मरने के बाद पहली मंज़िल क़ब्र

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MARNE KE BAAD PEHLI MANZIL KABR

मरने के बाद पहली मंज़िल क़ब्र

अमीरुल मुआमिनिन हज़रात ए सय्यिदना उस्मान ए गनी रदिअल्लहु तआला अन्हु जब किसी की कब्र पर तशरीफ़ लाते

तो इस कदर आँशु बहते की आप रदिअल्लाहु तआला अन्हु की दाढ़ी मुबारक तर हो जाती,

अर्ज़ की गई जन्नत व दोज़ख का तज़किरा करते वक़्त आप नहीं रोते मगर कब्र पर बहुत रोते है।

इस वजह क्या है। फ़रमाया: मैने नबिय्ये अकरम नूरे मुजस्सम शाही बानी आदम (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) से सुना है।

आख़िरत की सब से पहली मंज़िल कब्र है। अगर कब्र वाले ने इस से नजात पाई तो बाद का मुआ माला इस से आसान है।

और अगर इस से नजात न पाई तो बाद का मुआ माला जियादा सख्त है।

अल्लाहु अकबर मेरे सुन्नी भाईओ मर ने से कब्र की तैयारी कर लो।

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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