कबर में सवाल जवाब और अज़ाब-ए-कबर का बयान

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KABR ME SAWAL JAWAB AUR AZAB-E-KABAR KA BAYAN
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KABR ME SAWAL JAWAB AUR AZAB-E-KABAR KA BAYAN

कबर में सवाल जवाब और अज़ाब-ए-कबर का बयान

अल-बारे’ (रज़ि अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है,

इन्हों ने कहा हम रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ एक अंसारी के जनाज़े में गए हम कबर के पास पहुंचे तो अभी लेहेद (कबर) तैयार नहीं हुई थी

रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) बैठ गए और हम भी रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ बैठ गए. गोया की हमारे सराओं पर परिंदे हो (निहायत पुर सुकून और ख़ामोशी से बैठे थे).

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के हाथ में छड़ी थी आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) इस से ज़मीन ख़ुराईड रहे थे.

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)

ने अपना सर उठाया और फ़रमाया:

अल्लाह से कबर के अज़ाब की अमान मानगो

आपने 2-3 बार ये फ़रमाया (जुरैर की रिवायत में यहाँ इज़ाफ़ा है.)

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया जब लोग (मुर्दे को दफना कर) वापिस जाते है तो मय्यत इनके क़दमों की आहात सुनती है जब के इससे यहाँ पूछा जा रहा होता है

ए फलांह: तेरा रब कौन है.?

तेरा दीं क्या है.?

तेरा नबी कौन है.?

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया इसके पास 2 फ़रिश्ते आते है aur इसे बैठते हैं और इस से कहते हैं

तेरा रब कौन है.?

तो वह कहता है मेरा रब अल्लाह है.

फिर वो पूछते है- तेरा दिन क्या है.?

तो वह कहता है मेरा दिन इस्लाम है

फिर वह पूछते है, ये आदमी कौन है जो तुम में मबऊस किया गया था?

वो कहता है की वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) है.

फिर वो कहते है तुझे कैसे इल्म हुआ? वो कहता है मैंने अल्लाह की किताब पढ़ी है,

इस पर ईमान लाया और इसकी तज़दीक की. जुरैर की रिवायत में मज़ीद है,

यही (सवाल जवाब) मिस्दाक़ है अल्लाह के इस फरमान का (आयात है)” फिर वो दोनों रिवायत करने में मुत्तफ़िक़ है,

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया फिर आसमान से मुनादी करने वाला ऐलान करता है,

तहक़ीक़ मेरे बन्दे ने सच कहा है, इसे जन्नत का बिस्तर बिछा दो और जन्नत का लिबास पहनादो और इसके लिए जन्नत की तरफ से दरवाज़ा खोल दो ,फिर फ़रमाया जन्नत की तरफ से वहां की हवाएं, रहतें,

और खुशबु आने लगती है, और इसकी क़ब्र को इंतेहाई नज़र तक वासी कर दिया जाता है,

फिर काफिर और इसकी मौत का ज़िक्र किया और फ़रमाया: इसकी रूह इसके जिस्म में लौटाई जाती है और वो इसके पास आते है और वह इसके पास आते है

और इसे बैठते है और इसे पूछते है तेरा रब कौन है? वो कहता है के हाय अफ़सोस मुझे खबर नहीं है.

फिर वो उस से पोछते है तेरा दिन क्या है?

तो वो कहता है हाय हाय मुझे खबर नहीं,

फिर वो उस से पोछते है ये आदमी कौन है जो तुम में मबऊस किये गया था

वो कहता है के हाय हाय मुझे खबर नहीं

तो मुनादी आसमान से निदा देते है के इसने झूट कहा, इसे आग का बिस्तर बिछडो, इसे आग का लिबास पहनाडू,

और इसके लिए दोज़क की तरफ का  दरवाज़ा खोल्दो, फ़रमाया की फिर इसे जहन्नम की तरफ से तपिश और सकहत गरम हवा आने लगती है

और इस पर कबर को तंग दिया जाता है, हत्ता के इसकी फांसिलियन एक दूसरे में घूंस जाते है,

जुरैर की रिवायत में मज़ीद है फिर इस पे एक अँधा गंगा फरिश्ता मुक़र्रर कर दिया जाता है जिसके पास भारी गरज़ होता है,

अगर इसी पहाड़ पर मारा जाये तो वो (पहाड़) मट्ठी मट्ठी हो जाये, फिर वो इसे इसके साथ ऐसी चोट मरता है जिस की आवाज़ जिनो और इंसानो के अलावा मशरिक़ व मग़रिब के दरमियान मकलूक सुनती है,

और फिर वो मट्ठी (रेज़ा रेज़ा) हो जाता है,फ़रमाया फिर इसमे रूह लौटाई जाती है.

Narrated by Abu Dawood, 4753; Ahmad, 18063 – this version was narrated by him. Classed as saheeh by al-Albaani in Saheeh al-Jaami’, 1676.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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3 COMMENTS

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