वित्र के बाद के नवाफिल-एक इल्मी बात

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Witr Ke Baad Ke Nawafil- Ek Ilmi Baat
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Witr Ke Baad Ke Nawafil- Ek Ilmi Baat

वित्र के बाद के नवाफिल-एक इल्मी बात

अगरचे बाज़ रिवायात में वित्र को रात की आखरी नमाज़ क़रार दिया गया है

जैसा के हज़रात इब्न ए उम्र (r.a.) से मरवी है के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया,”वित्र को अपनी रात की आखरी नमाज़ बनाओ.”

(सहीह अल बुखारी 998.)

लेकिन दर्ज जेल सहीह हदीस से मालूम होता है के ये हुक्म महज़ इस्तेहज़ाब के लिए है मतलब मुस्तहब है लेकिन फारद नहीं है

और आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) वित्र के बाद भी दो रकअत अदा फार्मा लिया करते थे:

हज़रात उम्म ए सलमा (ra.) से मरवी है के “रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) वित्र के बाद 2 रकअतें पढ़ा करते थे.

(तिर्मिज़ी 292, इब्ने मजह 1195.)

इस लिए अगर कोई शख्स वित्र पढ़ कर सजाये फिर के पिछले पेहेर उठ कर नवाफिल अदा करे तो वो आखिर में दुबारा वित्र नहीं पढ़ेगा क्यों की हज़रात तलक बिन अली से मरवी है

के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया, “एक रात में दो वित्र नहीं है”.

(तिर्मिज़ी 391, अबू दावूद 1439, सनद सहीह.)

इमाम अहमद, इमाम शाफ़ई, इमाम मालिक, इमाम सूरी, इमाम इब्ने मुबारक और इमाम इब्ने हज़म का यही वक़्फ़ है और यही राजेह और बरहक़ है.

(तोहफा अल हौज़ी 588/2, नील अल- तार 259/2, अलमहली बिल आथार 91/2.)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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