आशूरा रोज़े की फ़ज़ीलत दलील के साथ

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ASHOORA ROZE KI FAZILAT DALEEL KE SATH
Allah
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ASHOORA ROZE KI FAZILAT DALEEL KE SATH

आशूरा रोज़े की फ़ज़ीलत दलील के साथ

पहली फ़ज़ीलत : ये रोज़ा पिछले साल के साबिक़ा गुनाह माफ़ करता है.

अबू क़तादा रदी अल्लाहु अन्हु से रिवायत है:

नबी-ए-रहमत (ﷺ) से आशूरा के दिन के रोज़े के बारे में पूछा तो:आप (ﷺ) ने फ़रमाया “ये गुज़रे हुए साल के (सग़ीराह) गुनाहों का कफ़्फ़ारा है.”

(सहीह-मुस्लिम, किताब अस सियाम, हदीस: 1162)

सुब्हानल्लाह,

अगर कोई शख्स इस रोज़े को ला परवाही से छोड़ दे तो सोचिये उसका कितना नुकसान होगा.

दूसरी फ़ज़ीलत: अब्दुल्लाह इब्न अब्बास रज़ि अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं: “मैंने आप (ﷺ) को आशूरा के रोज़े और रमजान के रोज़ों के सिवा और किसी दिनों को अफ़ज़ल जान के क़स्द (यानी तलाश) करते हुए नहीं देखा.”

(सहीह बुखारी, किताब अस सियाम, हदीस: 2006)

तीसरी फ़ज़ीलत: अबू हुरैरा रज़ि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है:

नबी-ए-रहमत (ﷺ) ने फ़रमाया:

“रमजान के बाद सबसे बेहतर और अफ़ज़ल रोज़े मुहर्रम के रोज़े हैं.”

(सहीह: तिर्मिज़ी,किताब अस सौम, हदीस: 740)

अल्लाह हम सब को नेक हिदायत दे ..अमीन

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