हिजामा- एक सुन्नत इलाज

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HIJAMA- EK SUNNAT ILAAJ

हिजामा- एक सुन्नत इलाज

कोई बीमारी ला इलाज नहीं. अल्लाह (SWT) के फज़ल से हर बीमारी का इलाज मौजूद है.

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया अल्लाह तआला ने दुनिया में कोई बीमारी ऐसी नहीं उतरी जिसकी दवा और शिफा मौजूद न हो.

(सुनें अबू दावूद, 28:3846)

हिजामा एक सुन्नत इलाज

हिजामा एक उनानी इलाज है जिस के ज़रिये जिस्म से खराब खून निकाल दिया जाता है बघिअर कोई दर्द, दवा और सीदे के

हिजामा सुन्नत ए रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और उन्ही तरीक़ा ए इलाज है.

हिजामा करवाना या लगवाना हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत है

यानी खुद आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हिजामा कराया करते और अपनी उम्मत को भी उसकी तरग़ीब भी देते.

इरशाद ए नबवी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) है “ बेहतरीन इलाज जिसे तुम करते हो हिजामा है.

(सुनें अबू दावूद 3857)0

और हिजामा में 72 बीमारियों से नजात मिलती है (TIBRAANI)

और हिजामा के लिए चाँद की 17,19,21 तरीक़ (देते) इख़्तेयार करेगा उसे हर बिमारी से नजात और शिफा होगी. इन्शा अल्लाह.

(सुनें अबू दावूद 3861 (हसन)

हज़रात इब्ने अब्बास (rz) हुज़ूर अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से रिवायत करते है,

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया

शिफा तीन चीज़ो में है,1) हिजामा के ज़रिये कट लगाने में. 2) शहद के इस्तेमाल में. 3) आग से दागने में, तुम्हें मैं अपनी उम्मत को आग के दागने से रोकता हूँ.

(सहीह अल बुखारी 5781)

हज़रात जाबिर (r.z) हुज़ूर अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से रिवायत करते है,

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया अगर तुम्हारी दवाओं में किसी दवा में शिफा है

तो हिजामा के ज़रिये कट लगाने में है, या शहद के इस्तेमाल में, या फिर आग से दागने में, (basharteke) ये दागना उस मर्ज़ को रास्त आजाये,

लेकिन मैं आग से दागने को पसंद नहीं करता.

(सहीह अल बुखारी 5783)

हज़रात अनस (rz) फरमाते है के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:

सबब से बहेतरीन दवा जिससे तुम इलाज करो वो हिजामा लगवाना है और कुस्तुल बहरी (समंदरी जड़ी बूटी) से इलाज करना है.

(सहीह अल बुखारी 5797)

हज़रात जाबिर (rz) ने हज़रात मुकानना (rz) की इयादत की और फ़रमाया के जब तक तुम हिजामा न लग वालो, मैं वापस नहीं जाऊँगा.

इसलिए के मैंने नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से सुना है के हिजामा लगवाने में शिफा है

(सहीह अल बुखारी 5797)

हज़रात समृत बिन जूंदाबब (rz) फरमाते है के हुज़ूर अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम), के पास बानी फज़र क़ाबिले का एक देहाती आया.

उस वक़्त आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)को एक हिजामा करने वाला हिजामा कर रहा था,

पास हिजामा करने वाले ने ब्लेड से कट लगाया तोव देहाती ने (ताज्जुब से) पुछा. ए अल्लाह के रसूल! यह आप किया कर रहे हो?

आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया

यह हिजामा है, यह उन सबब इलाजो से बहेतर है जो लोग इख्तियार करते है.

(रवा अन-नसाई)

हज़रात मालिक बिन सासा (rz) फर्माते है के नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया

के मेराज की रात मेरा फ़रिश्तो की जिस जमात पर भी गुज़र हुआ ,उन्होंने मुझे हिजामा से इलाज करने को कहा. (तीब्रानी)

हिजामा के ज़रिये इलाज करने से इन् बिमारिओ में फ़ायदा होता है.

(1) ख़ास तोर से सर का दर्द

(2) Dipression

(3) खंडोह का दर्द

(4) Blood pressure

(5) कान के अंदर आवाज़े आना

(6) सहर(जादू)

(7) घुटनो का दर्द टेन्शियन की वजह से सर दर्द

(8) शकीका (migraine)

(9) गुर्दो का दर्द

(10) सर में चक्कर आना

(11) कमर का दर्द

(12) फलेज

(13) थकान

(14) खून की गर्दिश को बहेतर करने के लिए

(15) पेट का दर्द

(16) सीने का दर्द

(17) खांसी

(18) मर्दाना ताक़त के लिए

(19) क़ब्ज़

(20) बी.पी

(21) टी.बी

(22) औरतों /मर्दों के पोशीदा अमराज़

(23) कैंसर

(24) दिल के अमराज़ और बहुत सी बड़ी छोटी बीमारिया जिनकी लम्ब्बी फहरिस्त है,

लेहाज़ा तमाम अमराज़ का इलाज हिजामा में मौजूद है.सुब्हान अल्लाह.

हमने यहाँ अहादीस के हवाले दिए हैं. और ये ऐसी सुन्नत है जो मिट रही है,

कुछ लोगों को इसके बारे में बिलकुल भी पता नहीं है.

हम सब को इस सुन्नत को फिर से आम करना है. इसकी हम सब को कोशिश करनी है इन्शाअल्लाह.

तिर्मिज़ी हदीस 59 में लिखा है जिसने मेरी सुन्नाह से मुहब्बत की उसने मुझसे मुहब्बत की और जिसने मुझसे मुहब्बत की वो मेरे साथ रहेगा जन्नत में.

और ये देखिये के चीन वालो ने इस सुन्नत को “चिने से थेरेपी” नाम दे कर इस से लोगों का इलाज कर रहे है

ज़्यादा से ज़्यादा इस पैगाम को आम करने की कोशिश करे.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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