दुरूद शरीफ की फ़ज़ीलत का बा कमाल वाक़िआ

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DUROOD SHAREEF KI FAZILAT KA BA KAMAL WAQIAA
madina
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DUROOD SHAREEF KI FAZILAT KA BA KAMAL WAQIAA

दुरूद शरीफ की फ़ज़ीलत का बा कमाल वाक़िआ

हज़रते सय्यिदना शेख मुहम्मद बिन सुलेमान जाजुली रहमतुल्लाहि तआला फरमाते हैं।

में शफर पर था. एक मक़ाम पर नमाज़ का वक़्त हो गया वह कुआ तो था मगर डोल और रस्सी गायब थी।

में इसी फ़िक्र में था के एक माकन के ऊपर से एक छोटी सी लड़की ने जाका और पूछा. क्या तलाश कर रहे है।

में ने कहा बेटी रस्सी और डोल उस ने पूछा आप का नाम फ़रमाया मुहम्मद बिन सुलेमान जाजुली छोटी सी बच्ची ने ओह्ह तो आप वो ही है।

जिनके चर्चे आज हर जगह पे होते हैं और हल ये है।

के कुआ से पानी भी नहीं निकल सकते ये कह कर उस न्र कुआ में थूक दिया कमाल हो गया।

आनन् फानन पानी ऊपर आ गया और कुआ से छलक ने लगा,

आप रहमतुल्लाहि तआला ने वुज़ू से फरागत के बाद उस बा का कमाल बच्ची से फ़रमाया?

बेटी सच बताओ तुम ने यह कमाल किस तरह हासिल किया? कहने लगी में दुरूद ए पाक पढ़ती हूँ,

इसी की बरकत से यह करम हुआ है। आप रहमतुल्लाहि तआला अलाय फरमाते हैं।

उस बच्ची से मुतास्सिर हो कर में ने वही अहद किया की में दुरुद शरीफ के मुताल्लिक किताब लिखूंगा,

और वही किताब का नाम है जिसे दुनिया आज “दलैलुल खैरात” के नाम से जानती है,

सुब्हानल्लाह अज़राते सय्यिदना शेख मुहम्मद बिन सुलेमान जाजुली रहमतुल्लाहि तआला फरमाते हैं।

में शफर पर था, एक मक़ाम पर नमाज़ का वक़्त हो गया वह कुआ तो था मगर डोल और रस्सी गायब थी,

में इसी फ़िक्र में था के एक मकान के ऊपर से एक छोटी सी लड़की ने जाका और पूछा.क्या तलाश कर रहे हैं?

में ने कहा बेटी रस्सी और डोल उस ने पूछा आप का नाम? फ़रमाया मुहम्मद बिन सुलेमान जाजुली.छोटी सी बच्ची ने ओह्ह तो आप वो ही हैं

जिनके चर्चे आज हर जगह पे होते है।

और हल ये है के कुआ से पानी भी नहीं निकाल सकते ये कह कर उस न्र कुआ में थूक दिया कमाल हो गया आनन् फानन पानी ऊपर आ गया

और कुआ से छलक ने लगा.आप रहमतुल्लाहि तआला ने वुज़ू से फरागत के बाद उस बा का कमाल बच्ची से फ़रमाया?

बेटी सच बताओ तुम ने यह कमाल किस तरह हासिल किया? कहने लगी में दुरूद ए पाक पढ़ती हूँ,

इसी की बरकत से यह करम हुआ है आप रहमतुल्लाहि तआला अलाय फरमाते हैं

उस बच्ची से मुतास्सिर हो कर में ने वही अहद किया की में दुरुद शरीफ के मुताल्लिक किताब लिखूंगा और वही किताब का नाम है

जिसे दुनिया आज “दलैलुल खैरात” के नाम से जानती है (सुब्हानल्लाह)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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4 COMMENTS

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