ईद की नमाज़ के बाद कबर पर जाने के अहकाम

0
222
Apnay Bhai Ki Khushi Ke Liye Muskrana Bhi Sadka Hai
muslim brothers
Islamic Palace App

EID KI NAMAZ KE BAAD KABR PAR JANE KE AHKAAM

ईद की नमाज़ के बाद कबर पर जाने के अहकाम

एक और चीज़ जो कुछ मुस्लिम करते है वो ये है की वो ईद की नमाज़ के बाद कब्रिस्तान या कब्र पर जाते है

जिसका नाम और निशान न ही क़ुरआन में है और न ही सुन्नाह में. कब्रिस्तान जाना रसूल अल्लाह के सुन्नाह मै से हआयेशा (r.z.) रिवायत करती है की मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया

की जिसने हमारे इस दीन में कुछ ऐसी बात शामिल की जो उसमे से नई है तो वो मरदूद है.

(सहीह अल बुखारी, हद-2697)

(सहीह मुस्लिम, हद-1718.)

रसूल अल्लाह ने एक और हदीस में फ़रमाया है

रसूल्लल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया

“सबसे बेहतरीन कलम अल्लाह की किताब है और सबसे बेहतरीन तरीक़ा मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का तरीक़ा है

सबसे बदतरीन काम दीन में नयी नयी बातों का पैदा करना है”

(सहीह बुखारी: भाग 9, बुक 92, नंबर 382.)

ईद की नमाज़ के बाद कब्र पर जाना न ही रसूल अल्लाह से साबित है

न ही सहाबाओ से न ही किसी सलफ से और न ही चार इमाम मै से किसी एक इमाम से लिहाज़ा ये अमल बिद्दत है.

अक़्ल की बात है ईद का दिन ख़ुशी का दिन होता है मज़े करने का दिन होता है.

और कब्र पर जाने का मकसद मौत को याद कर के फ़िक्र मन्द होना होता है.

तो ये अमल ईद के मैक्स और पैगाम से ही टकराता है. इसी लिए ईद के दिन को खास कर के कब पर जाना माना है

क्यूंकि रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कभी भी इस दिन को खास करने का हुक्म नहीं दिया और न ही खुद खास किया.

यही बात शेख इब्ने ‘उठायमीन अपने फतवे “मजमू’ फतावा इब्न ‘उठायमीन, 16/216-223” में भी कहते है

शेख इब्न ‘उठायमीन फरमाते है

“कब्र पर जाना ईद के खास दिन को मख़सूस नहीं करना चाहिए न ही जुमा को न किसी खास दिन को. ये रसूल अल्लाह से साबित है

की रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने रात को कब्र की ज़ियारत की जैसे की आयेशा (r.a.) रिवायत करती है

सहीह मुस्लिम के हदीथ में और रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया

था, “कब्र पे जाओ क्युकी ये तुम्हे आख़िरत की याद दिलाएगी”.

कब्र पर जाना एक इबादत है और कोई भी इबादत तब तक क़ुबूल नहीं होती जब तक के वो शरई तरीके से न हो.

रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कभी भी ईद का दिन खास नहीं किया कब्र पर जाने के लिए इसीलिए हमें भी नहीं करना चाइये.”

Follow Us

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace  को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.