नमाज़ के आगे से गुजरने का गुनाह:

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Sutrah Ka Bayan Aur Namaz Ke Aage Se Guzarne Ka Gunah
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Sutrah Ka Bayan Aur Namaz Ke Aage Se Guzarne Ka Gunah

नमाज़ के आगे से गुजरने का गुनाह:

रसूल (अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:

‘अगर नमाज़ी के सामने से गुजरने वाले को गुजरने की सजा मालूम हो जाए तो इसे एक क़दम आगे बढ़ने की बजाए 40 तक वहीं खड़े रहना पसंद हो.

अबू अन नज़र رضي الله عنه ने कहा के मुझे याद नहीं रहा के बसर बिन सईद ने 40 दिन कहे या 40 महीने या 40 साल.’

(बुखारी: अल सलाह 510 – मुस्लिम: अल सलाह 507)

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:

‘तुम नमाज़ अदा करते वक़्त आगे सुतरा खड़ा करो और अगर कोई शक़्स सुतरा के अंदर (यानी नमाज़ी और सतरह के दरमियान) से गुज़ारना चाहे तो इसकी मज़हमत करो और इसको आगे से न गुज़रने दो.

अगर वो न मने तो इस से लड़ाई करो. बेशक वो शैतान ही.’

(बुखारी: अल सलाह 50 – मुस्लिम 505)

एक रिवायत में है के दोबार तो इसको हाथ से रोका अगर वो न रुके तो इस से हाथ पाई से भी गरीज़ न किया जाए (क्योँकि) वो शैतान है.

(इब्ने खुज़ैमा 818) और इन्होंने सहीह कहा.

नबी ए रहमत सुतरा और अपने दरमियान में से किसी चीज़ को गुजरने न देते थे. एक बार आप नमाज़ अदा फार्मा रहे थे

के एक बकरी दौड़ती हुई आई वो  आपके आगे से गुज़ारना चाहती थी.

आप ने अपने बातें ए मुबारक (T: stomach) दीवार के साथ लगा दिया तो बकरी को सुतरा के पीछे से गुज़ारना पड़ा.

(इब्ने खुज़ैमा 827)

इमाम हाकिम और इमाम ज़हबी ने सहीह कहा. रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की जा-नमाज़ और दीवार के दरमियान एक बकरी के गुजरने का फासला होता था.

(बुखारी: अल सलाह 496 – मुस्लिम 508)

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:

‘अगर नमाज़ी के आगे ओंठ के पलायन की पिछली लकड़ी जितना लम्बा सुतरा न हो और बालिग़ औरत, गधा या सियाह कुत्ता आगे से गुज़र जाए तो नमाज़ टूट जाती है. और सियाह कुत्ता शैतान है.’

(मुस्लिम: अल सलाह 510)

आयेशा सिद्दीक़ा رضي الله عنه से रिवयात है के वो रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के आगे सोती थी. मेरे पाऊँ आप के सामने होते थे.

जब आप सज्दा करते तो मैं आपने पाऊँ समेट लेती और जिस वक़्त आप खड़े होते तो पाऊँ फैला देती. उन दिनों घरों में चिराग नहीं होते थे.

(बुखारी: अल सलाह 513 – मुस्लिम: अल सलाह 512)

मालूम हुआ के गुज़ारना तू मना है. लेकिन अगर आगे कोई लेता होतो कोई हर्ज नहीं.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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