हश्र की गर्मी मौत और क़ब्र से ज्यादा सख्त

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Hashr Ki Garmi Mout Aur Qabr Se Jyada Sakht

हश्र की गर्मी मौत और क़ब्र से ज्यादा सख्त

मफ़हूम-ए-हदीस :

अनस बिन मालिक (रज़िअल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि,

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया –

जब से अल्लाह तआला ने इन्सान को पैदा किया तब से उस पर मौत से ज़्यादा सख्त कोई वक़्त नहीं आया

और फिर मौत के बाद के मरहले मौत से भी ज़्यादा सख्त हैं,

बेशक लोग हस्र के दिन की सख्ती से दो-चार होने वाले हैं

जिससे पसीने (Sweat) की लगाम आयी होगी (पसीना इतना बाह रहा होगा की)

अगर उस पसीने में कश्तियाँ चलाई जाए तो वे चलने लगे।

(टाबरानी अत्तरगीब, जुज़ राबे-5258)

इंशाअल्लाह-उल-अज़ीज़!

अल्लाह राबुल इज़्ज़त रोज़े महशरे में हमे अपने रहमो-करम का साया नसीब फरमाए !! अमीन।

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आमीन

►जज़ाकअल्लाह खैरन◄

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