नमाज़ के बारे में जरुरी मालूमात जानिए

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Juma ke Din ke Kuch Khaas Amal jo Huzoor ﷺ ka Farman se.
Namaz
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AMAZ KE BARE ME JARURI MALUMAT

नमाज़ के बारे में जरुरी मालूमात

जिन कामो या बातो से नमाज़ फ़ासिद हो जाती है उन्हें मुफ़सिदात-ए-नमाज़ कहा जाता है. अगर ऐसी गलती हो जाये तो नमाज़ दोबारा पढ़नी पड़ेगी, सजदा-ए-साहू करने से सही नहीं होगी.

(1) नमाज़ मैं किसी तरह बात करने, बोलने से नमाज़ फ़ासिद हो जाती, भूल से बोले या जान बुझ कर. कम बोले ये जायदा, हर हाल मैं नमाज़ टूट जाएगी.

(2)  नमाज़ मैं किसी को सलाम करने या सलाम का जवाब देने मैं नमाज़ टूट जाती है.

(3)  4-रकअत के नियत से नमाज़ पढ़ रहे थे, 2-रकअत पूरी होने पर यह सोच कर सलाम फेर लिया की 2-रकअत की नियत से पढ़ रहा था, नमाज़ टूट गयी.

(4) किसी को छींक आयी, उसने अल्हम्दोलिल्लाह कहा. नमाज़ी ने उसके जवाब मैं यारहमुकल्लाह कह दिया तो नमाज़ टूट गयी.

(5) नमाज़ की हालत मैं अगर छींक आगयी तो अल्हम्दोलिल्लाह न कहे.

(6) नमाज़ की हालत मैं कोई ख़ुशी की खबरसोंई और अल्हम्दोलिल्लाह कह दिया, या कोई गम की खबर सुनी तो इंनलिल्लाह पढ़ दिया, तो नमाज़ टूट गयी.

(7) नमाज़ की हालत मैं अल्लाह सुनकर जल-जलालहु या हुज़ूर का नाम सुन कर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कह दिया तो भी नमाज़ जाती रही.

(8) किसी भी वजह से या कुछ सुनकर अचानक ज़बान से निकल आया – अरे , हां तोभी नमाज़ टूट गयी.

(9) इमाम को मुक्तदी के अलावा किसी और दूसरे का लुक्मा लेना जाएज़ नहीं. जैसे इमाम शाहब से कोई भूल हो गयी. एक आदमी जो जमात मैं शरीक नहीं था, उसने लुक्मा दे दिया और इमाम शाहब ने लुक्मा ले लिया तो नमाज़ टूट

(10) नमाज़ की हालत मैं अगर किसी वजहें से ज़बान से – आह, ओह, है, उफ़, तूफ़, वगैरा जैसे अल्फ़ाज़ निकल गए तो नमाज़ टूट जाती है.

(11) छींक आने, ख़शने, जमाई लेने और डकार लेने मैं जीतने ये हुरूफ़ ज़बर से निकलते है वह मज़बूरन निकट है इस लिए मएफ़ है, नमाज़ नहीं टूटी है.

(12) नमाज़ मैं क़ुरान शरीफ देख कर पढ़ने से भी नमाज़ फ़ासिद हो जाती है. इसी तरह कोई दूसरी चीज भी पढ़ने से भी नमाज़ टूट जाती है.

(13) नमाज़ मैं इतनी आवाज़ से हँसा की पास वाले नमाज़ी को सुनाई दिया तो नमाज़ टूट गयी अरु वज़ू भी जाता रहा. और अगर पास वाले ने नहीं सुनी तो नमाज़ तो जाती रही लेकिन वज़ू नहीं टुटा.

(14) अगर किसी वजह से या ज़रूरत से खिखणे, गाला साफ़ करने की वजह से गले से- उह्ह, आख की आवाज़ निकल ए तो नमाज़ नहीं टूटती और अगर बिला वजह गलसाफ करने के लिए खिखरा तो नमाज़ टूट जाएगी.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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