तक़वा और इसकी अहमियत

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Taqwa Aur Iski Ahmiyat
Allah
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Taqwa Aur Iski Ahmiyat

तक़वा और इसकी अहमियत

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम!

अल-क़ुरआन:‘इन्ना आक्रामकुम ‘इन्दल्लाही अतकाकुम.’

तर्जुमा:

“बेशक अल्लाह के नज़दीक इकराम वाला वही है जो अल्लाह का दर्र (तक़वा) रखता हो”

(सौराह: हज़रत (49); आयत-13)

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने बार-बार इस पैगाम को दोहराया –

“ए वो लोगो जो ईमान लाये हो तक़वा इखियार करो”

और ये आयत क़ुरआन में बार–बार (Repeat) हुई है।

तो गौर करने वाली बात है।

के तक़वा यानी “अल्लाह का डर” जो की बहुत ही

अहमियत वाली बात है जिसका पैगाम हमे दिया गया

क्यूंकि: अल्लाह का डर जब इंसान में आ जाता है तो

इंसान हराम और हलाल की तमीज़ करने लगता है।

दीनो शरीयत और दुनिया फ़िज़ूल कामो में फर्क करने लगता है

दुनिया पर आख़िरत को तर्जी देने लगता है।

धोकेबाज़ी झूठ और तमाम बुरी खसलतो से एहतियात करता है।

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