क्या इमाम अबू हनीफा (Rh.A) तबई थे?

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Makhlooq Ka Andhere Me Paida Hona – Hadees
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Kya Imam Abu Haneefa (Rh.A) Tabayee the

क्या इमाम अबू हनीफा (Rh.A) तबई थे?

इमाम अबू हनीफा तबई थे या तबे-तबई थे इस मुआमले में हमारे उलेमा ए दीन में इख्तिलाफ है.

लेकिन दलील के रौशनी में सहीह राये यही है की इमाम अबू हनीफा तब-तबई थे.

1 इमाम दरक़ुतनी (रहिमहुल्लाह) से सवाल किया गया की:

“أبو الحسن الدارقطني وانا اسمع عن سماع أبى حنيفة عن أنس يصح”

क्या अबू हनीफा का अनस (बिन मालिक (रदियल्लाहू अन्हु) से समा सहीह है? तो आप ने जवाब दिया:

“قال لا ولا رؤيته لم يلحق أبو حنيفة أحدا من الصحابة”

नहीं और न अबू हनीफा का अनस (रद्द) को देखना साबित है जब की अबू हनीफा ने तो किसे सहाबी से मुलाक़ात भी नहीं किये है.

तारीख-ए-बाग्दाद् (4/208, नo.1896), सनद सहीह.

मालूम हुआ खतीब बगदादी से बहुत पहले इमाम दरक़ुतनी ने इस का फैसला किया है और यह भी मालूम हुआ की वो अनस बिन मालिक (रदियल्लाहू अन्हु) वाली रिवायत को सहीह नहीं मानते था वरना यह कभी नहीं कहते.

2 अबू याहिया अब्दुल हमीद बिन अब्दुर रेहमान अल-हमनी फरमाते है:

“سمعت أبا حنيفة يقول: ما رأيت أحدًا أكذب من جابر الجعفى ولا أفضل من عطاء بن أبى ربا ح”

मैं ने अबू हनीफा को फरमाते हुए सुना: मैं ने जाबिर जो’ऑफि से ज़्यादा झूठा कोई नहीं देखा और अताह बिन अभी रबहा से ज़्यादह अफ़ज़ल किसी को नहीं देखा.

अल-ईलाल अल-सगीर लील तिर्मिज़ी (साफा नo.891, सनद हसन), अल-कामिल इब्न आदि (2/537 या 2/327, सनद हसन).

इस से साबित हुआ अबू हनीफा ने अनस बिन मालिक (रज़िअल्लाहु अन्हु) को नहीं देखा वरना वो यह कभी न फरमाते की “मैं ने आताह (तभी) से अफ़ज़ल कोई नहीं देखा”.

यह आम लोग को भी मालूम है की हर सहाबी हर तबीयी से अफ़ज़ल है और जब इमाम साहब ने खुद एलान फार्मा दिया है

की उनहु ने आताह से ज़्यादा अफ़ज़ल कोई इन्सान नहीं देखा तो साबित हो गया की उन्होने किसे सहाबी को नहीं देखा.

रही बात उस रिवायत की जिसमे ये है की इमाम अबू हनीफा (r.h.) ने अनस बिन मालिक को देखा तो उसकी वज़ाहत कुछ ऐसी है-

मुहम्मद बिन सईद ने कहा:

” حدثنا أبو الموفق سيف بن جابر قاضي واسط قال: سمعت أبا حنيفة يقول: قدم أنس بن مالك الكوفة ونزل النخع وكان يخضب بالحمرة ، قد رأيته مرارًا”

इस रिवायत का खुलासा यह है की इमाम अबू हनीफा ने कहा की मैं ने अनस बिन मालिक (रज़िअल्लाहु अन्हु) को कूफ़ा में देखा.

अक़्वाद अल-जमान फि मनाक़िब अल-नमन (49), तज़केरातुल हुफ़्फ़ाज़ (1/168, No.163), मनाक़िब-ए-अबी हनीफा (7-8).

वज़ाहत:

(a) इसका बुनयादी रवि सैयफ बिन जाबिर मजहूल उल हाल है, इस की तावशीक किसे मुस्तनद किताब में मौजूद नहीं है.

देखिए अल-तनकील बिमा फी तानीब अल-कौठरी मैं अल-अंबातीl लील माँ-लमि जिल्द 1 साफा 179

Prepared by Sheikh Zubair Ali Zai r.h. [Taken From his book Mahnama Al Hdis Hazro volume 17, page-17-19 ).

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