया

“निकाह की शर्त यानि मेहर अदा करने का सबसे ज्यादा ख्याल रखो”।

(बुखारी शरीफ जिल्द 3, सफ़ा 80)

हक़ महार अदा करना शोहर पर वाज़िब है
और इसे अदा करने में कोताही करने वाला सख्त गुनहगार है

या अल्लाह हम सबको अपनी बीवी का हक़ अदा करने की तौफ़ीक़ अता फरमा
और बीवी के साथ मुहब्बत से ज़िन्दगी बसर करने की तौफ़ीक़ अता फरमा

आमीन

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अल्लाह तआला इन सारे मसाइल को हमें समझने याद रखने
और उससे भी ज़्यादा अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाए

आमीन

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आमीन

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