क्या हुज़ुर (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) ने कभी आज़ान नहीं दी?

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Kya Nabi ﷺ Ne Kabhi Aazaan Nahi Di?
mohammad Sallallahu alaihi wasallam
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Kya Nabi ﷺ Ne Kabhi Aazaan Nahi Di?

क्या हुज़ुर (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) ने कभी आज़ान नहीं दी?

दीं के दुश्मनो ने अपनी जाहिलियना हरकतों से बाज़ नहीं आते
और अज़ान के बारे में हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के नाम से बनाये हुए
कुछ झूठे हदीसो का खुलासा हम इस पोस्ट में करना चाहेंगे।
लिहाज़ा पोस्ट जरा गौर से पढ़ियेगा!

झूटी हदीस No.1:

हमारे नबी-ए-पाक ताजदार-ए-मदीना (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कभी अज़ान नहीं दी,
इसलिए के अगर आप अज़ान देते तो पूरी कायनात सजदा में आ जाती,
और अल्लाह को अज़ान बहुत पसंद है।

Also Read : मस्जिद में न बन्दा न बन्दे की ज़ात फिर भी मस्जिद से आई अज़ान की आवाज़ : इलाके में मच गया हड़कंप

झूटी हदीस No.2:

सवाल : ऐसा कोनसा काम है जिस के करने वाले को
अल्लाह पाक बोहत पसंद करता है।
मगर वह काम हज़रात मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने नहीं किया?

हुज़ुर (सल्ललाहु अलैहि वस्सलाम) ने कभी आज़ान नहीं दी,
अगर आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आज़ान देते तो
कायनात की हर चीज़ मस्जिद में आ जाती
और निज़ाम ए कायनात तबाह हो जाता!

इन झूटी हदीसो का खुलासा कुछ हक़ दलीलों में

ये बिलकुल मन-घरांत, बे बुन्याद
और ख़याली पुलाओ है। तहक़ीक़ ये है के:

1). हुज़ूर-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने एक बार
सफर में खुद अज़ान दी
(शहादत के अलफ़ाज़ इसतरह कहे: Ash-Hadu Inni Rasool’Allaah),
तकबीर कही
और नमाज़ पढ़ाई

(फतावा रजविया: 5/474, 475)
(दर्रे मुख्तार, तिर्मिज़ी, अज़्ज़िया,
इमाम इब्ने हजर अस्क़लानी की फत-हल बारी, इमाम नवावी,
इमाम इब्ने हजर मक्की की किताब तोहफा के हवाले से)

Also Read : मैं रास्ते में ही था जब मग़रिब की अज़ान हुवी जैसे ही घर पहुँचा मग़रिब का वक़्त तक़रीबन ख़त्म ही हो चूका था

2). हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) सफर पे थे,
नमाज़ का वक़्त क़रीब आया,
बारिश बरसी तोह ज़मीन गीली (गारा) बन गई,
आप ने सवारी पर बैठे ही अज़ान दी फिर इक़ामत कही।

(मुसनद-ए-अहमद, हदीस 17584)
(तिर्मिज़ी शरीफ, हदीस 411)

3). जब इमाम-ए-हसन इब्न-ए-अली (रज़ि अल्लाहु अन्हु) की विलादत हुई
तो हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उन के कान में अज़ान दी।

(तिर्मिज़ी शरीफ, हदीस 1519)

Note: लिहाज़ा ज़मान-ए-जाहिलियह की बातों में
गुमराही से बचने के लिए सही इल्म-ए-दीं हासिल करें,
और औरों को भी गुमराह होने से बचाएं।
अल्लाह तआला तमाम ईमान वालों को
सही इल्म-ए-दीं की समझ अता फरमाए

आमीन

Also Read : मुसाफिर अगर ज्यादा हों तो अज़ान और तकबीर…

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आमीन

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