तावीज़ से शिफा कैसे मिल जाती है

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TAWEEZ SE SHIFA KAISE MIL JATI HAI
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TAWEEZ SE SHIFA KAISE MIL JATI HAI

तावीज़ से शिफा कैसे मिल जाती है

अल्हम्दुलिल्लाह.

आज मुस्लिम उम्माह के कुछ लोग का ये हाल है

की वो नफा पहले देखते है और दीन को बाद में अगर उन्हें किसी चीज़ से फायदा मिल रही हो तो वो हरगिज़ ये नहीं देखेंगे की उस के बारे मे शरिया क्या कहती है

और अगर कभी केदार देख भी लिया तो फतवा शॉपिंग करते है,

मतलब कुछ मोलविओ से पूछते है और जो मौलवी उन के हक़ में फतवा देता है उसे क़ुबूल कर लेते है और बाकी सबको गुमराह करार दे देते है

और खुद आशिक़ ए रसूल का लॉकेट पहन लेते है. और अगर आप किताब और सुन्नाह का इल्म रखते है तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है क्युकी रसूल अल्लाह (ﷺ) ये फार्मा कर गए थे:

रसूल अल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया तुम ज़रूर अपने से पहले लोगों के क़दम बा क़दम पैरवी करोगे हत्ता के अगर वह गोह (छिपकली के मुशाबा रेंगने वाला एक जानवर) के सुराख में गुसें होंगे और तुम भी इस में दाखिल होंगे.

अर्ज़ किया गया: या रसूलल्लाह! क्या इनसे यहूद और नसारा मुराद हैं?

रसूल अल्लाह (ﷺ) ने इरशाद फ़रमाया: (अगर ये नहीं) तो और कौन?

(बुखारी, 1397; मुस्लिम, 4822)

ये हदीस इसलिए पेश की है क्युकी यहूद और नसारा भी इसी तरह के अमल करते थे. वो अपने आलिमो की बात को अल्लाह की बात से ज़्यादा दर्जा देते थे. अल्लाह (swt) फरमाते है

क़ुरआन इन लोगों ने अल्लाह को चोर कर अपने आलिमों और दरविशों को अपना रब बनाया है

और मरियम के बेटे मसीह को हालांके उन्हें सिर्फ एक अकेले अल्लाह ही की इबादत का हुकुम दिया गया था

जिस के सिवा कोई माबूद नहीं वह पाक है उन के शरीक मुक़र्रर करने से.”

(तौबा (9):31)

आज यही हाल मुस्लिम उम्माह के कुछ लोगो का है, वो अपने लिए हलाल कर लेते जो उन्हें नफा दे वो चाहे किसी भी शकल में हो जैसे सूद तावीज़, गैंडे, वगैरा. और इसी की शकल है

तावीज़ जिसे कुछ लोगो ने हलाल समझ लिया है जब की इस पर बहुत सख्त हदीस है जिसका आगे होगा इन्शाअल्लाह.

(तावीज़ के बारे मे डिटेल से पढ़ने के लिए ये चेक करे) लेकिन फिर भी लोग कहते है की अगर ये गलत है तो इससे शिफा कैसे हो जाता है.

तो उन बेचारो को ये पता होना चाहिए की अल्लाह तो उन्हें भी रिज़्क़ और नफा देता है जो पत्थरो से मांगते है,

तो क्या अब हम पठारों से मांगना शुरू कर दे, नौज़बिल्लाह!! अब रही बात की तावीज़ से कैसे शिफा मिलती है

तो ये सवाल का जवाब भी उन्हें मिल जाता अगर वो क़ुरान और सुन्नाह का इल्म रखते लेकिन इन लोग को क़ुरआन और सुन्नाह का इल्म कैसे हो जब की ये दीन को मौलवी साहब का हलवा समझते है

की जो मौलवी साहब ने कहा बस वही शरीअत हो गई, दीन की समझ उनको नसीब होती है जो लोग कोशिश करते है. लेकिन इन्हे हलवा खाने से फुर्सत मिले तब न ये कोशिश करे.

तावीज़ से कैसे शिफा हो जाता है दर्ज जेल हदीस में ज़िक्र है:

इब्न मसूद की बीवी ज़ैनब (.r.a.) रिवायत करती है की अब्दुल्लाह इब्न मसूद ने उनके गले में एक धागा देखा और पूछा की ये क्या है?

उन्होंने फ़रमाया, “ये एक धागा है जिसमे मेरे लिए रुक्या किया गया है. उन्होंने उस धागे को उनके गले से तोड़ दिया और कहा: ‘आप’, इब्न मसूद की खानदान को शिर्क की कोई ज़रूरत नहीं है.

बेशक, मैंने रसूल अल्लाह को ये कहते सुना की के दाम (वो दाम जिस में शिरकया अल्फ़ाज़ हूँ) तावीज़ और तवीला ये सब शिर्क हैं.

ज़ैनब ने फ़रमाया, “आप ये क्या कहते है? मेरी आँखों में तशनज (aithan) था इसलिए मैं फुला फुला यहूदी आदमी के पास गई थी और जब भी वो रुकए से इलाज करता, दर्द काम हो जाता.

इब्न मसूद (r.a.) ने फ़रमाया: ये शैतान का काम है. शैतान अपने हाथ से चुभाता है और जब इस पर रुक्याह किया जाता है,

वो अपने हाथ को हटा लेता है. ये तुम्हारे लिए काफी होगा अगर तुम वो कहो जो रसूक अल्लाह कहा करते थे

‘अथहिब ईल बस, रब्ब अन-नस, वाशफी अंत यश-शफी, ला शिफा इल्ला शिफा उक, शिफॉन ला युग़दीरु सकामा’

तर्जुमा:- ए इंसानो के रब दूर कर दे ये बीमारी और शिफा दे तू ही शिफा देने वाला है, नहीं कोई शिफा तेरी शिफा के सिवा और (ऐसी शिफा जिससे) कोई तकलीफ बाकि न रहे.

[अबू दावूद, हदीस-3883; जजद हसन ब्य अल-अल्बानी (मिश्कत उल-मासबीह नo. 4552).

इस हदीस से हमें ये पता चलता है की तावीज़ पहनना शिर्क है जैसे के खुद इब्न मसूद (r.a.) ने फ़रमाया है

ऊपर और साथ ही ये भी पता चला की तावीज़ से शिफा कैसे मिल जाती है

और अगर हम पर बीमारी का असर हो जाये तो क्या पढ़ा जै. पर अफ़सोस आज के कुछ मुस्लिम्स अल्लाह से से ज़्यादा धागे, कब्र और मुर्दो पर तवक्कल रखते है.

अल्लाह से दुआ है की वो हमें शिर्क से बचाए और तौहीद के ऊपर हमें मौत अता करे. आमीन.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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