मौत के बाद फायदा देने वाले आमाल

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Maut ke baad fayede dene wale amaal
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Maut ke baad fayede dene wale amaal

मौत के बाद फायदा देने वाले आमाल

मौत के बाद सिर्फ वही चीज़े फायदा दे सकती है जो अल्लाह ने अपने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को बताया

और हमारे रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें बताया.

कुछ लोग तरह तरह के अमल जो की अक्सर हिन्दुओ से ली गयी है वो चीज़े करते है

जैसे तीजा, चलसी, वगैरा वगैरा. जब की उनको खुद पता होता है की गैर मुस्लिमो की मुशाहबत (कॉपी) करना मना है.

. रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया

की जब कोई इंसान मरता है तो उसके नेक आमाल बंद कर दिए जाते है सिवाए तीन तरह के:

(1) सदका इ जरिया (अल्लाह के राह में लगाया हुआ हमारा माल जो लोगो को फायदा पोहचा रहा हो)

(2) जो इल्म लोगो को सिखाया हो वो उससे फायदा उठा रा हो

(3) नेक औलाद जो उसके लिए दुआ करे.

सबसे अहम् चीज़ जो मुर्दे को फायदा पोहचा सकता है वो ये है

की उसके नेक औलाद उसके लिए दुआ करे खास तौर पर उनकी मगफिरत के लिए और दूसरी दुआए भी.

रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया

”एक शख्स के जन्नत में दरजात बुलन्द होंगे , फिर वो पूछेगा की ये कैसे हुआ,

फिर उससे कहा जायेगा तुम्हारे औलाद की मगफिरत की दुआए के वजह से जो वो तुम्हारे लिए करता है.

2. अगर कोई औलाद कोई नेकी का काम करता है तो खुद-बखुद उस के वालेदैन को उसका सवाब पोहचा करता है

उस के वालेदैन हयात से हो या फौत हो गए हो.

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया,

“बेशक सबसे पाकीज़ा चीज़ जो इंसान खता है वो उसके हाथो की कमाई है और उस की औलाद भी उसकी कमाई (earning) है.

सुनें अबू दावूद, हदीस-3528, सहीह (अल-अल्बानी).

3. और अगर उसका औलाद उस के लिए कोई सदक़ा, खैरात या जो भी नेक आमाल करता है तो उसका सवाब उसके वालेदैन को पोहचता रहता है,

लेकिन एक बात तालिब ए गौर है की निचे दी हुई हदीथ और इस के जैसी जितनी भी अहदिथ है वो सिर्फ औलाद का ज़िक्र करती है

इस लिए सिर्फ वालेदैन को औलाद के आमाल काम आएंगे किसी पैसे दिए हुए मौलवी या किसी रिश्तेदार के आमाल नहीं.

एक शख्स ने रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से कहा “ मेरी वालिदा का इंतेक़ाल हो गया है, और अगर वो बोल पति तो उन्होंने कुछ सदक़ह किया

होता. तो अगर मै ने उनकी तरफ से कुछ सदक़े में दे दू तो क्या उन्हें सवाब मिलेगा?” रसूल अल्लाह ने फ़रमाया “है”.

4. जो बाकी दूसरे लोग (जैसे दोस्त, रिश्तेदार या कोई और) कर सकते है वो है मय्यत के हक़ में मगफिरत की दुआ, अल्लाह पाक फरमाते है,

और उनके लिए भी जो बाद में ए और दुआ करते है की ऐ हमारे रब, हमारे और हमारे भाइयो को जो हमसे पहले ईमान लाये है

उनको माफ़ फार्मा और मोमिनो की तरफ से हमारे दिल में कीना और हसद न पैदा होने दे. ए हमारे रब तू बहुत शफकत करने वाला है, महेरबान है.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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