बच्चे को उठा कर नमाज़ पढ़ना

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BACHHE KO UTHA KAR NAMAZ PADHNA
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BACHHE KO UTHA KAR NAMAZ PADHNA
रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी नवासी ‘उमामह’ (r.a.) को उठा कर नमाज़ पढ़ते थे,
जब रुकू और सज्दा करते तो उन्हें उतार देते और जब क़ियाम करते तो उसे दोबारा उठा लेते.
Narrated by al-Bukhaari, no. 486, and Muslim, no. 844.
इस हदीस से ये मालूम हुआ की अगर आप अपने बच्चे को उठाते है या उसे निचे उतारते है तो आपकी नमाज़ में कोई फर्क नै पड़ेगा.
‘अब्द-अल्लाह इब्न शद्दाद अपने वालिद से रिवायत करते है: रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) एक रात हमें मगरिब या ईशा (रावी को शक है) की नमाज़ पढ़ने के लिए आये और वो हसन या हुसैन को उठाए हुए थे.
रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आगे आये और बचे को निचे उतरा, तकबीर कहा और नमाज़ की शुरुआत की. नमाज़ में उन्होंने सज्दा किया और अपने सज्दे को लम्बा किया,
मेरे वालिद ने कहा, “मैंने अपना सर (सज्दे से) उठाया और मैंने उस बच्चे को रसूल अल्लाह की पीठ पर देखा और वो सज्दे में थे तो मै वापिस से सज्दे में चला गया.
जब रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने नमाज़ ख़त्म किया, लोगो ने कहा,
‘ ऐ अल्लाह के रसूल अपने नमाज़ में इत्ता लम्बा सज्दा किया हम लोगो को लगा की कुछ हो गया है आपको या फिर आप पर वही आ रही है.

’ रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया.

“कुछ भी नहीं हुआ, लेकिन मेरा बेटा मेरे पीठ पर चढ़ा था और मै उसे परेशां (disturb) नहीं करना चाहता था जब तक के उसे काफी न हो जाता (मतलब अच्छे से वो बचा खेल चूका हो पीठ पर).
(Narrated by al-Nisaa’i, no. 1192; classed as saheeh by al-Albaani – may Allaah have mercy on him – in Saheeh Sunan al-Nisaa’i, 1/246).
सुब्हान अल्लाह इस्लाम कितना खूबसूरत दीन है और उतना ही आसान भी. अल्लाह हम लोगो को मरते दम तक इस्लाम पे क़ायम रखे. आमीन.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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