मुसलमानों सुनलो न्यू ईयर मानना जाइज़ नहीं

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New Year Mana Jaiz Nahi
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New Year Mana Jaiz Nahi

मुसलमानों सुनलो न्यू ईयर मानना जाइज़ नहीं

सवाल

“इस्लाम बहुत आसान है तुम दीनदार लोगो ने इसको इतना (Complicate) (मुश्किल) बना दिया है के क्या बताओ न्यू ईयर तक मानाने नहीं देते हो”.

जवाब

(सही कहा इस्लाम बहुत सिंपल है क्यू के इसमें या तो हराम है या हलाल बीच में मुनाफ़िक़ात के सिवा कुछ नहीं आता)

ए ईमान वालों इस्लाम में सारे के सारे (अच्छी तरह से) दाखिल हो जाओ और शैतान के क़दमों की पैरवी न करो क्यूंकि वो तुम्हारा खुला दुश्मन है।

और फिर अगर तुम खिली खुली निशानियां (अहकाम-ए-रोशन) आने के बाद भी फिसल गए तो जान लो की अल्लाह ग़ालिब और हिकमत वाला है.

(अल क़ुरान,अल-बकरा, (2) आयात 208-209)

अब जो मुसलमान ईमान की अहमियात को जानता है वो जीना वाले माहौल में न्यू ईयर सेलिब्रेशन जैसे ग़ैर मज़हबी तक़रीब से सख्त परहेज़ करेगा,

जो बदनसीब मुसलमान होने बाद भी ईमान को तर्जी (importants) नहीं देगा तू वो गधे के जैसा चिलता रहेगा.*

हैप्पी न्यू ईयर , हैप्पी न्यू ईयर!

अब हदीस से बहुत ध्यान से पढ़ लीजिये

रसूल्लल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया

“उस ज़ात की क़सम जिसके क़ुदरत में मुहम्मद की जान है,

मेरी उम्मत का एक गिरोह रात बहार खाने पीने और लहू लोआब में मसरूफ रहेगा

जब सुबह होगी तो उनकी शक्लें बंदरों और खंज़रों की शक्ल में बदल चुकी होगी क्यूंकि वो शराब को हलाल समझते होंगे वाफ अलात मौसिकी बजाते होंगे और गाने वाली औरतें बना रखी होंगी”.

(मसनद अहमद, हदीस न० 2799)

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“तुम ज़रूर अपने से पहली उम्मतों की आदतों और तौर-और-तरीकों में एक एक बालिश्त और एक एक हाथ पैरवी करोगे, यहां तक के अगर वह किसी गोह (छिपकली जैसा एक क़िस्म का जानवर) के सुराख में दाखिल हुए होंगे तो तुम भी

उस में दाखिल होंगे. सहाबा رضی اللہ عنہم ने पुछा या रसूलल्लाह ﷺ! पहली उम्मतों से आप की मुराद यहूदी और (Esaai) हैं? आप ने फ़रमाया: फिर और कौन.

(बुखारी: 3456)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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