रोज़े के मुतालिक नाजायज़ व हराम बोले जाने वाले अल्फ़ाज़

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KASAM TODNE KA KAFFARA
Quran
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रोज़े के मुतालिक नाजायज़ व हराम बोले जाने वाले अल्फ़ाज़

Roze Me Bole Jane wale galat alfaz

रोज़े में बोले जाने वाले गलत अल्फ़ाज़

अक्सर हमारे भाई काम इल्मी और दीं से दूरी होने की वजह से
अपने मुंह से कुछ ऐसे अल्फ़ाज़ निकल देते हैं जो की गुनाह हैं

(1) “रोज़े में मेरी हालत ऐसी हो गई की मेने तो रोज़ा तोड़ दिया
और अब कभी अयेन्दा रोज़ा नहीं रखूँगा

(2) “रोज़ा वो रखता है जिसके पास खाने को नहीं होता

(3) “मुझे तो रोज़े ने इतना परेशां कर दिया की रोज़ा तोड़ना पड़ा

(4) “मेरा रोज़ा न होता तो बताता,

(5) “तुम्हे रोज़ा तो नहीं लग रहा,

(6) “या यूं कहना मुझे रोज़ा लग रहा है

(7) “आज तो रोज़े ने हालत बुरी करदी

(8) “कब खुले गा रोज़ा,

(9) “रोज़े में कुछ तो पीने या खाने की इजाज़त होनी चाहिए थी,

(10) “रोज़े में तेरी शकल कैसी निकल आयी है

याद रखिये रोज़ा फ़र्ज़ इबादत है और अल्लाह क़ुरआन में फरमाता है

“ए ईमान वालों तुम पर रोज़ा फ़र्ज़ किए गए
जैसा की तुम से पहले उम्मतों पर फ़र्ज़ हुए
ताकि तुम गुनाहो से बचो”

(قرآن كريم، پارہ-2، سورة البقرة-187)

अब अगर रंजनो के रोज़ों की कोई तौहीन करें
और गलत अल्फ़ाज़ कहे वो भला एक
सच्चा मुस्लमान और मोमिन कैसे हो सकता है

ऐसे अल्फ़ाज़ बोलने से खुद भी बचाएं
और दूसरे भाई बहनो को भी बचाएं

अल्लाह हमें हर तरह के गलत अल्फ़ाज़ बोलने से बचाये

आमीन

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आमीन

►जज़ाकअल्लाह खैरन◄

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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