अल्लाह कहा है ?

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Zulm aur gharoor ki saza
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ALLAH KAHA HAI ?

अल्लाह कहा है ?

क़ुरआन

दलील 1

ٱلرَّحۡمَـٰنُ عَلَى ٱلۡعَرۡشِ ٱسۡتَوَىٰ

अर रहमानु अलल अरशिस्तवा

रहमान अर्श पर मुस्तावि हुआ

(अल-क़ुरआन (20:05)

Reference No -01 सूरह तहा (20)–आयात-5

Reference No -02: सूरह अल-अराफ़ (07) – आयात- 54

Reference No -03: सूरह अल-फ़ुरक़ान (25)- आयात-59

Reference No -04: सूरह अर-रेड (13)–वर्स-2

Reference No -05: सूरह यूनुस (10)- वर्स-3

Reference No -06: सूरह अस-सजदह (32) – वर्स-4

दलील 2

उस की कुर्सी की वसात ने ज़मीनो आसमान को घेर रखा है

(सौराह बक़रह 02:255)

दलील 3

अल्लाह सुब्हानहुआतला ईसा अलैहिस्सलाम से कह रहा है

और तुझे अपनी जानिब उठने वाला हूँ

(सौराह आले इमरान 03:55)

नोट: अगर अल्लाह हर जगह है तो क्यों ईसा अलैहिस्सलाम को ऊपर उठा लेने को कह रहा है

दलील 4

और अपने रब से ”जो उन के ऊपर है” कप कापते रहते हैं

(सौराह अन-नहल 16:50)

इन आयतों से ये पक्का प्रोवे होता है के अल्लाह अर्श पर सात आसमानों के ऊपर है

सुन्नाह

अब्दुल्लाह इब्न अम्र इब्न अल-‘अस रिवायत करते है:

रसूल अल्लाह ने फ़रमाया: जो महेरबान है (रहमान) उसकी रहमत उन पर होती है जो दुसरो पर रहमत करते है. अगर तुम उन पर रहमत करोगे जो ज़मीन में है, तो वो (अल्लाह) तुम पर रहमत करेगा जो आसमान में है.

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَمُسَدَّدٌ، – الْمَعْنَى – قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ أَبِي قَابُوسَ، مَوْلًى لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، يَبْلُغُ بِهِ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم ‏ “‏ الرَّاحِمُونَ يَرْحَمُهُمُ الرَّحْمَنُ ارْحَمُوا أَهْلَ الأَرْضِ يَرْحَمْكُمْ مَنْ فِي السَّمَاءِ ‏”‏ ‏.‏ لَمْ يَقُلْ مُسَدَّدٌ مَوْلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَقَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏

Reference: सुनें अबी दावूद 4941; अबू-दावूद English translation: बुक 41, हदीस 4923;

जमीअत-तिर्मिज़ी English reference: Vol. 4, Book 1, Hadith 1924;Jami` at-Tirmidhi Arabic reference: Book 23, Hadith 2049)).

मुआवियाह b. अल-हाकम अल-सलामी रिवायत करते है:

मैंने कहा अल्लाह के रसूल मेरे पास एक गुलाम लड़की थी जिसे मैंने थप्पड़ मारा. ये सुनकर अल्लाह के रसूल दुखी हो गए. मैंने कहा: क्या मै उसे आज़ाद न कर दु.

उन्होंने फ़रमाया उसको मेरे पास लाओ. फिर मैंने उसे उनके पास लाया. उन्होंने पूछा उससे: अल्लाह कहा है. उसने जवाब दिया आसमान में. उन्होंने पूछा: मै कौन हूँ ?

उसने जवाब दिया: आप अल्लाह के रसूल है. उन्होंने फ़रमाया: इसे आज़ाद कर दो ये इमान वाली है.

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنِ الْحَجَّاجِ الصَّوَّافِ، حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ هِلاَلِ بْنِ أَبِي مَيْمُونَةَ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ الْحَكَمِ السُّلَمِيِّ، قَالَ قُلْتُ ‏:‏ يَا رَسُولَ اللَّهِ جَارِيَةٌ لِي صَكَكْتُهَا صَكَّةً ‏.‏ فَعَظَّمَ ذَلِكَ عَلَىَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقُلْتُ أَفَلاَ أُعْتِقُهَا قَالَ ‏:‏ ‏”‏ ائْتِنِي بِهَا ‏”‏ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ فَجِئْتُ بِهَا قَالَ ‏:‏ ‏”‏ أَيْنَ اللَّهُ ‏”‏ ‏.‏ قَالَتْ ‏:‏ فِي السَّمَاءِ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏”‏ مَنْ أَنَا ‏”‏ ‏.‏ قَالَتْ ‏:‏ أَنْتَ رَسُولُ اللَّهِ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏”‏ أَعْتِقْهَا فَإِنَّهَا مُؤْمِنَةٌ

Grade: सहीह (अल-अल्बानी) صحيح (الألباني) حكم:

(Reference: सुनें अबी दावूद 3282;सुनें अबी-दावूद English translation: Book 21, हदीस 3276)

सहाबा

अबू बक्र (r.a)

जो मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमन) की इबादत करता था तो वो मर गए है और जो अल्लाह की इबादत करता था, जो आसमानो में है, वो ज़िंदा है और कभी नहीं मरेगा.

قول أبي بكر الصديق رضي الله عنه لما مات النبي صلى الله عليه وسلم: “من كان يعبد محمدًا فإنه قد مات، ومن كان يعبد الذي في السماء فإنه حي لا يموت”.ء

References –

دارمي في الرد على المريسي (ص463 -ضمن عقائد السلف)

– ابن قدامة في إثبات صفة العلو (ص101-102، برقم70)

– الذهبي في العلو (ص62)

– بن قدامة في العلو، وأورده أيضًا في الأربعين (ص56-57، برقم33)

– للبخاري في تاريخه.وأصله في صحيح البخاري، كتاب الجنائز، باب الدخول على الميت بعد الموت (ح1242، ص244)

– ابن القيم في اجتماع الجيوش الإسلامية (ص119

उम्र इब्न खत्ताब (r.a)

लानत हो ज़मीन के बादशाहो पर आसमान के बादशाह के तरफ से, जिस दिन वो मिलेंगे.

وعن عبد الرحمن بن غُنْم قال سمعت عمر بن الخطاب رضي الله عنه يقول: “ويل لديان من في الأرض، من ديان من في السماء يوم يلقونه، إلا من أمر بالعدل، وقضى بالحق، ولم يقض على هوى، ولا على قرابة، ولا على رغب، ولا رهب، وجعل كتاب الله مرآة بين عينيه”.ء

References –

– الدارمي في الرد على المريسي (ص462، -ضمن عقائد السلف)

في الرد على الجهمية (ص104) – الدارمي

– ابن القيم في اجتماع الجيوش الإسلامية (ص120)

– الذهبي في العلو (ص63

ताबईन

Imam Abu Haneefa

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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