औरतों का लिबास कैसा हो

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Ek Bohot Nek Aur Parhezgaar Aurat rehti thi..
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aurton Ka libaas kaisa Ho

औरतों का लिबास कैसा हो

अल्लाह तआला ने इन्सानों को लिबास जैसी अज़ीम नेमत अता फ़रमाई है, लिबास के ज़रिये हम अपना जिस्म छुपाते हैं,

ज़ीनत इख्तियार करते हैं और सर्दी वगैरा से अपनी हिफाज़त करते हैं.

इस्लाम के लिए कोई ख़ास क़िस्म, या कोई ख़ास हय्यत और रंग मुतय्यन नहीं किया है,

बल्कि इस को इन्सानों के मिज़ाज और उन की पसन्द पर छोड़ दिया है.

अलबत्ता लिबास के ताल्लुक़ से मर्दों और औरतों को चाँद बातें बताई हैं और कुछ हिदायत दी हैं,

यहां औरतों से ताल्लुक़ रखने वाली बातों का तज़किरा किया जारहा है.

इस्लाम ने जिस तरह दीगर अहकाम में औरतों की फितरत, उन की आदत व खसलत, उन के जज़्बे और उन के मक़ाम व मर्तबे का पूरा लिहाज़ किया है,

और उन पर सिर्फ वही ज़िम्मेदारी डाली है जो उन के मिज़ाज के मवाफ़िक़ हो और जिस को वो खूबी के साथ अंजाम दे सकती हों,

इसी तरह इस्लाम ने यहां भी उन की इज़्ज़त व शराफत, शर्म-और-हाय और उन की अस्मत-और-इफत की हिफाज़त का मुकम्मल ख़याल रखने के साथ ऐसी बातें बताई हैं

के जिन को अपना  कर औरतें शरीफ व बा इज़्ज़त बन कर पाकीज़ह ज़िन्दगी गुज़ार सकती हैं

और मुआशरे में अच्छी सीरत व अख़लाक़ और नेक किरदार की मालिक बन सकती हैं और अल्लाह के यहां बुलंद मर्तबे हासिल कर सकती हैं.

औरतों को लिबास के ताल्लुक़ से जो हिदायत दी गई हैं उन में बुनियादी बात यह है के लिबास पूरे जिस्म को छुपाने वाला हो,

चूंकि औरत का पूरा जिस्म सत्तर है, इस लिए जिस्म के किसी हिस्से को खुला रखना नाजाइज़ है.

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

जहन्नमियों के 2 ग्रुप ऐसे है जिन को मैं ने अभी तक नहीं देखा है, यानी इस का वुजूद बाद में होगा.

एक ग्रुप तो उन लोगों का है जिन के हाथों में दम की तरह कोड़े होंगे जिन से वह लोगों को नाहक़ मारेंगे और दूसरा ग्रुप उन औरतों का होगा जो बज़ाहिर कपडे पहने हुवे होंगी मगर वह दर हकीकत नंगी होंगी,

मर्दों को अपनी तरफ माइल करेंगी और खुद भी माइल होंगी, उन के सर (के बाल) बख्ती ऊँट के कहाँ की तरह होंगे, ऐसी औरतें न तो जन्नत में जाएंगी और न खुशबु पाएंगी,

हालांकि जन्नत की खुशबु इतनी इतनी इतनी मसाफ़त यानी बहुत दूर से महसूस होने लगती है.

(मुस्लिम: 5704)

एक औरत लिबास पहन कर भी नंगी हो, इस की कई सूरतें हो सकती हैं, एक यह के वह लिबास इतना बारीक हो के बदन का अंदरूनी हिस्सा नज़र आरहा हो,

दूसरी सूरत यह हो सकती है के लिबास इतना चुस्त हो के उस से बदन की बनावट ज़ाहिर हो रही हो, तीसरी सूरत यह हो सकती है के बदन के कुछ हिस्सा पर कपडा हो और कुछ हिस्सा खुला हो.

हदीस में बयान करदा सूरतों में तीनों सूरतें दाखिल हैं. इस लिए हर सूरत से तमाम औरतों को बचाना चाहिए.

इसी तरह औरतों को लिबास में काफिरों और फासिक़ों की नक़्क़ाली और उन की मुशाबेहत इख्तियार करने से बचना चाहिए और मर्दों जैसा लिबास भी नहीं पहनना चाहिए.

क्यों के रसूलुल्लाह ने ऐसी औरतों पर लानत फ़रमाई है जो

मर्दों की मुशाबेहत इख्तियार करती हैं.

(बुखारी :5885)

नीज़ औरतों को चाहिए के अपनी इस्तेताअत से ज़ियादा क़ीमत के कपडे का एहतेमाम भी न करें

और लिबास पहन कर फख्र व नुमाइश और तकल्लुफ से परहेज़ करें. क्यों के अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया:

जिस ने शोहरत का कपडा पहना, #अल्लाह तआला उस को क़यामत के दिन ज़िल्लत व रुस्वाई का कपडा पहनाएंगे.

(इब्ने माजा : 3606)

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