नेक लोगो की तारीफ़ में इज़ाफ़ा

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नेक लोगो की तारीफ़ में इज़ाफ़ा

नेक लोगो से हद से ज़्यादा मुहब्बत और तारीफ़ एक बुनयाद होती है शिर्क और बुतपरस्ती की. बुद्धा और ईसा (a.s.) की तस्वीर की इबादत बुद्धिज़्म और ईसाइयत में साफ़ मिसाल है

जो बयान करती है दौर ए हाज़िर की बुतपरस्ती जो नेक लोगो की हद से ज़्यादा मोहब्बात और तारीफ़ करने की वजह से हुई .

रसूल अल्लाह को भी ये खतरेह का अंदेशा था, इसी लिए रसूल अल्लाह ने अपने सहाबाओ और मुसलमानो को उनकी असल ज़ात से बढ़ा चढ़ा कर तारीफ़ करने को मना किया था.

उम्र इब्न खत्ताब (r.a.) रिवायत करते है के रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:

“मेरी तारीफ में इज़ाफ़ा मत करना जैसे की इसयो ने ईसा इब्न मरयम की करी थी.

बेशक मै अल्लाह का गुलाम हूँ, इसी लिए मुझे अब्दुल्लाह व रसूल अल्लाह कह कर पुकारा करो (अल्लाह का बाँदा और रसूल).”

(सहीह अल बुखारी, हदीस- 654).

चुकी उस वक़्त ये ईसाइयो और यहूदिओं का अमल था रसूलो और नेक बुज़ुर्गो की कब्र पर इबादतगाह बनाने की,

सो रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने लानत फ़रमाई थी इस अमल पर. रसूल अल्लाह ने उन लोगो को भी लानत फ़रमाई थी

जो आइंदा ऐसा अमल करेंगे इस लिए ताकि ये बात साफ़ हो जाए की इस्लाम कितना पाक-साफ़ है

इन मुशरिकाना अमलो से और ताकि लोगो को नेक बुज़ुर्गो की तारीफों में इज़ाफ़ा करने के खतरेह से आगाह किया जाए

एक मर्तबा रसूल अल्लाह की बीवी उम् सलमः (r.a.) ने रसूल अल्लाह से एक गिरजा (चर्च) जो के Ethiopia में था

उसका ज़िक्र किया जिसमे तस्वीरें थी (दीवारों पर) .ये सुन कर आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया

इन लोग ऐसे है के जब इन लोगो मेसे कोई नेक बाँदा मर जाता है,

तो ये लोग उनकी कब्र पर इबादत की जगह बना लेते है और रंग (पेंट) देते है उसको कुछ तस्वीरों से. यह अल्लाह के नज़दीक सबसे बदतरीन मख्लूक़ है.

(सहीह अल बुखारी-419, सहीह मुस्लिम-1076.)

रसूल अल्लाह का बयान “सबसे बेहतरीन मख्लूक़” उन ईमारत बनाने वालो के लिए साफ़ ज़ाहिर करती है

की ये अमल सख्त मना है इस्लाम में बिना कोई रिवायत के. इस सबसे बेतरीन लानत की वजह ये अमल की हक़ीक़त है जो दो एहम ज़राए है बुतपरस्ती के :

1. कब्र के ऊपर ईमारत बनाना

2. तस्वीर बनाना

ये दोनों अमल हमेशाह शिर्क के तरफ ले जाते है जो की नूह (a.s.) की क़ौम के बुटो के कहानी से साफ़ ज़ाहिर होता है.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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