तौहीद की फ़ज़ीलत

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TAWHEED KI FAZILAT
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TAWHEED KI FAZILAT

तौहीद की फ़ज़ीलत

अब्दुल्लाह (b. उम्र) रज़ि अल्लाह अन्हा रिवायत करते हैं की रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को तीन चीज़े दी गयी थी (मेराज वाली रात): उन्हें पांच नमाज़े दी गई थी,

उन्हें सौराह बकरा की इख़्तितामि (आखरी) आयात दी गई थी,

और उनकी उम्मत के उन लोगो को संगीन गुनाहो की माफ़ी दी गई थी जो अल्लाह के साथ किसी को शरीक नहीं करते.

(सहीह मुस्लिम, 173.)

हज़रात अबू हुरैरा रज़ि अल्लाह अन्हा कहते हैं रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया,

हर नबी के लिए एक दुआ ऐसी है जो ज़रूर क़बूल होती है तमाम अम्बिया ने वह दुआ दुनिया मैं ही मांग ली,

लेकिन मैं ने अपनी दुआ क़यामत के दिन अपनी उम्मत की शफ़ाअत के लिए मेहफ़ूज़ कर रखी है,

मेरी शफ़ाअत इन्शा अल्लाह हर उस शख्स के लिए होगी जो इस हाल मैं मरा के उसने किसी को अल्लाह के साथ शरीक नहीं किया.

(सहीह मुस्लिम, किताब अल-ईमान, हदीस 399.)

अल्लाह हम सबको रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शफ़ाअत नसीब फरमाए, आमीन

रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:

‘जिस मुसलमान के जनाज़ा में ऐसे 40 आदमी शामिल हो जो अल्लाह के साथ शिर्क न करते हों तो अल्लाह तआला इस (मैय्यत के हक़) में इनकी सिफारिश क़ुबूल करता है’

(सहीह मुस्लिम: अल जनाइज़, हदीस- 948.)

हज़रात अनस बिन मालिक (R.A.) कहते हैं मैंने रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को फरमाते हुए सुना है.

अल्लाह फरमाता है , ऐ इब्ने-आदम तू जब तक मुझे पुकारता रहेगा और मुझ से बख्शीश की उम्मीद रखेगा मैं तुझ से सरज़द होने वाला हर गुनाह बख्शता रहूँगा,

ऐ इब्ने-आदम मुझे कोइ परवाह नहीं अगर तुम्हारे गुनाह आसमान किनारे तक पहुँच जाएं और तू मुझ से बख्शीश तालाब करे तो मैं तुझे बख्श दूंगा,

ऐ इब्ने-आदम मुझे परवाह नहीं तू रोये ज़मीन के बराबर गुनाह लेकर आये और मुझ से इस हाल मैं मिले के किसी को मेरे साथ शरीक न किया हो तो मैं रोये ज़मीन के बराबर ही तुम्हे मग़फ़िरत अता करूँगा

(यानी सारे गुनाह माफ़ कर दूंगा) .

जमीअत-तिर्मिज़ी,

सुब्हान अल्लाह हमारा अल्लाह कितना रहीम है अपने रहमत से गुनाहगार बन्दे को बख्श देता है,

काश हमें अल्लाह (SWT) से मांगना तो आजये बस वही दुआओं को और हमारी पुकार को सुनने वाला है उसके सिवा कोइ और नहीं. और साथ में ये भी गौर करने वाली बात है

की एक सहीह रिवायत (हदीस) के मुताबिक गैरुल्लाह को पुकारना अल्लाह के साथ शरीक करना है

तो हमें सिर्फ और सिर्फ अल्लाह को पुकारना चाहिए. अल्लाह के सिवा कोई नहीं है जो हमारी मुश्किलों को दूर कर सकता है या हमारी ज़रा सी भी मदद कर सकता है.

अल्लाह से दुआ है की हमें उन लोगो में शुमार करे जो अल्लाह के साथ शिर्क नहीं करते. आमीन.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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