किया ज़ाकर (Man private part) को छूने से वुज़ू टूट जाता है?

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keya zakar ( Man private part) ko chune se wuzu toot jaata hai ?

किया ज़ाकर (Man private part) को छूने से वुज़ू टूट जाता है?

दोस्तों तमाम अहले तौहीद के नज़दीक ज़ाकर (Man private part) को छूने से वुज़ू टूट जाता है. nd इसकी दलील भी अहादीस रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) में मौजूद है रिवायत कुछ इस तरह है.

وَعَنْ بُسْرَةَ بِنْتِ صَفْوَانَ رَضِيَ اَللَّهُ عَنْهَا; { أَنَّ رَسُولَ اَللَّهِ – صلى الله عليه وسلم -قَالَ: “مَنْ مَسَّ ذَكَرَهُ فَلْيَتَوَضَّأْ” } أَخْرَجَهُ اَلْخَمْسَةُ, وَصَحَّحَهُ اَلتِّرْمِذِيُّ, وَابْنُ حِبَّان َ (92) .
1 – صحيح. رواه أبو داود (181)، والنسائي (100)، والترمذي (82)، وابن ماجه (479)، وأحمد (6 /406)، وابن حبان (212 موارد). وقد أعل هذا الحديث بما لا يقدح، كما هو مبين “بالأصل”.

तर्जुमा:- हज़रात बुशर बिन्ते सफ़वान (r.a) से मरवी है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया

जिस शख्स ने अपने ज़ाकर को छुवा उसे चाहिए के वो वुज़ू करे.

इस रिवायत को इमाम तिर्मिज़ी और इमाम इब्ने हिब्बान ने सही कहा है, और इमाम बुखारी (rh) की यह राय है की इस बाब में यह हदीस सब से सही हदीस है.

अब आते है फ़िक़ह हनफ़ी की तरफ फ़िक़ह हनफ़ी पूरी के पूरी क़ुरआन और हदीस के खिलाफ अमल करती है

फ़िक़ह हनफ़ी के नज़दीक ज़ाकर को छूने से वुज़ू नाइ टूट ता और अपना मज़हब सही साबित करने के लिए यदि छोटी का जोर लगते है और दलील में ये हदीस पेश करते है. हदीस कुछ इस तरह है.

وَعَنْ طَلْقِ بْنِ عَلِيٍّ – رضى الله عنه – قَالَ: { قَالَ رَجُلٌ: مَسَسْتُ ذَكَرِي أَوْ قَالَ اَلرَّجُلُ يَمَسُّ ذَكَرَهُ فِي اَلصَّلَاةِ, أَعَلَيْهِ وُضُوءٍ ? فَقَالَ اَلنَّبِيُّ – صلى الله عليه وسلم -“لَا, إِنَّمَا هُوَ بَضْعَةٌ مِنْكَ } أَخْرَجَهُ اَلْخَمْسَةُ,

وَصَحَّحَهُ اِبْنُ حِبَّان َ (91) .
2 – حسن. رواه أبو داود (182 و 183)، والنسائي (101)، والترمذي (85)، وابن ماجه (483)، وأحمد (43)، وابن حبان (207 موارد). ولكن ينبغي معرفة أن هذا الحديث منسوخ، إذ قال ابن حزم

في “المحلي” (139) ولنعم ما قال: “هذا الخبر -خبر طلق- صحيح إلا أنهم لا حجة لهم فيه لوجوه: أحدها: أن هذا الخبر موافق لما كان الناس عليه قبل ورود الأمر بالوضوء من مس الفرج، هذا لا شك فيه،

فإذا هو كذلك فحكمه منسوخ يقينا حين أمر رسول الله صلى الله عليه وسلم بالوضوء من مس الفرج، ولا يحل ترك ما تيقن أنه ناسخ، والأخذ بما تيقن أنه منسوخ. وثانيها: أن كلامه عليه السلام: “هل هو إلا

بضعة منك؟” دليل بين على أنه كان قبل الأمر بالوضوء منه؛ لأنه لو كان بعده لم يقل عليه السلام هذا الكلام، بل كان يبين أن الأمر بذلك قد نسخ، وقوله هذا يدل على أنه لم يكن سلف فيه حكم أصلا، وأنه

كسائر الأعضاء” .

तर्जुमा:- तलाक़ बिन अली (r.a) ने बयान किया

की एक सख्स ने कहा मैंने अपनी शर्मगाह को हाथ लगाया है या यूँ कहा की एक आदमी नमाज़ में अपनी शर्मगाह को हाथ लगता है तो क्या उसे नये सिरे से वुज़ू करना चाहिए?

तो नबी ए करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने नहीं वह तो तेरे अपने जिस्म का एक टुकड़ा है.

अब आप देखेंगे की यहाँ ये दो हदीस एक दूसरे से टकरा रही है

तो उलेमाओ ने इसमें ततबीक़ की सूरत इख़्तियार की आइये हम देखते इस मसले में सलफ सालेहीन की क्या राय है.

1.
ہےـ حضرت عمر ‘ حضرت ابن عمر’ حضرت ابو ہريرہ’ ابن عباس’ حضرت سعد بن ابی وقاص رضی ﷲ عنھم’ امام عطاء’ امام زہری’ حضرت سعيد بن مسيّب’ امام مجاہد’ امام آبان بن عشمان’

حضرت سليمان بن ليسار’ امام شافعی’ امام احمد’ � امام مالک اور امام اسحاق رحمہم ﷲ کے نزدیک آلہ تناسل کو چھونے سے وضوء ٹوٹ جاتا ہے ـ ان کی دليل حدیثِ بسرہ ہےـ
2. ابن حزم ؒ فرماتے ہے وضوء ٹوٹ جاتا ہے اور حدیثِ طلق منسوخ ہےـ (المحلی-٢٣٩/١)
3. صديق حسن جاںؒ فرماتے ہے ـ حق بات يہی ہے کے وضوء ٹوٹ جاتا ہےـ – ((الروضة الندية- ١/١٠٢)
4. راجح — الہ تناسل کو چھو نے سے وضوء ٹوٹ جاتا ہے بشرطیکہ بغیر کسی کپٹرے يا پردے وغیرہ کے چھوا جائے ـ (نيل الأو طار(٣٠٤٣١) تحفة الاٴ حوذی ((١/٢٨٢)
جيسا کے حضرت ابو ہريرہ رضی ﷲ عنھم سے مروی ہے کے نبی ﷺ نے فرمایا جو شخص اپنے آلہ تناسل کو بغير کسی پردے کے چھوے تو اس پر وضوء واجب ہےـ” مسند شافعی کی روایت

مي يہ لفاظ ہیں ( إذ أفضی أحد کم إلی ذکرہ ليس بينھا و بينه شیٔ فليتو ضأ) — (صحیح : أحمد ((٢/٣٣٣) طحاری(١/٧٤) الأم الشافعی (٣٤٣١) مسند شافعی ((١/٣٤) – ابن حبان ((٢١٠
شيج حازم علی قاضی نے اسے صحیح کہا ہے-(التعليق علی سبل السلام ((١٣٩٣١)

इस हदीस से साबित होता है की बगैर कपडे के ज़ाकर को छूने से वुज़ू टूट जाता है और कपडे की आद में चुवे तो नाइ टूटा.

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