जानिए नमाज़ में 2 सजदे क्यों किये जाते है?

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Sutrah Ka Bayan Aur Namaz Ke Aage Se Guzarne Ka Gunah
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Namaz Mein 2 Sajde Kyun Kiye Jate Hain?

नमाज़ में 2 सजदे क्यों किये जाते है?

सवाल :

नमाज़ में 2 सजदे क्यों किये जाते है?

जवाब :

जब अल्लाह ने फरिश्तों को हुकुम दिया की आदम (अलैहिस्सलाम) को सजदा करो तोह उन्होंने सजदा किया,

लेकिन इब्लीस ने नहीं किया तोह उसको मरदूद क़रार दे कर जन्नत से निकल दिया.

इब्लीस की यह हालत देख कर फरिश्तों ने

सजदा-ए- शुक्र अदा किया और कहा, “ए अल्लाह तेरा शुक्र है के तूने

हमें अपना हुकुम बाजा लाने और अपनी इबादत करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाई।

वह 2 सजदे आज तक नमाज़ में अदा किये जा रहे है।

1) सजदा-ए-हुकुम
2) सजदा-ए-शुक्र

एक सहाबी ने हुज़ूर-ए-पाक (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से पूछा

“हमें कैसे पता चलेगा की हमारी नमाज़ क़ुबूल हो गयी”?

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया,

“जब तुम्हारा दिल अगली नमाज़ पढ़ने का करे तोह समझना की तुम्हारी नमाज़ क़ुबूल हो गयी।

सुभानअल्लाह

कुछ लोग ऐसे Post को Share नहीं करते, तोह अल्लाह ताला
फरमाते है, “अगर तुम अपने लोगो के सामने मुझे रद
करोगे तोह मैं तुम्हे अपनी नज़र में रद कर दूंगा।

SO pls Share it.

जब शैतान मरदूद ने कहा के, “ए रब, तेरी इज़्ज़त की कसम
मैं तेरे बन्दों को हमेशा बहकता
रहूँगा, जब तक उनकी रूहें उनके जिस्मो में रहेंगी”.
अल्लाह रअबुलइज़्ज़त ने इरशाद फ़रमाया, “मुझे कसम है अपनी इज़्ज़तो जलाल की और अपने आला मक़ाम की, जब तक वह मुझसे अस्तग़फ़ार करते
रहेंगे, मैं उनको बख्शता रहूँगा।

सुभानअल्लाह

हमारे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की कुछ प्यारी आदते।

1) चलते वक़्त निगाह निचे रखते.

2) सलाम हमेशा पहले करते.

3) मेहमान नवाज़ी खुद करते.

4) नफिल नमाज़ चुप के पढ़ते.

5) फ़र्ज़ इबादत सबके सामने करते.

6) बीमार की मिज़ाज पुरसी करते.

7) जब खड़े हुए ग़ुस्सा आये तोह लेट जाते, मिस्वाक करते.

9) ईशा से पहले कभी न सोते.

10) कभी खुलकर न हस्ते, सिर्फ मुस्कुराते.

अल्लाह पाक यह msg आगे भेजने वाले
की हर जायज़ तमन्ना पूरी करे.
आमीन.

जब हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के विशाल का वक़्त

क़रीब आया तोह आपने हज़रात इज़्राईl (अलैहिस्सलाम) से पूछा

“क्या मेरी उम्मत को भी मौत की इतनी तकलीफ बर्दाश्त करनी पड़ेगी”.

तोह फ़रिश्ते ने कहा, “जी “. तोह आपकी आख मुबारक से आंसू जारी हो गए.

तोह अल्लाह ने फ़रमाया,

“ए मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आपकी उम्मत अगर हर नमाज़ के फ़ौरन बाद आयतुल-कुर्सी

पड़ेगी तोह मौत के वक़्त उसका एक पाऊँ

दुन्या में होगा air एक जन्नत में”.

माशाअल्लाह

Plz send to everyone. अगर किसी एक ने भी अमल कर लिया तोह आपके लिए सदक़ा-ए-जरिया बन जाएंगे।

जोह शख्स सोते वक़्त 21 बार पूरी बिस्मिल्लाह पढता है, अल्लाह फरिश्तों से फरमाता है के इसकी हर ‘साँस ‘के बदले नेकी लिखो.
आप के mobile में जितने नंबर save है उन सबको forward करें और देखे आज आपकी वजह से कितने लोग ‘बिस्मिल्लाह’ पढ़ते है।

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