वालिदैन के साथ हुस्न ए सुलूक

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WALIDAIN KE SATH HUSN E SULOOK

वालिदैन के साथ हुस्न ए सुलूक

अल्हम्दुलिल्लाह इस्लाम में वालिदैन के भी हुकूक है. अल्लाह पाक क़ुरान में अपने हुकूक के फ़ौरन बाद वालिदैन के हुकूक की बात करते है. अल्लाह पाक फरमाते है

और तुम्हारे रब का फरमान है की उसकी इबादत में किसी को शरीक न करना और जब तुम्हारे माँ बाप मे से एक या दोनों बूढी उम्र पर पहोच जाये

तब उन्हें उफ़ तक न कहना और न ही उनसे झिराग के बात करना लेकिन उनसे हुस्ने सुलूल के साथ पेश आना और ये दुआ करना की ऐ हमारे रब हमारे माँ बाप पर रहें कर जिस तरह बचपन में हमारे माँ बाप ने हम पर रहम किया था.

(क़ुरान,चैप्टर-17, आयात-23-24.)

“और अल्लाह तआला की इबादत करो और उस के साथ किसी को शरीक न करो और माँ बाप के साथ हुस्न ए सुलूक करो”

(सौराह निसा, आयात-36.)

वालिदैन को हर हाल में राज़ी रखने का हुक्म:

हज़रात अब्दुल्लाह बिन अम्र (r.a.) कहते है की रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:

“रब्ब की रज़ा वालिदैन की रज़ा में है और अल्लाह का गुस्सा वालिदैन के गुस्से में है” (हसन).

(सुनन तिर्मिज़ी (भाग. 4, किताब 1, हदीस 1899)

वालिदैन की न-फ़रमानी कबीरा गुनाह है:

हज़रात अब्दुलरहमान बिन आबि बकर (ra) अपने बाप से रिवायत करते है की रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:

“क्या मैं तुम्हे कबीरा गुनाहो में से सब से बारे गुनाह न बताओ?”सहाबा करम (ra) ने अर्ज़ किया:

“क्यों नहीं या रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! ज़रूर बताये

“रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:

“अल्लाह के साथ शिर्क करना और वालिदैन की न -फ़रमानी करना.”

(तिर्मिज़ी हदीस नo. 1550.

वालिदैन को नाराज़ करने वाले के लिए रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने बाद-दुआ फ़रमाई:

हज़रात अबू हुरैरा (r.a.) नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से रिवायत करते है की रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया:

“उस शख्स की नाक खाक आलूद हो ‘ रुस्वा और ज़लील हो ‘ हलाकत हो जिस ने वालिदैन में से किसी 1 को या दोनों को बुढ़ापे में पाया और फिर (इन को राज़ी कर के) जन्नत में दाखिल न हो सका. ”

(सहीह मुस्लिम (बुक 32, हदीस 6189)

वालिद जन्नत का बहेतरीन दरवाज़ा है:

हज़रात अबू दर्द रज़ि ने नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को फरमाते हुए सुना के वालिद जन्नत के दरवाज़ों में से बिच का दरवाज़ा है

(जन्नत का बेहतरीन रास्ता) तो यह तुम्हारे ऊपर है की इसका फायदा उठाओ या नहीं.

(इब्न मजह (भाग 5, किताब 33, हदीस 3663)

(सुनन तिर्मिज़ी (भाग. 4, किताब 1, हदीस 1900)

जन्नत माँ के क़दमों तले है:

हज़रात मुआवियाह इब्न जाहिमह से रिवायत है के वह नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की खिदमत में हाज़िर हुई और अर्ज़ किया:

“या रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! मै ने जिहाद का इरादा किया है और आप से मश्वरा लेने के लिए हाजी हुआ हो?”

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया:

“क्या तेरी वालिदा ज़िंदा है?“ इस ने अर्ज़ किया “हां! आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया: “फिर उन की खिदमत करो, ‘ जन्नत उनके क़दमों के निचे है”.

(मुसनद अहमद (हदीस 15110)

और इसी पैगाम को सुनें नसाई में भी दोहराया गया है

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फरमाते है “जन्नत माँ के कदमो के निचे है”

(सुनें नसाई, किताब-उल-जिहा द, च .6 हदीस 3106.

बाप के मुकाबले में माँ 3 दर्जे ज़याद हुस्ने सुलूक की मुस्तहेक़ है:

हज़रात अबू हुरैरा (r.a.) से रिवायत है के 1 आदमी रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की खिदमत में हाज़िर हुआ और अर्ज़ किया:

“या रसूल (अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मेरे हुस्ने सुलूक का सब से ज़्यादा हक़ दार कौन है?“

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया:

“तेरी माँ“

इस ने दोबारा अर्ज़ किया :

“फिर कौन?”

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया:

“तेरी माँ

इस ने तीसरी बार अर्ज़ किया:

“फिर कौन?”

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया:

तेरी माँ

इसने चौथी बार पूछा :

फिर कौन?”

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:

“तेरा बाप”.

(सहीह बुखारी किताबुल अदब, हदीस 2)

वालिदैन की दुआए

अबू हुरैरा (r.a.) रिवायत करते है की रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया की तीन (3) तरह की दुआए बिना कोई शक के कुबूल होती है

वो है एक मज़लूम की दुआ, जो सफर पे है उसकी दुआए और वालिदैन की दुआए उनके औलाद के लिए.

अदब उल-मुफरद (किताब 1, हदीस 32)

अदब उल-मुफरद (किताब 1, हदीस 481)

वालिदैन के इन्तेकाल के बाद उनके लिए दुआए करना:

रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया की जब कोई इंसान मरता है तो उसके नेक आमाल बंद कर दिए जाते है सिवाए तीन तरह के:

(1) सदका ए जरिया (अल्लाह के राह में लगाया हुआ हमारा माल जो लोगो को फायदा पोहचा रहा हो)

(2) जो इल्म लोगो को सिखाया हो वो उससे फायदा उठा रा हो

(3) नेक औलाद जो उसके लिए दुआ करे .

रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया

“एक शख्स के जन्नत में दरजात बुलंद होंगे ,

फिर वो पूछेगा की ये कैसे हुआ,

फिर उससे कहा जायेगा तुम्हारे औलाद की मगफिरत की दुआए के वजह से जो वो तुम्हारे लिए करता है.”

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