वुज़ू की फ़ज़ाइल और बरकत

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WUZU K FAZAIL OR BARAKAT
Wuzu
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WUZU K FAZAIL OR BARAKAT

वुज़ू की फ़ज़ाइल और बरकत

अल्लाह तआला क़ुरान ए पाक में इरशाद फरमाता है के ए ईमान वालो! जब तुम नमाज़ पढने का इरादा करो तो धोवो अपने चेहरे को और

अपने हाथों को, कोहनियो के साथ.और मसह करो अपने सरोका तखनो तक पेरो को धोवो, मेरे मुस्तफा के आसिको वुज़ू यह भी एक इबादत

है जब आप क़ुरआन पढ़ना चाहते हैं, तो क़ुरआन ए करीम को पकड़ ने के लिए वुज़ू जरुरी है बगैर वुज़ू क़ुरआन ए पाक पकड़ना नाज़ायज़

है. आप नमाज़ पढ़ना चाहते है तो नमाज़ से पहले वुज़ू करो बगैर वुज़ू के आप नमाज़ नहीं पढ़ सकते, इसी लिए हर इबादत से पहले वुज़ू कर

लिया करो, इस लिए के वुज़ू की बहुत फ़ज़ीलत है। हदीश ए पाक में आया है के जो सख्श नमाज़ अदा करने के लिए ग़ुस्ल और वुज़ू करता है।.

अगर ठंडी हो सख्त ठंडी में भी सिर्फ नमाज़ की खातिर ग़ुस्ल और वुज़ू करता है और वुज़ू करते वक़्त “लाइलाह इल्लाह” का ज़िक्र करता है जब

वो अच्छा वुज़ू करे के कोई हिस्सा भीगने से बाकी न रहे तो मुस्तफा (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) फरमाते हैं के उसके पानी के हर क़तरे के

बदले मे एक -एक फिरिश्ता पैदा किया जाता है। जो क़यामत तक “लाइलाह इल्लला” का ज़िक्र करते रहेंगे और सब फ़रिश्तो का पढ़ने का

सवाब उस वुज़ू करने वाले को और ग़ुस्ल करने वाले को अता किया जाता है। रोज़ाना ऐसी पोस्ट को पढ़ने के लिए हमारे इस्लामिक पैलेस पेज

को फॉलो करते रहिये इस्लामिक पैलेस स्पॉट “अहले सुन्नत मरकज़” (इंशाअल्लाह)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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